झाबुआ (यशवंत सिंह पंवार)। झाबुआ के कालाखूंट पंचायत में अब मोदी फलिया बन गया है। इस फलिए में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 36 मकान एक साथ बने। इस सौगात से खुश होकर ग्रामीणों ने गांधी जयंती पर ग्रामसभा में 'भगत फलिए का नाम बदलकर 'मोदी फलिया रखने का सर्वानुमति से निर्णय ले लिया। ग्रामीण संसद के इस प्रस्ताव के बाद पिछले सप्ताह बोर्ड भी लगा दिया गया है।

देश का संभवत: यह पहला ऐसा मोहल्ला (आदिवासी क्षेत्र में फलिया कहा जाता है) है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से जाना जाएगा। जिला मुख्यालय से लगभग 20 किमी दूर स्थित झाबुआ जनपद की पंचायत कालाखूंट में 2016-17 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 285 आवास स्वीकृत हुए थे। इनमें से 120 आवास अब तक बन चुके हैं।

मध्य प्रदेश के झाबुआ में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिला घर

पहले था भगत फलिया

कालाखूंट पंचायत में चार गांव कालाखूंट, खटापानी, पिटोल छोटी और पांचकानाका आते हैं। आबादी 3319 है। कालाखूंट गांव के भगत फलिए में 450 ग्रामीण रहते हैं। इसमें सर्वाधिक 36 परिवारों को एक साथ प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत छत मिली। डेढ़-डेढ़ लाख स्र्पए की सरकारी मदद से जब फलिएवासियों के आवास का सपना पूरा हुआ तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। रहवासी पिछले साल 2 अक्टूबर को हुई ग्रामसभा में अपने फलिए का नाम बदलने के लिए अड़ गए। उनका कहना था कि मोदी फलिया रखा जाए। अंतत: सर्वानुमति से ग्राम संसद में फैसला हुआ। अब पिछले सप्ताह वहां मोदी फलिए का सरकारी बोर्ड भी लग गया है।

झोपड़े से पक्के मकान का सफर

- हितग्राही गनजी मडिया, शंकर धुलिया, धनजी गेंदा आदि का वर्षों से आवास का बड़ा सपना रहा है। इसके लिए वे प्रयासरत थे। आखिरकार यह सपना प्रधानमंत्री की योजना के कारण पूरा हुआ है। इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री के नाम पर ही फलिए का नाम रख दिया है।

- कालाखूंट के सरपंच जोगड़ा बबेरिया का कहना है कि गरीबों को झोपड़े की जगह पक्के मकान मिल गए हैं।। ऐसे में उनका खुश होकर इस तरह का प्रस्ताव करना वाजिब है। इस साल 66 आवास की स्वीकृति और मिल गई है।

- पंचायत सचिव नरवरसिंह नायक ने बताया कि 1 लाख 20 हजार स्र्पए मकान का, 15,400 मनरेगा, 12 हजार शौचालय का और अन्य मदद को मिलाकर कुल डेढ़ लाख में एक आवास बन गया है।

- पंचायत इंस्पेक्टर बाबूलाल मेड़ा ने बताया कि आवास योजना के तहत कालाखूंट पंचायत की उपलब्ध सबसे अच्छी रही है। वीडियो भी ग्रामीण विकास मंत्रालय को दिल्ली भेजे गए हैं।

- झाबुआ जनपद सीईओ पीसी वर्मा ने बताया कि हर पंचायत में चिन्हित हितग्राहियों को इस योजना के तहत मदद दी जा रही है। ग्रामसभा ने कालाखूंट में नाम बदलने का फैसला किया था।

Posted By: Sanjay Pokhriyal