जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सेवानिवृत्ति के बाद या फिर इस उम्र को पार कर चुके देश के बुजुर्गों के हौसले को अब ताकत मिलने लगी है। केंद्र सरकार की पहल के बाद दो हजार से ज्यादा उद्योगों ने बुजुर्गों को नौकरी देने की पहल की है। साथ ही इसे लेकर शुरू किए गए आनलाइन रोजगार पोर्टल 'सेक्रेड' (सीनियर एबल सिटीजन्स री-एम्प्लायमेंट इन डिगनिटी) पर रजिस्ट्रेशन भी कराया है।

सम्मानजनक काम करना चाहते सीनियर सिटीजन्स

दूसरी ओर बड़ी संख्या में ऐसे बुजुर्ग भी आगे आए हैं जो अपने अनुभव के आधार पर नौकरी या फिर ऐसा कोई सम्मानजनक काम चाहते है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के मुताबिक देश में बुजुर्गों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह पूरी योजना तैयार की गई है। इस दौरान उन लोगों को सबसे ज्यादा फोकस किया गया है, जो सेवानिवृत्ति या फिर इस उम्र को पार करने के बाद भी कोई सम्मानजनक काम करना चाहते हैं।

शुरू किया गया आनलाइन रोजगार पोर्टल

यही वजह है कि सरकार ने इन्हें रोजगार मुहैया कराने के लिए एक आनलाइन रोजगार पोर्टल शुरू किया है। इसके शुरू होते हुए दो हजार से ज्यादा उद्योगों ने बुजुर्गों को सम्मानजनक काम देने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। इस दौरान इन उद्योगों की ओर से दो सौ से ज्यादा नौकरियां भी निकाल दी गई हैं।

अभी तो यह शुरुआत है... 

मंत्रालय की मानना है कि अभी तो शुरुआत है, जल्द ही और भी उद्योग इस ओर पहल करेंगे। उद्योग वैसे भी अनुभवी लोगों को नौकरी में प्राथमिकता देते है। बुजुर्गों का लंबा अनुभव उद्योगों और देश के विकास दोनों को ही गति देगा। इस बीच 41 सौ से ज्यादा बुजुर्गो ने इस पोर्टल पर जाकर नौकरियों के लिए रजिस्ट्रेशन भी कराया है।

निजी कंपनियों को निर्देश

गौरतलब है कि सरकार ने पिछले दिनों ही बुजुर्गों को नौकरी मुहैया कराने के लिए देश में आनलाइन रोजगार पोर्टल खोलने की एलान किया था। साथ ही सीआइआइ, फिक्की जैसे संस्थानों व निजी कंपनियों से कुछ ऐसी नौकरियां भी सृजित करने को कहा था जो बुजुर्गों के लिए उपयुक्त हों।

सरकार ने उठाए कदम 

मौजूदा समय में देश में बुजुर्गों (साठ साल से ज्यादा उम्र) की कुल आबादी करीब 14 करोड़ है। जो देश की कुल जनसंख्या का लगभग दस फीसद है। एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2050 तक देश में बुजुर्गों की कुल आबादी तीस करोड़ से ज्यादा हो जाएगी। बुजुर्गों की बढ़ती संख्या को देखते हुए ही सरकार उनसे जुड़ी सुविधाओं को जुटाने में जुटी हुई है।  

Edited By: Krishna Bihari Singh