जैन मुनि का विवादित बयान, कहा- परिवार नियोजन से हमारे समाज के लोगों की संख्या घट रही
जैन आचार्य विजय सागर सूरी ने एक कार्यक्रम में विवादित बयान देते हुए कहा 180 साल बाद जैनों का अस्तित्व नहीं रहेगा।
अहमदाबाद, जेएनएन। एक तरफ पूरी दुनिया आबादी बढ़ने से परेशान है, वहीं एक जैन मुनि ने अपनी सभा में समाज के लोगों को जनसंख्या बढ़ाने का विवादिय बयान दिया है। जैन आचार्य विजय सागर सूरी ने दावा किया है कि 180 साल बाद जैनों का अस्तित्व नहीं बचेगा। वडोदरा में आयोजित एक समारोह में आचार्य विजय सागर ने कहा कि देश में अभी जैन समाज के लोगों की संख्या करीब 60 लाख 51 हजार है। उनका कहना है कि जनगणना के वक्त कई जैन परिवार धर्म के कॉलम में हिंदू लिखते हैं, इसलिए हो सकता है जैनों की संख्या का यह आंकडा कुछ अधिक भी हो।
जैन आचार्य ने कहा कि बृहद मुंबई जैन संघ, दुनिया में जैन समाज के लोगों की जनगणना करा रहा है। जनगणना के लिए मुंबई के 780 श्वेताम्बर, दिगम्बर तथा जैन संस्थान कों 35 हजार आवेदन पत्र बांटे गए हैं। अब तक करीब पंद्रह सौ परिवारों ने ऑनलाइन पंजीकरण भी कराया है। जैनाचार्य ने बताया कि जैन समाज में चार मुख्य फरका हैं। इन्हें संप्रदाय,गच्छब, संघाडा आदि आते हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2001 से 2011 तक देश की जनसंख्या में 17.7 प्रतिशत की दर से बढ़ोतरी हुई थी। इसमें मुस्लिमों की संख्या 24.6 फीसद की दर से हिंदुओं की संख्या 16.8 फीसद, ईसाइयों की 15.5 प्रतिशत की दर से सिख की 8.4, बौद्ध की 6.1 तथा जैनों की संख्या 5.4 की दर से बढ़ी है।
जैन आचार्य ने विवादित बयान देते हुए कहा कि जैन तीर्थ पालीताणा में 200 से 250 जैन परिवार निवास करते हैं। इनकी संख्या बढ़कर एक हजार तक होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि देश में पारसी समाज की संख्या 60 हजार है, आगामी 25 वर्ष में इनका अस्तित्व समाप्त हो सकता है। इसी प्रकार 35 साल पहले जैन समाज की संख्या एक करोड थी, जो अब 60 लाख रह गई है। इसके लिए परिवार नियोजन की नीति हम दो हमारे दो जिम्मेदार है। इसलिए जैन समाज के लोगों की संख्या घट रही है।
कई परिवार अब हम दो हमारे एक भी करने लगे हैं, लेकिन समाज के लोगों की संख्या को बढाने के लिए हम दो हमारे तीन का नारा बुलंद करना होगा। उनका कहना है कि पहले एक ही दंपति को चार से पांच बच्चे होते थे। अब धीरे धीरे बच्चों की संख्या घटने लगी है। दिगंबर जैन महासमिती ने जैनों की संख्या बढाने के लिए नए संतान को जन्म देने वाले दंपत्ती को आर्थिक सहायता का भी ऐलान किया है।
उन्होंने कहा कि 2200 साल पहले दुनिया भर में जैनों की संख्या 20 करोड़ थी। ईरान, इराक, सीरिया, कुवैत, तुर्की, इथोपिया, मंगोलिया, अफगानिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, भूटान, चीन आदि में जैन समाज के लोगों की संख्या काफी थी। इसी तरह बस्ती घटती रही तो अस्तित्व खतरे में आ सकता है।
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