नई दिल्‍ली। एक तरफ जहां भारत कोरोना के कहर से दो-चार हो रहा है वहीं अब एक नया डर देश के जंगल में शुरू हो गया है। इस डर की वजह बना है एंथ्रेक्‍स। इसका खतरा कहीं न कहीं कोरोना वायरस से भी अधिक है। ये बेहद संक्रामक और जानलेवा है। आगे बढ़ने से पहले आपको बता दें कि आखिर ये है क्‍या।

दरअसल, एंथ्रेक्स एक तरह का बैक्टीरिया है जो गाय और भेड़-बकरी जैसे मवेशियों के जरिए फैलता है। दक्षिणी अमेरिका यूरोप और एशिया के कई हिस्सों में यह स्वाभाविक रूप से पाया जाता है। हालांकि इससे बचाव का टीका भी उपलब्ध है। संक्रमण के खतरे को देखते हुए अमेरिका अपने सैनिकों को इससे बचाने के लिए इनका टीकाकरण भी करता है। इसका संक्रमण जानवरों में बड़ी तेजी से फैलता है। जानवरों को हुए त्वचा के घावों के रास्ते, संक्रमित पशु का अधपका मांस खाने से और सांस के रास्ते ये फेफड़े में फैलता हैऔर इसके माध्‍यम से खून में फैलता है। ये शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को तेजी से नुकसान पहुंचाना शुरू करता है। इसकी वजह से मौत भी हो सकती है। हालांकि इसका संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक नहीं पहुंचता, इसके बावजूद इसका खतरा बना रहता है।

इसके शुरुआती लक्षण सर्दी-जुकाम जैसे होते हैं लेकिन बाद में जब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता लड़ना शुरू करती है तो आंतरिक रक्तस्त्राव होने लगता है। ये बैक्‍टीरिया काफी समय तक मिट्टी में निष्क्रिय पड़ा रह सकता है और इसे रासायनिक तरीके से सक्रिय करना आसान होता है। यही वजह है कि एंथ्रेक्स का जैविक हथियार के रूप में इस्तेमाल की आशंका जताई जाती रही है। इसके जीवाणुओं को विमान से या मिसाइलों के जरिए आसानी से पहुंचाया जा सकता है और लोगों को आसानी से इसका पता भी नहीं चलता है।

इसकी वजह से बिहार-यूपी के जंगलों में दहशत दिखाई देने लगी है। इस दहशत की वजह बनी है एक गेंडे की मौत। दरअसल, 19 मई को भारत-नेपाल सीमा के निकट स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से सटे इलाके में एक मादा गेंडे की मौत हो गई थी। इस गेंडे में एंथ्रेक्स के लक्षण देखे गए थे। पटना वेटरनरी कॉलेज में हुई जांच के दौरान इस बात की पुष्टि भी हुई थी। इसके बाद विशेषज्ञों ने अपनी जांच को पुख्‍ता करने के लिए बरेली के आईवीआरआई इंस्टीट्यूट को इसके सैंपल भेजे थे। हालांकि वहां से इसकी रिपोर्ट अब तक नहीं मिली है। लेकिन पटना कॉलेज की रिपोर्ट को ध्‍यान में रखते हुए इससे संभावित प्रभावित इलाके को सेनेटाइज करने के साथ ही जानवरों को भी क्‍वारंटाइन किया जा रहा है। यदि आईवीआईआर, बरेली की रिपोर्ट में भी एंथ्रेक्‍स की पुष्टि कर दी जाती है तो ये बेहद चिंताजनक बात होगी। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में भी पांच एक सींग वाले गेंड़ों की मौत इसकी वजह से हो चुकी है। 

आपको यहां पर ये भी बता दें कि दोनों देशों की सीमा के निकटवर्ती इलाकों में करीब तीन अभ्यारण्य हैं। ये हैं नेपाल का चितवन राष्ट्रीय निकुंज, यूपी के सोहगीबरवां और पश्चिम चंपारण का वाल्मीकि टाइगर रिजर्व। इस चिंता की एक बड़ी वजह ये भी है कि इन तीनों अभ्यारण्यों में रहने वाले एक दूसरे के इलाके में स्‍वछंद विचरण करते हैं। जिस मादा गेंडे की 19 मई को मौत हुई, उसकी बिहार और यूपी के जंगल में लगातार आवाजाही थी।

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