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    पटना में 'आदित्य विजन' के ठिकानों पर इंटेजलीजेंस यूनिट का छापा, 46 करोड़ की जीएसटी चोरी पकड़ी

    By Bhupendra SinghEdited By:
    Updated: Thu, 06 Sep 2018 09:57 PM (IST)

    कंपनी ग्राहकों से जीएसटी वसूल रही थी जबकि उसे सरकार के खाते में जमा नहीं कर रही थी।

    पटना में 'आदित्य विजन' के ठिकानों पर इंटेजलीजेंस यूनिट का छापा, 46 करोड़ की जीएसटी चोरी पकड़ी

    हरिकिशन शर्मा, नई दिल्ली। जीएसटी लागू होने के बाद एक साल तक व्यापारियों को इस परोक्ष कर के संबंध में कई तरह की सहूलियत और रियायतें देने के बाद सरकार अब सख्ती करने में जुट गयी है। इसी दिशा में कदम उठाते हुए जीएसटी इंटेलीजेंस की पटना जोनल इकाई ने बृहस्पतिवार को बिहार की जानी मानी रिटेल कंपनी 'आदित्य विजन' के ठिकानों पर छापेमारी कर भारी भरकम 46 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी पकड़ी है। जीएसटी इंटेलीजेंस के अधिकारी देर रात तक कंपनी के ठिकानों पर छापेमारी करते रहे। बताया जाता है कि जैसे-जैसे टैक्स अधिकारियों के हाथ दस्तावेज लग रहे हैं, जीएसटी चोरी का यह आंकड़ा साठ करोड़ रुपये के पार पहुंच सकता है।

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    'आदित्य विजन' के बिहार के सभी जिलों में इलेक्ट्रॉनिक्स और होम एप्लायंस के शोरूम हैं। कंपनी बाम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर भी सूचीबद्ध है।

    सूत्रों ने कहा कि डीजी जीएसटी इंटेलीजेंस पटना जोनल यूनिट के अधिकारियों ने खुफिया जानकारी मिलने के बाद कार्रवाई करते हुए 'आदित्य विजन' समूह में टैक्स चोरी का भंडाफोड़ किया।

    सूत्रों ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से जून की तिमाही में कंपनी पर करोड़ों रुपये के जीएसटी की देनदारी थी। असल में कंपनी ग्राहकों से जीएसटी वसूल रही थी जबकि उसे सरकार के खाते में जमा नहीं कर रही थी। इसकी सूचना मिलने पर जीएसटी इंटेलीजेंस जोनल यूनिट के अधिकारियों ने कंपनी के ठिकानों पर छापेमारी की।

    46 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी पकड़ी

    छापेमारी की कार्रवाई के दौरान शाम आठ बजे तक अधिकारियों को जितने दस्तावेज बरामद हुए उसके आधार पर कंपनी ने 46 करोड़ रुपये की जीएसटी देनदारी स्वीकार की। इसमें से कंपनी ने एक करोड़ रुपये से अधिक राशि नकदी के रूप में जीएसटी अधिकारियों को जीएसटी भुगतान भी कर दिया। शेष राशि कंपनी इनपुट टैक्स क्रेडिट के जरिए तथा अन्य माध्यम से भुगतान करेगी।

    सूत्रों ने कहा कि कंपनी के निदेशक और मुख्य वित्तीय अधिकारी के बयान दर्ज कर लिये गए हैं। जब्त दस्तावेजों के आधार पर विस्तृत छानबीन जारी है।

    सूत्रों ने कहा कि जीएसटी लागू होने से पहले कंपनी वैट में पंजीकृत थी। इसलिए माना जा रहा है कि पहले भी कंपनी कर चोरी के मामलों में लिप्त रही हो। छापेमारी के दौरान कंपनी की दो बैलेंस शीट बरामद की गयी हैं।