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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 05, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

GST के बाद अब एक और राहत देने का प्लान बना रही सरकार, ट्रंप टैरिफ की टेंशन से कारोबारी हो जाएंगे फ्री

Published: Fri, 05 Sep 2025 01:26 PM (IST)Updated: Fri, 05 Sep 2025 01:32 PM (IST)

केंद्र सरकार जीएसटी में सुधार के बाद अब अमेरिकी टैरिफ से परेशान निर्यातकों को राहत देने की तैयारी में है। ...और पढ़ें

50 फीसदी टैरिफ से प्रभावित कारोबारियों को सपोर्ट देने के लिए सरकार जल्द ही कई योजनाएं लाई जाएंगी।
50 फीसदी टैरिफ से प्रभावित कारोबारियों को सपोर्ट देने के लिए सरकार जल्द ही कई योजनाएं लाई जाएंगी।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) में सुधार करने के बाद अब अमेरिका के नए टैरिफ से परेशान निर्यातकों (Exporters) के लिए राहत का ऐलान करने की तैयारी कर ली है।

एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 50 फीसदी टैरिफ से प्रभावित कारोबारियों, खासकर टेक्सटाइल, रत्न और आभूषण जैसे सेक्टरों को सपोर्ट देने के लिए जल्द ही कई योजनाएं लाई जाएंगी। यह पैकेज छोटे निर्यातकों की मुश्किलें कम करने, नौकरियों को बचाने और नए बाजार तलाशने में मदद करेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार इस राहत पैकेज को कोविड-19 के दौरान एमएसएमई (लघु, छोटे और मझोले उद्यमों) को दी गई मदद की तर्ज पर तैयार कर रही है।

इसके साथ ही, बजट में घोषित एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन को भी तेजी से लागू करने की कोशिश हो रही है, ताकि भारत का वैश्विक व्यापार और मजबूत हो।

किन सेक्टरों को मिलेगी राहत?

अमेरिका ने हाल ही में भारत के सामान पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया है, जिसमें से 25 फीसदी टैरिफ रूस से तेल खरीदने की पेनल्टी के तौर पर है। इस टैरिफ का असर टेक्सटाइल, रत्न और आभूषण, चमड़ा, जूते, रसायन, इंजीनियरिंग सामान, कृषि और समुद्री उत्पादों जैसे सेक्टरों पर पड़ा है।

इन उद्योगों में निर्यातक अपनी प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए जूझ रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि सरकार का फोकस छोटे निर्यातकों की नकदी की कमी को दूर करने, पूंजी की दिक्कतों को कम करने और नौकरियों को बचाने पर होगा।

इसके अलावा, नए बाजारों की तलाश और उत्पादन को बिना रुकावट चलाने के लिए भी योजनाएं बन रही हैं। यह पैकेज न सिर्फ मौजूदा मुश्किलों को हल करेगा, बल्कि भविष्य में वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति को और मजबूत करने की कोशिश करेगा।

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