नई दिल्ली, [स्पेशल डेस्क]। सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद देश में लिंगानुपात लगातार घट रहा है। हमारे देश में प्रति एक हजार लड़कों पर सिर्फ 940 लड़कियां हैं। इसका सीधा सा मतलब ये है कि 940 लड़कों को तो भविष्य में बहू मिल सकती है लेकिन बाकी बचे 60 लड़के कुंवारे रह जाएंगे। अगर भ्रूण हत्या और लड़कियों के खिलाफ बढ़ रहे अपराधों पर रोक नहीं लगाई गई तो निकट भविष्य में लिंगानुपात में अंतर और भी भयानक रूप ले सकता है। भारत में भ्रूण हत्या और प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण गैर कानूनी है और इसमें दंड का प्रावधान भी है। कड़े कानून के बावजूद लिंग परीक्षण के कई मामले सामने आते रहते हैं। अब तो लोग इस कानून से बचने के लिए पड़ोसी देश नेपाल में जाकर लिंग परीक्षण धड़ल्ले से करा रहे हैं। 

भारत-नेपाल की खुली सीमा के चलते बॉर्डर पर गर्भवती महिलाएं लिंग परीक्षण के लिए आसानी से नेपाल चली जाती हैं। इसके बाद जैसे ही जांच में पता चलता है कि पेट में पल रहा भ्रूण लड़की है उसे गर्भ में मार दिया जाता है। इस तरह के काम करने वाली महिलाओं को ये क्यों नहीं समझ आता कि वो भी एक महिला हैं। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि महिला के पेट में जो बच्ची है वो उसे नहीं मारना चाहती है लेकिन परिवार का दबाव, माहौल और घर का वातावरण उस महिला को इस पाप में भागीदार बना देता है। महिला पर बेटी को गर्भ में ही मारने के लिए दबाव डाला जाता है।

भ्रूण जांच कराने को लेकर देश का कानून

1. गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम, 1994 के तहत गर्भाधारण पूर्व या बाद लिंग चयन और जन्‍म से पहले कन्‍या भ्रूण हत्‍या के लिए लिंग परीक्षण करना गुनाह है।

2. भ्रूण परीक्षण के लिए सहयोग देना व विज्ञापन करना कानूनी अपराध है। इसके तहत 3 से 5 साल तक की जेल व 10 हजार से 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

3. गर्भवती स्त्री का जबर्दस्ती गर्भपात कराना अपराध है। ऐसा करने पर आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।

4. धारा 313 के तहत गर्भवती महिला की मर्जी के बिना गर्भपात करवाने वाले को आजीवन कारावास या जुर्माने से भी दण्डित किया जा सकता है।

5. धारा 314 के तहत गर्भपात करने के मकसद से किये गए कार्यों से अगर महिला की मौत हो जाती है तो दस साल की कारावास या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

6. आईपीसी की धारा 315 के तहत शिशु को जीवित पैदा होने से रोकने या जन्म के बाद उसकी मृत्यु मकसद से किया गया कार्य अपराध होता है, ऐसा करने वाले को दस साल की सजा या जुर्माना दोनों हो सकता है।

वास्तव में कन्या भ्रूण हत्या के लिए कानून से ज्यादा समाज जिम्मेदार है। हमारे देश की अजीब विडम्बना है कि सरकार की लाख कोशिशों के बाद भी समाज में यह घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही है। वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी ने अल्ट्रासाउन्ड तकनीकी के द्वारा भ्रूण-परिक्षण की जानकारी देकर कन्या- भ्रूण हत्या को और व्यापक बना दिया है।

21वीं सदी में इस तरह की बातें कचोटती हैं। हम किस दुनिया में जी रहे हैं। एक ओर जहां बेटियां देश व परिवार का नाम रोशन कर रही हैं तो वहीं दूसरी ओर बेटियों को गर्भ में ही मार दिया जाता है। समाज की सोच है कि बुढ़ापे में बेटा काम आता है। क्या इससे इत्तेफाक रखना चाहिए। अगर ऐसा है तो जितने भी बृद्धाश्रम खुले हैं फिर तो उतने नहीं खुलने चाहिए थे। 

राज्यों में लिंगानुपात

राज्यों के हिसाब से अगर लिंगानुपात की बात करें तो जनगणना के हिसाब से हरियाणा में जहां साल 2001 में प्रति 1000 लड़कों पर 861 लड़कियों का रेशिओ था जो साल 20011 में बढ़कर 877 हो गया। पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र ये ऐसे राज्य रहे जिनमें सेक्स रेशियो बढ़ा। तो वहीं बिहार और गुजरात में सेक्स रेशियो घटने के आंकड़े सामने आए।

सरकारी कोशिशें, सरकारी योजनाएं

देश लगातार कम हो रहे लिंगानुपात को ध्यान में रखते हुए पहले भी सरकार कई योजनाएं लेकर आई लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना लाकर एक अलग ही मिसाल पेश की है। इस योजना के तहत बेटियां न सिर्फ सुरक्षित होंगी बल्कि शिक्षित भी होंगी। इस योजना को पीएम मोदी ने साल 2015 में हरियाणा से जारी किया था। 

एक कड़वा सच ये भी

एक रिपोर्ट में सामने आया था कि हरियाणा में सेक्स रेशियो इतना कम हो गया था कि यहां लोग शादी करने के लिए लड़कियों को खरीदते थे और बच्चे पैदा करके उन्हें आगे बेच दिया करते थे। यूनाईटेड नेशंस आफिस आन ड्रग्स एंड क्राईम (यूएनओडीसी) की रिपोर्ट के मुताबिक जबरन शादी और बंधुआ मजदूरी के लिए हरियाणा में नॉर्थ ईस्ट की लड़कियों को लाने का प्रचलन हो गया था। हरियाणा में करनाल, मेवात, रेवाड़ी, कुरुक्षेत्र, जींद, यमुनानगर और हिसार जिले को उत्तर पूर्वी राज्यों से तस्करी द्वारा लड़कियों को लाने का प्रमुख स्थान माना जाता था। हरियाणा के लगभग सभी गांवों में 50 से ज्यादा महिलाएं तस्करी के माध्यम से लाकर यहां दुल्हन बनाई गईं। असल में प्रदेश में कन्या भ्रूण हत्या के चलते हालात ये पैदा हो गए हैं कि बड़ी संख्या में लड़कों की शादी की डेट एक्सपायर हो रही होती है और रिश्ता लेकर कोई आता नहीं है, ऐसे में 20 से लेकर 50 हजार रुपए खर्च करने पर उन्हें पत्नी मिल जाती है।

बेटियां नहीं है किसी से कम

एक तरफ जहां देश में लड़कियों की कोख में ही कब्र बना दी जाती है वहीं दूसरी तरफ लड़कियों ने मिसालें भी पेश की हैं कि वो किसी भी मामले में लड़कों से कम नहीं है। उदाहरण के तौर पर मानुषी छिल्लर, फोगाट सिस्टर्स, साक्षी मलिक, सानिया मिर्जा, साइना नेहवाल, कल्पना चावला, पीवी सिंधु, मेरिकॉम ये वो नाम हैं जिन्होंने न सिर्फ देश का बल्कि अपने परिवार का भी नाम रोशन किया है। वैसे अगर देखा जाए तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपनी कैबिनेट में महिलाओं को तवज्जो दी है। उनकी कैबिनेट में 7 महिला मंत्री हैं। यही नहीं कुछ महिलाओं के पास बेहद अहम मंत्रालय हैं। हाल ही में पीएम मोदी ने देश को पहली महिला रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के रूप में दी। 

महिलाओं पर अत्याचार, कन्या भ्रूण हत्या, आर्थिक लाभ के लिए महिलाओं के अभद्र प्रदर्शन का दुरुपयोग एक साधारण बात है। प्राचीन काल के भारत में महिलाओं का बहुत सम्मान किया जाता था। परंतु जैसे-जैसे समय बीतता गया महिलाओं की स्थिति में भीषण बदलाव आया। महिलाओं के प्रति लोगों की सोच बदलने लगी थी। क्या कभी इस बात का अंदाजा लगाया है कि महिलाओं को लेकर जिस तरह के हालात बन रहे हैं और यही सब चलता रहा तो आने वाले दिनों में क्या हाल होगा। जिस हिसाब से लिंगानुपात घट रहा है उस हिसाब से आने वाले दिनों में सिर्फ पुरुष ही पुरुष देखने को मिलेंगे। 

यह भी पढ़ें: पाकिस्तान की निर्भया: कसूर सिर्फ इतना कि मैं थी जैनब

 

Posted By: Abhishek Pratap Singh

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस