नीलू रंजन, नई दिल्ली। विदेशी चंदे के दुरुपयोग का सुबूत मिलने के बाद गृह मंत्रालय ने केरल के एक एनजीओ मरकजुल इगासाथिल कैरियाथिल हिंदिया का एफसीआरए लाइसेंस निलंबित कर दिया है। इतना ही नहीं एनजीओ के सात बैंक एकाउंट भी फ्रीज कर दिए गए हैं। एनजीओ को नोटिस भी जारी किया गया है। अगर उसका जवाब संतोषजनक नहीं रहता है तो लाइसेंस भी रद हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक इस एनजीओ को सालाना लगभग 200 करोड़ रुपये का विदेशी चंदा मिलता है।

गलत जानकारी देने का भी आरोप

बताया जाता है कि इस चंदे का इस्तेमाल एनजीओ से जुड़े लोग निजी वाहन खरीदने और निजी खर्च में करते थे। उदाहरण के तौर पर इस एनजीओ ने विदेशी चंदे से 50 लाख रुपये में एक जमीन खरीदने का सौदा किया। बाद में सौदा रद हो गया लेकिन उस पैसे को एनजीओ के एकाउंट में जमा नहीं कराया गया। जब इस बारे में जानकारी मांगी गई तो एनजीओ ने कहा कि 50 लाख रुपये को अनाथ बच्चों में नकद बांट दिया गया।

नहीं खरीदा जा सकता निजी वाहन

हालांकि एनजीओ के दस्तावेजों से साफ पता चलता है कि अनाथ बच्चों को 2014 में जुलाई से दिसंबर के बीच नकद राशि बांटी गई थी। जबकि जमीन सौदा रद होने से 50 लाख रुपये नकद 13 जनवरी 2015 को एनजीओ को मिले थे। विदेशी चंदे से कई वाहन खरीदे गए, लेकिन उनमें से एक भी एनजीओ के नाम नहीं खरीदा गया, बल्कि एक व्यक्ति के नाम पर खरीदे गए। जबकि एफसीआरए नियमों के मुताबिक एनजीओ के पैसे का इस्तेमाल निजी वाहन खरीदने के लिए नहीं किया जा सकता है।

जमीन और लीज से लेना-देना नहीं और बना दी इमारत

मरकजुल इगासाथिल कैरियाथिल ¨हदिया किस तरह से विदेशी चंदे का दुरुपयोग करता था, इसका एक उदाहरण कोझिकोड में बनी इस्लामिक एजुकेशन बोर्ड आफ इंडिया की बिल्डिंग है। इस्लामिक एजुकेशन बोर्ड आफ इंडिया ने यह जमीन वक्फ बोर्ड से लीज पर ली थी, लेकिन इस इमारत का निर्माण एनजीओ ने विदेशी चंदे से करा दिया। जबकि उसका जमीन और लीज से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं था।

एफसीआरए लाइसेंस निलंबित होने का पहला मामला

मंत्रालय की वेबसाइट पर मौजूद आंकड़ों के अनुसार कोरोना काल में यह मामला है जब किसी एनजीओ का एफसीआरए लाइसेंस निलंबित हुआ है। इसके पहले फरवरी 2020 में विदेशी चंदे के दुरुपयोग के आरोप में छह एनजीओ के लाइसेंस निलंबित किए गए थे।

10 सालों में 20 हजार एनजीओ के लाइसेंस हुए रद

फरवरी में बजट सत्र के दौरान लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने बताया था कि फंड के दुरुपयोग और सालाना इनकम रिटर्न नहीं जमा करने के चलते पिछले 10 सालों में 20,600 से अधिक एनजीओ के एफसीआरए लाइसेंस रद किए गए हैं।