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    आगामी वित्त वर्ष में पूरी हो सकती है 11 प्रतिशत विकास की उम्मीद, भारत के विकास को लगेंगे पंख

    By Kamal VermaEdited By:
    Updated: Thu, 04 Mar 2021 07:49 AM (IST)

    कोरोना महामारी से लगातार उबर रहे भारत की अर्थव्‍यवस्‍था अब दोबारा रफ्तार पकड़ने लगी है। उम्‍मीद तो इस बात की भी है कि आने वाले वित्‍त वर्ष में भारत 11 फीसद की विकास दर को पास सकता है।

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    अब दोबारा रफ्तार पकड़ने लगी है भारत की अर्थव्‍यवस्‍था

    प्रो. लल्लन प्रसाद। महामारी जनित आर्थिक गतिविधियों में आए ठहराव में इतनी तेजी से गति आएगी, शायद इसकी उम्मीद नहीं की गई थी। आगामी वित्त वर्ष में 11 प्रतिशत विकास की जो उम्मीद जताई जा रही है, वह पूरी हो सकती है। इस वर्ष की चौथी तिमाही के परिणाम अच्छे होने के आसार हैं। पिछली तिमाही में कृषि की आशातीत पैदावार, ऑटो एवं कुछ और औद्योगिक पदार्थो की मांग में वृद्धि निर्माण क्षेत्र का तेजी से विकास और सेवाओं की बढ़ती मांग, खुदरा और थोक कीमतों के सूचकांक में गिरावट अच्छे संकेत है। सरकार और रिजर्व बैंक द्वारा दिए गए राहत पैकेजों का अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है।

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    निर्माण क्षेत्र जो पहली तिमाही में लगभग पूरी तरह बंद था, दूसरी तिमाही में विकास दर 8.6 प्रतिशत था, तीसरी तिमाही में 50 प्रतिशत बढ़ा। रोजगार देने वाले क्षेत्रों में इसका बड़ा योगदान तो होता ही है, साथ साथ सीमेंट, सरिया समेत अन्य बिल्डिंग मैटीरियल की मांग में वृद्धि का यह बड़ा स्त्रोत है। महीनों बाद ऑटो उद्योग पुन: विकास पथ पर आ गया है। पिछले वर्ष की तुलना में 10 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति अगले एक वर्ष में 20 लाख गाडि़यों के निर्माण के लक्ष्य पर काम कर रही है। डीलर्स को स्पेयर पा‌र्ट्स के अच्छे स्टॉक रखने का निर्देश दे चुकी है जिसका लाभ इस क्षेत्र की बड़ी संख्या में सहयोगी उद्योगों को होगा। बिजली और गैस की आपूर्ति समेत अन्य सार्वजनिक उपयोग की सेवाओं में 7.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। माइनिंग एवं मैन्यूफैक्चरिंग में विकास असंतोषजनक रहा। कई कोर उद्योग भी पिछड़े रहे।

    अक्टूबर में औद्योगिक उत्पादन का सूचकांक 3.6 प्रतिशत था जो पिछले सात महीनों का सबसे अधिक था, तथापि यह संतोषजनक नहीं माना जा सकता। औद्योगिक विकास में तेजी लाने की आवश्यकता है। आत्मनिर्भर भारत योजना में रक्षा उपकरणों के विकास में अवश्य तेजी आई है। खुदरा व्यापार में 85 प्रतिशत की रिकवरी हो चुकी है। उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं की खरीद के सूचकांक तीसरी तिमाही के अंत में क्रमश:58.9 और 54.1 रहे। मालूम हो कि 50 के ऊपर के सूचकांक विकास के द्योतक होते हैं। जीएसटी की उगाही पिछले पांच महीनों से लगातार एक लाख करोड़ रुपये के ऊपर जा रही है जो अर्थव्यवस्था के पटरी पर आने के स्पष्ट संकेत दे रही है।

    कोरोना काल में केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक द्वारा दिए गए राहत पैकेज का सकारात्मक प्रभाव तीसरी तिमाही में दिखने लगा है। बहुत कम समय में दो नए वैक्सीन देश में तैयार किए गए, जो देश में ही नहीं, विदेश में भी लोकप्रिय हो रहे हैं महामारी की वैक्सीन आ जाने से अर्थव्यवस्था को भी लाभ हो रहा है। देश में बड़े पैमाने पर उत्पादन और वितरण हो रहा है और निर्यात भी हो रहा है। रिजर्व बैंक की मुद्रा नीति कारगर रही। कोरोना काल मे रेपो रेट में आवश्यक कमी करके कैश की कमी नहीं होने दी गई। कीमतों के सूचकांक बढ़ने पर रेपो रेट में कमी नहीं की गई। थोक और खुदरा कीमतों के सूचकांक दिसंबर मे कुछ नीचे आए हैं।

    खाद्य पदार्थो की कीमतें घटी हैं, किंतु पेट्रोल, डीजल, जेट ईधन और गैस की कीमतों में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि और देश में एक्साइज एवं वैट के भार से कीमतें लगातार उछाल पर है जो आम आदमी और सरकार के बजट को बुरी तरह प्रभावित कर रही है।वर्तमान वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही के रिपोर्ट कुछ आशाजनक हैं, तो कुछ निराशाजनक भी। शहरों में बेरोजगारी की दर में कुछ कमी आई है, किंतु गांवों में नहीं। विनिर्माण का सूचकांक बढ़ा है, लेकिन कच्चे माल और यातायात पर होने वाले खर्च बढ़ने के आसार हैं। कोरोना संक्रमण के कुछ राज्यों में एक बार फिर से प्रभावी होने से भले ही अर्थव्यवस्था के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही हो, लेकिन यह तय है कि बाजार तेजी से अग्रसर है।

    (पूर्व विभागाध्यक्ष, बिजनेस इकोनॉमिक्स विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय)