नई दिल्ली। हर एक पिता के लिए बेटियां प्यारी होती हैं, इसी यही वजह से हर बेटी को पापा की परी होती है। छत्तीसगढ़ के पहले सीएम रहे अजीत जोगी को भी अपनी बेटी से बेइंतहा प्यार था। प्यार भी इतना कि वो अपनी बेटी पर जान छिड़कते थे, कुछ भी मांगने से पहले बेटी को वो चीज देने का दिल अजीत जोगी रखते थे। शायद यही वजह है जिसके कारण जब उनकी बेटी ने सुसाइड किया तो वो एकदम से टूट गए थे।

उनको अपनी दुनिया अधूरी लगती थी, कहीं न कहीं कमी महसूस करते थे। अजीत जोगी का अपनी बेटी के लिए इतना प्यार था कि उन्होंने इंदौर में रायगढ़ के कुतरा रोड पर जो बंगला बनवाया उसका नाम भी अपनी बेटी के नाम पर रखा था। वो नाम आज भी उनके उस बनाए गए मकान पर देखने को मिल जाता है। नाम था 'अनुषा विला'। अजीत जोगी की मौत के बाद अब अनुषा विला उनकी एक याद बन रह गया है। अजीत जोगी की पत्नी का नाम डॉ. रेणु जोगी और बेटे का नाम अमित जोगी है। बेटी का नाम अनुषा नेगी था। 

अजीत जोगी ने वैसे तो अपने जीवन के निर्धारित किए गए सारे लक्ष्य पूरे कर लिए थे मगर बेटी की मौत के बाद वो हमेशा कुछ न कुछ कमी महसूस करते थे। कुछ अधूरापन सा उनकी जिंदगी में था जो उनको परेशान करता रहता था। उनको हमेशा ऐसा लगता था कि मैंने अपने सारे सपने तो पूरे कर लिए मगर कहीं न कहीं कुछ रह गया है। उनको अपनी दुनिया अधूरी लगती थी। उन्हें अपनी बेटी की बहुत याद आती थी।

बेटी अनुषा को लगता था कि जब उसके पिता ने उसकी सारी इच्छाएं पूरी की हैं तो वो उसकी मनमर्जी से शादी करने की ये इच्छा पूरी ही कर देंगे, मगर इसी बात को लेकर पिता-बेटी में तनातनी रहने लगी। बेटी ने देखा कि जब पिता उसकी ये बात नहीं मान रहे हैं तो उसने अपनी जीवनलीला ही खत्म कर ली।

अजीत जोगी के परिवार को करीब से जानने वाले बताते हैं कि उनकी बेटी अनुषा किसी से प्यार करती थी वो उसी से शादी करना चाहती थी। मगर पिता अजीत जोगी इसके लिए तैयार नहीं थे, इस बात को लेकर दोनों के बीच काफी कहासुनी होती रहती थी। अजीत जोगी तब इंदौर में रहते थे। बताते हैं कि अनुषा किसी लड़के से बहुत प्यार करती थी, वो उसी से शादी करना चाहती थी लेकिन पिता अजीत इसके लिए कतई तैयार नहीं थे। बिटिया अनुषा भी नहीं मानी। वो उसी लड़के से शादी करने पर अड़ी थी। ये बात 12 मई साल 2000 की है।

बताते हैं उस दिन सोनिया गांधी इंदौर आई थीं, पिता अजीत जोगी प्रोटोकॉल निभाने के तहत सोनिया गांधी की अगवानी में लगे थे। इस दौरान बेटी अनुषा घर पर अकेली थी। उसने घर में सुसाइड कर लिया। उस समय बेटी अनुषा को इंदौर के कब्रिस्तान में दफना दिया गया। अजीत बेटी के दफनाए जा चुके शव को अपने पैतृक गांव गोरेल्ला ले जाना चाहते थे लेकिन नगर निगम से कब्र को दुबारा से खोदने की अनुमति नहीं मिल रही थी। 

अजीत जोगी जब सीएम बने तो इंदौर नगर निगम ने भी उनको बेटी के शव को खोदने की अनुमति दे दी। 5 जून 2001 को इंदौर के कब्रिस्तान से रातों-रात उनकी बेटी की कब्र खोदकर उसका शरीर निकाला गया, उसके बाद राजकीय प्लेन से उसे बिलासपुर ले जाया गया, वहां से रायपुर। उसके बाद अजीत जोगी कलेक्टर से मिलने रायपुर पहुंच गए और बेटी का शव फिर दफना दिया गया। दरअसल शव को दफन किए जाने की इसाइयों में अंतिम संस्कार की एक प्रथा।

बताया जाता है कि अजीत जोगी के पिता ने ईसाई धर्म अपना लिया था। एक बात ये भी कही जाती है कि जब वो राज्यसभा में थे, उस दौरान जान-बूझकर हर रविवार उस चर्च में जाते थे जहां सोनिया गांधी प्रेयर करने के लिए पहुंचती थीं, इस तरह से भी वो सोनिया गांधी के करीबी बनना चाहते थे। मगर इसमें उनको बहुत अधिक सफलता नहीं मिली।

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