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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 26, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

चीन ने बनाई सबसे ताकतवर पनडुब्‍बी, भारत भी कुछ ऐसे कर रहा है तैयारी

By Kamal VermaEdited By:
Published: Mon, 26 Jun 2017 09:43 AM (IST)Updated: Mon, 26 Jun 2017 04:54 PM (IST)

चीन ने दुनिया की सबसे खतरनाक और ताकतवर पनडुब्बी बनाई है। वहीं भारत भी चीन से समुद्र में टक्‍कर लेने ...और पढ़ें

चीन ने बनाई सबसे ताकतवर पनडुब्‍बी, भारत भी कुछ ऐसे कर रहा है तैयारी
चीन ने बनाई सबसे ताकतवर पनडुब्‍बी, भारत भी कुछ ऐसे कर रहा है तैयारी

नई दिल्‍ली (स्‍पेशल डेस्‍क)। चीन ने दुनिया की सबसे खतरनाक और ताकतवर पनडुब्बी बनाई है। चीन के शोध संस्थान चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंस के मुताबिक इसे शंघाई में बनाया गया है। संस्थान के मुताबिक 'सुपर कंडक्टिव मैग्नेटिक एनोमली डिटेक्शन एरे' नाम से बनाई गई ये पनडुब्बी समुद्र में छिपे खनिजों और दूसरी पनडुब्बियों का तेजी से पता लगाने में सक्षम है। प्रोफेसर झांग झी के मुताबिक इसका इस्तेमाल खनिजों का पता लगाने और सागर में पनडुब्बियों का पता लगाने में किया जा सकता है। वैज्ञानिकों की विशेषज्ञ समिति ने इसका परीक्षण भी किया है। गौरतलब है कि चीन ने कुछ समय पहले ही अपना एक विमानवाहक युद्धपाेत भी समुद्र में उतारा था।

भारत की तैयारी

हालांकि भारत भी चीन से समुद्र में टक्‍कर लेने के लिए पहले ही अपनी एक योजना को हरी झंडी दे चुका है। यह परियोजना करीब साठ हजार करोड़ रुपये की है। सरकार ने महत्वाकांक्षी सामरिक साझेदारी (स्‍ट्रैटेजिक पार्टनरशिप) के तहत पहली बार देश में ही रक्षा उपकरणों के निर्माण के लिए प्रमुख निजी कंपनियों को यह जिम्मेदारी सौंपी है। यह परियोजना चीन के पनडुब्बी बेड़े में तेज विस्तार से मुकाबले के लिए अहम साबित होगी।

साठ हजार करोड़ रुपये की है परियोजना

इस परियोजना के तहत भारत सरकार 60,000 करोड़ रुपए की लागत से P-75I पनडुब्बियों के कार्यक्रम का विस्‍तार करेगी। रक्षा मंत्रालय की ओर से यह अब तक का सबसे बड़ा कार्यक्रम है और इसकी मंजूरी दो जून को हुई कैबिनेट की सुरक्षा समिति की मीटिंग में दी जा चुकी है। इस कार्यक्रम की शुरुआत के साथ ही सरकार देश में रक्षा उपकरणों को तैयार करने से जुड़ी एक बड़ी और अहम नीति की ओर बढ़ेगी। यह परियोजना स्‍ट्रैटेजिक पार्टनर (एसपी) माॅडल के तहत है। इसका मकसद रक्षा उत्‍पादन की अग्रणी निजी कंपनियों को एक साथ लाना है। रक्षा मंत्रालय के इस कार्यक्रम के तहत कई मेगा डील सेनाओं के हिस्‍से आएंगी। फिलहाल इस प्रोजेक्‍ट के लिए लार्सन एंड टूब्रो (एलएंडटी) और रिलायंस डिफेंस कंपनियां सबसे शीर्ष पर हैं।

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स्‍कॉर्पिन क्‍लास की पनडुब्बियों का निर्माणकार्य जारी

चीन की समुद्री ताकत को देखते हुए प्रोजेक्‍ट 75 के तहत वर्तमान समय में छह स्‍कॉर्पिन क्‍लास की पनडुब्बियों का निर्माण किया जा रह है। इन पनडुब्बियों को फ्रांस की नौसेना रक्षा और ऊर्जा कंपनी डीसीएनएस की ओर से डिजाइन किया गया है। पनडुब्बियों का निर्माण मंझगांव डॉक लिमिटेड में हो रहा है। एसपी मॉडल के तहत चुनिंदा निजी कंपनियों को विदेशी कंपनियों की साझेदरी के साथ भारत में पनडुब्बियों और लड़ाकू विमान बनाने के लिए प्‍लेटफॉर्म दिया जाएगा।

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एफडीआई की सीमा निर्धारित

सरकार की ओर से एसपी मॉडल के तहत करीब 49 प्रतिशत की एफडीआई सीमा निर्धारित की गई है। सभी विदेशी कंपनियां, भारतीय कंपनियों के नियंत्रण में रहेंगी। इस कार्यक्रम की रुपरेखा के तहत भारत की चुनिंदा कंपनियों के लिए ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्‍यूफैक्‍चरर्स यानी ओईएम के साथ ट्रांसफर ऑफ टेक्‍नोलॉजी की जरूरत होगी।

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