मुंबई, एजेंसियां। पाकिस्तान और उसकी सह पर काम करने वाले आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने मुंबई हमले को 'हिंदू आतंक' का रंग का देने की गहरी साजिश रची थी। लेकिन आतंकवादी अजमल कसाब के जिंदा पकड़े जाने से उनकी साजिश नाकाम हो गई थी। मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त और आतंकी हमले की जांच करने वाले राकेश मारिया ने अपनी पुस्तक में ये सनसनीखेज राज उजागर किए है।

मारिया की पुस्तक 'लेट मी से इट नाउ' का सोमवार को विमोचन हुआ। उन्होंने कहा है कि लश्कर ने कसाब के हाथ में कलावा बांधकर भेजा था। उसके पास बेंगलुरु निवासी समीर चौधरी के नाम से पहचान पत्र भी था। अगर पाकिस्तान और लश्कर की योजना के मुताबिक कसाब भी मार दिया गया होता तो हमले को 'हिंदू आतंक' का रूप दे दिया गया होता। तब मीडिया इसे 'हिंदू आतंक' का कारनामा बताया जाता। अखबारों में 'हिंदू आतंकवाद' के नाम पर बड़ी-बड़ी हेडलाइन होती, न्यूज चैनलों पर हिंदू आतंक के नाम से ब्रेकिंग खबरें चलती। कसाब के बेंगलुरु स्थिति घर पर उसके परिवार और पड़ोसियों से बात करने के लिए मीडिया की लाइन लग गई होती। लेकिन कसाब पाकिस्तान के फरीदकोट का अजमल आमिर कसाब निकला।

मारिया ने यह भी कहा है कि लश्कर ने दूसरे आतंकियों के भी भारत में पते वाले पहचान पत्र बनाए थे। कसाब का फोटो जारी होने के सवाल पर उन्होंने कहा है कि यह केंद्रीय एजेंसियों का काम था। मुंबई पुलिस ने तो कसाब की पहचान छिपाने की पूरी कोशिश की थी, क्योंकि उसकी जान को खतरा था।

लूटपाट के लिए लश्कर में गया था कसाब

मारिया ने अपनी पुस्तक में कहा है कि वह प्राय: प्रतिदिन कसाब से पूछताछ करते थे। उनके मुताबिक कसाब लूटपाट करने के लिए लश्कर के गिरोह में शामिल हुआ था, उसका जिहाद से कुछ लेना-देना नहीं था। भारत में आतंकी हमले के लिए भेजने से पहले लश्कर ने उसे सवा लाख रुपये और एक हफ्ते के लिए घर जाने की छुट्टी दी थी। रुपये उसने अपनी बहन की शादी के लिए परिजनों को सौप दिया था।

लोगों को नमाज पढ़ते देख हैरान रह गया था

'लेट मी से इट नाउ' में मारिया ने कहा है कि लश्कर ने कसाब के दिमाग में यह भर दिया था कि भारत में मुस्लिमों को नमाज नहीं पढ़ने दिया जाता। जेल में रहते हुए उसने जब अजान की आवाज सुनी तो उसे यकीन नहीं हुआ। बाद में मेट्रो सिनेमा के पास मस्जिद में उसे ले जाया गया। वहां लोगों को नमाज पढ़ते देख कसाब हैरान रह गया था।

2008 में हमले से दहल गई थी माया नगरी

मुंबई में 26 नवंबर, 2008 को आतंकी हमला हुआ था। इसमें 166 लोगों की मौत हुई थी और तीन सौ से ज्यादा लोग घायल हुए थे। पाकिस्तान से कसाब के साथ 10 आतंकी हमला करने आए थे। सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में नौ आतंकियों को मार गिराया था। कसाब जिंदा पकड़ा गया था जो हमले में पाकिस्तान के हाथ को साबित करने में अहम साबित हुआ था। बाद में उसे फांसी दे गई थी।

Posted By: Sanjeev Tiwari

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