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    COP 27: जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए विकसित देशों से मदद मांगेगा भारत; मिस्र में 6 से 18 नवंबर तक बैठक

    By Jagran NewsEdited By: Devshanker Chovdhary
    Updated: Sat, 05 Nov 2022 03:42 AM (IST)

    जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए भारत विकसित देशों से मदद मांगेगा। काप-27 (कान्फ्रेंस आफ पार्टीज- 27) की बैठक से पहले केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत विकासशील देशों के लिए वित्त और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की मांग भी विकसित देशों से करेगा।

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    जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए विकसित देशों से मदद मांगेगा भारत।

    नई दिल्ली, पीटीआइ। जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए भारत विकसित देशों से मदद मांगेगा। काप-27 (कान्फ्रेंस आफ पार्टीज- 27) की बैठक से पहले केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत विकासशील देशों के लिए वित्त और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की मांग भी विकसित देशों से करेगा ताकि इन देशों को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में मदद मिल सके।

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    भारत ने निर्धारित लक्ष्यों को किया पूरा

    भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत वह उन कुछ देशों में से एक है, जिसने पेरिस में निर्धारित 2015 के लक्ष्यों को पूरा किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाइफ मिशन के माध्यम से पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली पर जोर दिया है। उन्होंने कहा, काप-27 में वित्त, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण के मामले में कार्रवाई होनी चाहिए। यह हमारा समग्र दृष्टिकोण है।

    6 से 18 नवंबर तक होगी काप-27 की बैठक

    बता दें कि मिस्त्र में 6 से 18 नवंबर तक होने जा रही काप-27 बैठक में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक और 100 से अधिक राष्ट्राध्यक्षों के भाग लेने की उम्मीद है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी इसमें शामिल होंगे या नहीं।

    क्या है काप-27 बैठक

    आगामी छह से 18 नवंबर के बीच मिस्र के शर्म अल-शेख में 27वां संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP-27) आयोजित होना है। इसका उद्देश्य जलवायु आपदा की ओर ध्यान आकृष्ट करना और जलवायु परिवर्तन को रोकने की दिशा में प्रयासों को बढ़ावा देना है। इस अवसर पर बढ़ते वैश्विक तापमान, बेमौसम बाढ़ एवं सूखा, पानी की कमी, पैदावार में गिरावट, खाद्य असुरक्षा और जैव वैविधता का ह्रास, प्रदूषण और बढ़ती गरीबी तथा विस्थापन से जूझती दुनिया एकजुट होकर मानवता की रक्षा के निमित्त धरती की सुरक्षा के लिए एकजुटता दिखाएगी।

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