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'RSS को लोगों तक पहुंचाने के लिए गहन जनभागीदारी की आवश्यकता', तमिलनाडु में बोले मोहन भागवत

Published: Thu, 11 Dec 2025 05:40 AM (IST)Updated: Thu, 11 Dec 2025 06:57 AM (IST)

भागवत ने कहा कि संघ पिछले 10-15 वर्षों से नियमित चर्चा का विषय भी बन गया है। जब चर्चा होती ...और पढ़ें

'RSS को लोगों तक पहुंचाने के लिए गहन जनभागीदारी की आवश्यकता'- मोहन भागवत (फाइल फोटो)

'RSS को लोगों तक पहुंचाने के लिए गहन जनभागीदारी की आवश्यकता'- मोहन भागवत (फाइल फोटो)

HighLights

  1. कहा, संघ की यात्रा कई वर्षों में ''तथ्यों के बजाय धारणाओं'' के आधार पर फैली 

  2. आरएसएस के स्वयंसेवक प्रामाणिक और तथ्यात्मक जानकारी करेंगे साझा

पीटीआई, तिरुचिरापल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि जनता के साथ गहन जुड़ाव आवश्यक है, क्योंकि संघ की यात्रा कई वर्षों में ''तथ्यों के बजाय धारणाओं'' के आधार पर फैली है। इसी को ध्यान में रखते हुए देशभर में नए कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसमें आरएसएस के स्वयंसेवक लोगों से बात करेंगे और इसके बारे में प्रामाणिक और तथ्यात्मक जानकारी साझा करेंगे।

संघ पिछले 10-15 वर्षों से नियमित चर्चा का विषय भी बन गया

भागवत ने कहा कि संघ पिछले 10-15 वर्षों से नियमित चर्चा का विषय भी बन गया है। जब चर्चा होती है तो एक बात स्पष्ट हो जाती है कि शुभचिंतक और विरोधी दोनों ही धारणाओं के आधार पर बात करते हैं, तथ्यों के आधार पर नहीं। वह तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में संघ के एक कार्यक्रम में लोगों को संबोधित कर रहे थे।

 संघ की छवि को धूमिल करने के लिए कुछ धारणाएं गढ़ी गई

उन्होंने कहा कि संघ की छवि को धूमिल करने के लिए कुछ धारणाएं गढ़ी गई हैं। संघ आकाश के समान है। आकाश अतुलनीय है। आकाश को देखने के लिए उसका अनुभव करना पड़ता है। इसलिए संघ को लेकर ये गलत धारणाएं दूर होनी चाहिए। संघ शहर के भीतर एक शक्तिशाली संगठन बनकर नहीं रहना चाहता। वह पूरे समाज को संगठित करना चाहता है।

पिछले 20 वर्षों से संघ धीरे-धीरे राष्ट्रीय मामलों के केंद्र में आ गया

कहा कि जब देश में आरएसएस की उपस्थिति इतनी मजबूत नहीं थी और लोगों को इसके बारे में जानकारी दी गई तो वे सुनना नहीं चाहते थे। लेकिन पिछले 20 वर्षों से संघ धीरे-धीरे राष्ट्रीय मामलों के केंद्र में आ गया। उन्होंने कहा कि इसलिए जब हम उन्हें बुलाते हैं तो वे आते हैं और हमारी बात सुनते हैं। समाज में आरएसएस के प्रति विश्वास है। इसलिए यह निर्णय लिया गया कि हमें इन गलत धारणाओं को दूर करने के लिए कुछ प्रयास करना चाहिए।

तमिलनाडु में तिरुपरनकुंड्रम मुद्दा हिंदुओं की ताकत के आधार पर भी किया जा सकता है हल

आरएसएस प्रमुख भागवत ने कहा कि तिरुपरनकुंड्रम मुद्दा तमिलनाडु में हिंदुओं की ताकत के आधार पर भी हल किया जा सकता है। इस मुद्दे को यदि बढ़ाने की आवश्यकता होगी तो ऐसा किया जाएगा।

यह मामला अब न्यायालय में है, इसे हल होने दें। उनसे पूछा गया कि क्या आरएसएस को इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना चाहिए, भागवत ने कहा कि तमिलनाडु में हिंदुओं का जागरण वांछित परिणाम लाने के लिए पर्याप्त है।

डीएमके के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें अरुलमिगु सुब्रमण्य स्वामी मंदिर के श्रद्धालुओं को मदुरै के पास एक दरगाह के नजदीक तिरुपरनकुंड्रम की पहाड़ी पर स्थित पत्थर के दीपक स्तंभ 'दीपतून' पर पारंपरिक 'कार्तिकई दीपम ' जलाने की अनुमति दी गई थी। इसे लेकर विवाद चल रहा है।