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    ब्रिक्स विस्तार पर चर्चा में खुली सोच के साथ शामिल होगा भारत, करीब दो दर्जन देश संगठन की सदस्यता को तैयार

    By Jagran NewsEdited By: Sonu Gupta
    Updated: Mon, 21 Aug 2023 11:23 PM (IST)

    बदलते वैश्विक माहौल में ब्रिक्स (ब्राजील रूस भारत चीन और दक्षिण अफ्रीका का संगठन) का इस हफ्ते होने वाली 15वीं शिखर बैठक बेहद महत्वपूर्ण होने जा रही है। पहली बार पांचों देशों के शीर्ष नेता इस संगठन के विस्तार पर फैसला करेंगे। दक्षिण अफ्रीका में होने वाली इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए पीएम नरेन्द्र मोदी मंगलवार (22 अगस्त) को सुबह रवाना होंगे।

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    पहली बार पांचों देशों के शीर्ष नेता ब्रिक्स संगठन के विस्तार पर फैसला करेंगे। फोटोः रायटर।

    जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। बदलते वैश्विक माहौल में ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका का संगठन) का इस हफ्ते होने वाली 15वीं शिखर बैठक बेहद महत्वपूर्ण होने जा रही है। पहली बार पांचों देशों के शीर्ष नेता इस संगठन के विस्तार पर फैसला करेंगे। दक्षिण अफ्रीका में होने वाली इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए पीएम नरेन्द्र मोदी मंगलवार (22 अगस्त) को सुबह रवाना होंगे।

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    23-24 देशों ने ब्रिक्स का सदस्य बनने की प्रकट की है इच्छा

    बैठक के आयोजन को लेकर जो खबरें आ रही हैं उसके मुताबिक, सऊदी अरब, इरान, अर्जेंटीना, बांग्लादेश जैसे 23-24 देशों ने ब्रिक्स का सदस्य बनने की इच्छा प्रकट की है। भारत भी ब्रिक्स विस्तार को लेकर सकारात्मक दिख रहा है। विदेश सचिव विनय क्वात्रा का कहना है कि

    ब्रिक्स की सदस्या बढ़ाने को लेकर भारत सकारात्मक मानसिकता और खुली सोच रखता है। इस बारे में सभी सदस्यों के बीच आम सहमति बनने पर फैसला होगा।

    ब्रिक्स नेताओं के साथ रात्रि भोज में हिस्सा लेंगे पीएम मोदी

    क्वात्रा ने बताया कि 22 अगस्त, 2023 को पीएम मोदी ब्रिक्स नेताओं के साथ रात्रि भोज में हिस्सा लेंगे। इस दौरान वहां चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग भी होंगे। इन दोनो नेताओं के बीच द्विपक्षीय स्तर पर बातचीत होने की संभावना के बारे में उन्होंने कुछ नहीं बताया। हालांकि, यह स्वीकार किया कि पीएम मोदी की कई वैश्विक नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें होंगी।

    पीएम मोदी और राष्ट्रपति चिनफिंग के बीच हो सकती है मुलाकात

    कूटनीतिक जानकार बता रहे हैं कि इस बार पीएम मोदी और राष्ट्रपति चिनफिंग के बीच आधिकारिक द्विपक्षीय मुलाकात की पूरी संभावना है। दोनों नेताओं के बीच अक्टूबर, 2019 के बाद आधिकारिक मुलाकात नहीं हुई है। गलवन घाटी में चीनी सेना की घुसपैठ (मई, 2020) के बाद मोदी और चिनफिंग के बीच आधिकारिक मुलाकात नहीं है। इनके बीच एक संक्षिप्त मुलाकात दिसंबर, 2022 में बाली (जी-20 बैठक के दौरान) हुई थी, जिसकी जानकारी दोनो पक्षों कई महीनों बाद सार्वजनिक किया था।

    ब्राजील के नए राष्ट्रपति से मिल सकते हैं पीएम मोदी

    इस बार पीएम मोदी की ब्राजील के नए राष्ट्रपति लुला दा सिल्वा से पहली मुलाकात संभव है। बहरहाल, इस बार ब्रिक्स बैठक लेकर जैसी सरगर्मी अंतरराष्ट्रीय मंच पर है वैसी पहले कभी नहीं देखी गई। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति साइरल रामाफोसा ने ब्रिक्स के साथ अफ्रीकी देशों की एक विशेष बैठक 24 अगस्त, 2023 को आयोजित की है, जिसमें पीएम मोदी भी हिस्सा लेंगे। इस बैठक को ब्रिक्स संगठन के अफ्रीका में विस्तार के तौर पर देखा जा रहा है। इस बैठक में तकरीबन 40 छोटे-बड़े देशों के राष्ट्र प्रमुखों के हिस्सा लेने की संभावना है।

    चीन दे रहा है ब्रिक्स विस्तार को खास तवज्जो

    चीन के राष्ट्रपति चिनफिंग की तरफ से ब्रिक्स विस्तार को खास तवज्जो दिया जा रहा है। खास तौर पर चीन विकासशील देशों को इसमें शामिल कराने को लेकर इच्छुक है। यूक्रेन पर हमले के बाद रूस जिस तरह से अलग-थलग पड़ा है वह भी अपने प्रभाव वाले कई देशों को इस संगठन में शामिल कराने का पक्षधर है।

    वैश्विक जानकार बता रहे हैं यूक्रेन विवाद के बाद कई देश रूस-चीन और अमेरिका-यूरोपीय देशों के बीच सामंजस्य स्थापित करने की वजह से भी ब्रिक्स में शामिल होना चाहते हैं। कुछ देश ब्रिक्स में चीन व भारत जैसी विशाल अर्थव्यवस्था के साथ कारोबार से फायदा उठाने की चाहत की वजह से भी इस संगठन के आकर्षण में है।

    भारत के कारोबारियों का भी एक बड़ा दल भी जाएगा दक्षिण अफ्रीका

    पीएम मोदी के साथ भारत के कारोबारियों का एक बड़ा दल भी दक्षिण अफ्रीका जा रहा है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में इस बार आपसी कारोबार को बढ़ाना भी एक बड़ा एजेंडा है। क्वात्रा का कहना है कि, ब्रिक्स के भीतर अभी आपसी कारोबार को बढ़ाने और कारोबार में स्थानीय मुद्राओं को प्राथमिकता देने पर बात हो रही है।

    उन्होंने इस बात से इनकार किया कि ब्रिक्स देश एक स्वीकृत मुद्रा को लेकर बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों के बीच एक मुद्रा का प्रचलन एक अलग मुद्दा है और इस पर काफी तैयारी करनी पड़ती है। अभी फोकस आपसी कारोबार में एक दूसरे की मुद्राओं को प्राथमिकता देने की बात है।