नई दिल्ली, आइएएनएस। कानून मंत्री किरण रिजिजू ने कहा है कि केंद्र सरकार बदलते समय और स्थिति के अनुसार आवश्यक चुनाव सुधारों के लिए उचित परामर्श के बाद कदम उठाएगी। चुनाव आयोग ने हाल में ही कहा था कि राजनीतिक दलों द्वारा चुनावी वादों के वित्तीय प्रभावों को लेकर दी गई जानकारी काफी सामान्य और अस्पष्ट होती हैं। चुनाव आयोग ने प्रस्ताव दिया है कि मतदाताओं को चुनावी वादों के वित्तीय प्रभावों की सही जानकारी देना राजनीतिक दलों के लिए अनिवार्य कर दिया जाए।

निर्वाचन आयोग ने दिया आदर्श आचार संहिता में संशोधन का सुझाव

इसके लिए आयोग ने आदर्श आचार संहिता में संशोधन का सुझाव दिया है। चुनाव सुधारों के संबंध में कानून मंत्रालय ने गुरुवार को ट्वीट किया। इसमें रिजिजू के हवाले से कहा गया, बदलते समय और स्थिति के अनुसार चुनाव सुधारों के लिए केंद्र सरकार उचित परामर्श के बाद कदम उठाएगी।

अस्पष्ट होती दलों की ओर से दी गई जानकारी

आदर्श आचार संहिता के तहत राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को चुनावी वादों का औचित्य बताना पड़ता है। इन वादों को पूरा करने के लिए पैसे जुटाने के संभावित तरीकों और साधनों का भी स्पष्टीकरण देना पड़ता है।हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि राजनीतिक दलों द्वारा दी गई जानकारी काफी अस्पष्ट होती है। इसमें मतदाताओं को वादों के वित्तीय प्रभावों की पर्याप्त जानकारी मुहैया नहीं कराई जाती है। 

चुनाव सुधारों पर जोर देता रहा है निर्वाचन आयोग

बीते जून महीने में समाचार एजेंसी पीटीआइ की एक रिपोर्ट आई थी जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त की ओर से चुनाव सुधारों की बात कही गई थी। केंद्रीय विधायी सचिव के साथ बातचीत में मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने राजनीतिक दलों का पंजीकरण समाप्त करने संबंधी अधिकार दिए जाने की मांग उठाई थी। चुनाव आयोग (ईसी) कुछ आधारों पर किसी राजनीतिक दल का पंजीकरण रद करने के लिए जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत अधिकार दिए जाने के मुद्दे को उठाता रहा है।

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Edited By: Krishna Bihari Singh

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