नई दिल्ली, [जागरण स्पेशल]। राफेल सौदे पर आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला देश के लिए कई मायनों में अहम साबित होने जा रहा है। इसी के साथ भारत में राफेल लड़ाकू विमान के आने का रास्ता भी साफ हो गया है। मई, 2020 में पहला राफेल विमान भारत आएगा। यह लड़ाकू विमान न केवल भारतीय वायुसेना को सशक्त बनाएगा बल्कि देश की सुरक्षा को और मजबूती भी प्रदान करेगा।

वायुसेना की बढ़ेगी धार और रफ्तार

भारत को आरबी सीरीज के राफेल मिलने जा रहे हैं जिनका नामकरण वर्तमान वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया के नाम पर किया गया है। राफेल के शामिल होने से वायुसेना की ताकत और बढे़गी। परमाणु हथियारों से लैस राफेल हवा से हवा में 150 किमी तक मिसाइल दाग सकता है। इसमें लगी स्कैल्प मिसाइल हवा से जमीन तक 300 किमी तक अचूक मार कर सकती है। जिसका मतलब है कि बालाकोट जैसे ऑपरेशन के लिए, भारतीय विमान को अब नियंत्रण रेखा पार करने की आवश्यकता नहीं होगी। वह स्वयं के हवाई क्षेत्र में रहकर हमला कर सकता है। कोई भी लड़ाकू विमान कितना ताकतवर है यह उसकी सेंसर क्षमता और हथियार पर निर्भर करता है। इस मामले में राफेल आधुनिक लड़ाकू विमान है।

मीटियोर मिसाइल

दृश्यता रेंज से परे हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों में यह सर्वश्रेष्ठ है। दुश्मन के विमान को सौ किमी दूरी पर ही नेस्तनाबूद कर सकती है। 60 किमी की दूरी मौजूद दुश्मन के विमान के बचने का कोई मौका नहीं होता। इसके मुकाबले में अमेरिका की एमराम मिसाइल पाकिस्तान के पास है, लेकिन मीटियोर के मुकाबले यह हम मोर्चे पर कमजोर है।

उन्नत तकनीक से लैस

फ्रांस, मिस्त्र और अन्य देशों के पास मौजूद राफेल लड़ाकू विमानों की तुलना में भारत को आपूर्ति किए जाने वाले राफेल विमान अधिक उन्नत तकनीक से लैस हैं।

सुखोई 30 से बेहतर

वर्तमान में भारतीय वायु सेना में मौजूद सबसे घातक एसयू 30 एमकेआइ लड़ाकू विमान की तुलना में राफेल अधिक ताकतवर है।

उड़ान क्षमता: एसयू 30 से 1.5 गुना अधिक

रेंज: एसयू 30 की 400-550 किमी रेंज की तुलना में 780-1055 किमी

प्रति 24 घंटे में पांच उड़ान कर सकता है जबकि सुखोई 30 एमकेआइ तीन उड़ान ही अंजाम दे सकता है।

पाकिस्तान के लिए काल

पाकिस्तान के एफ-16 लड़ाकू विमान के मुकाबले भारत के पास अबतक कोई ताकतवर लड़ाकू विमान नहीं था। वायुसेना भी कई सालों से राफेल की मांग कर रही थी। लेकिन राफेल भारतीय वायुसेना को बेहतर सेंसर और हथियारों के साथ निर्णायक बढ़त देगा। हवा में प्रत्येक राफेल को काउंटर करने के लिए पाकिस्तान को कम से कम दो एफ-16 की आवश्यकता होगी।

राफेल सौदा क्या है?

भारत ने सितंबर 2016 में फ्रांस सरकार के साथ 58 हजार करोड़ में 36 नए राफेल लड़ाकू विमान खरीदने का सौदा किया था। इस सौदे में भारत में अगले सात-आठ साल के भीतर तीन अरब यूरो के निवेश की बात भी शामिल है। भारत को प्रशिक्षण के लिए 28 सिंगल सीटर जेट और 8 ट्विन सीटर जेट मिलेंगे।

राफेल सौदे से लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक का घटनाक्रम

26 जनवरी 2016: भारत और फ्रांस ने 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के समझौते पर दस्तखत किए। 18 नवंबर 2016: सरकार ने संसद को बताया कि एक राफेल लड़ाकू विमान की लागत करीब 670 करोड़ रुपये आएगी और सभी विमानों की आपूर्ति अप्रैल 2022 तक होगी।

31 दिसंबर 2016: दासौं एविएशन की वार्षिक रिर्पोट में खुलासा हुआ कि 36 लड़ाकू विमानों की कीमत करीब 60,000 करोड़ रुपये है जो संसद में सरकार की ओर से बताई गई कीमत से दो गुनी है।

13 मार्च 2018: सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर राफेल सौदे की स्वतंत्र जांच कराने और इसकी कीमत संसद को बताने का निर्देश देने की मांग की गई।

पांच सितंबर: सुप्रीम कोर्ट ने राफेल सौदे पर रोक लगाने संबंधी जनहित याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार की।

10 अक्टूबर: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से राफेल सौदे की प्रक्रिया संबंधी जानकारी सीलबंद लिफाफे में देने को कहा।

24 अक्टूबर: पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर राफेल मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की।

31 अक्टूबर: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को 10 दिन के भीतर सीलबंद लिफाफे में विमान की कीमत संबंधी जानकारी देने को कहा।

12 नवंबर: केंद्र सरकार ने विमानों की कीमत संबंधी जानकारी सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को मुहैया कराई।

14 नवंबर: सुप्रीम कोर्ट ने अदालत की निगरानी में जांच कराने संबंधी याचिका पर फैसला सुरक्षित किया।

14 दिसंबर: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से लिए गए फैसले की प्रक्रिया में कहीं भी शंका पैदा नहीं हुई।

दो जनवरी 2019: यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट के 14 दिसंबर के फैसले की समीक्षा के लिए पुनर्विचार याचिका दाखिल की।

26 फरवरी: कोर्ट ने खुली अदालत में सुनवाई को सहमति दी।

23 अप्रैल: राफेल सौदे पर टिप्पणी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को अवमानना नोटिस जारी किया।

आठ मई: राहुल गांधी ने कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी।

10 मई: सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना याचिका और राफेल सौद पर पुनर्विचार याचिका पर फैसला सुरक्षित किया।

14 नवंबर: सुप्रीम कोर्ट ने राफेल सौदे पर दायर पुनर्विचार याचिका खारिज की और राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना के मामले को भी समाप्त किया।

Posted By: Dhyanendra Singh

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