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    फैक्ट चेकिंग के सरकार के नए फैसले पर आइएनएस ने जताया विरोध, दिशा-निर्देश वापस लेने की मांग की

    By Jagran NewsEdited By: Shashank Mishra
    Updated: Wed, 12 Apr 2023 07:35 PM (IST)

    सरकार ने केंद्र सरकार से संबंधित मामलों में सूचना तकनीक संशोधन नियमों के तहत मंत्रालय को यह शक्ति दी थी कि वह एक फैक्ट चेकिंग यूनिट की स्थापना कर सकता है। उसे यह अधिकार होगा कि गलत पाए जाने पर किसी की खबर को हटाने के लिए कह सके।

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    सोसाइटी ने संशोधित दिशा-निर्देश वापस लेने की मांग की, कहा-यह शिकायतकर्ता के खुद जज बन जाने का मामला

    नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी (आइएनएस) ने सूचना तकनीक कानून में संशोधन संबंधी दिशा-निर्देशों पर गहरी अप्रसन्नता व्यक्त की है और इसे मीडिया के कामकाज में सरकार और उसकी एजेंसियों का गैरजरूरी हस्तक्षेप बताया है। केंद्र सरकार से संबंधित मामलों में सरकारी फैक्ट चेकिंग यूनिट को ही अंतिम अधिकार दिए जाने संबंधी फैसले पर वापस लिए जाने का आग्रह करते हुए आइएनएस ने मीडिया संस्थानों व अन्य स्टेकहोल्डर्स के साथ व्यापक विचार विमर्श का सुझाव दिया है।

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    इस तरह की शक्ति मिल जाना एक मनमाना कदम: आइएनएस

    पिछले हफ्ते सरकार ने केंद्र सरकार से संबंधित मामलों में सूचना तकनीक (इंटरमीडिएरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) संशोधन नियमों के तहत मंत्रालय को यह शक्ति दी थी कि वह एक फैक्ट चेकिंग यूनिट की स्थापना कर सकता है। उसे यह अधिकार होगा कि गलत पाए जाने पर किसी की खबर को हटाने के लिए कह सके। ऐसा न करने पर कार्रवाई भी हो सकती है।

    आइएनएस के मुताबिक, सूचना तकनीक मंत्रालय को इस तरह की शक्ति मिल जाना एक मनमाना कदम है, क्योंकि यह संबंधित पक्षों को सुने बिना उठाया गया है। यह स्वाभाविक न्याय के सभी सिद्धांतों का उल्लंघन है। यह शिकायतकर्ता के खुद ही जज बन जाने का उदाहरण भी है।

    मंत्रालय ने मीडिया संगठनों से बातचीत करने का किया था वादा

    फैक्ट चेकिंग यूनिट एक सामान्य अधिसूचना के जरिये ही स्थापित की जा सकती है। जो नियम जारी किए गए हैं, उनमें यह नहीं बताया गया है कि ऐसी यूनिट के संचालन का तौर-तरीका क्या होगा और इन शक्तियों के इस्तेमाल की न्यायिक समीक्षा की क्या स्थिति होगी। आइएनएस ने यह भी आरोप लगाया है कि सूचना तकनीक मंत्रालय ने मीडिया संगठनों तथा समूहों से बातचीत का वादा किया था, लेकिन सार्थक बातचीत की कोई पहल नहीं की गई।