India Monsoon 2025: दिल्ली, UP-बिहार सहित उत्तर भारत में कब पहुंचेगा मानसून? IMD की ताजा अपडेट पढ़कर लेंगे राहत की सांस
बंगाल की खाड़ी में अनुकूल परिस्थितियों के चलते मानसून तेजी से उत्तर भारत की ओर बढ़ रहा है। जून के पहले हफ्ते में मानसूनी बारिश में कमी आने के बावजूद अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक वर्षा का अनुमान है जिससे गर्मी से राहत मिलेगी। आईएमडी के अनुसार उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य पूर्वोत्तर में सामान्य से कम और मध्य भारत में सामान्य से अधिक बारिश की संभावना है।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में अनुकूल स्थितियों से मजबूती लेकर मानसून बहुत तेजी से उत्तर भारत की ओर बढ़ रहा है। संभव है इसी महीने के अंत तक बिहार के आधे हिस्से तक पहुंच सकता है, किंतु तीन-चार दिनों के बाद गति में कमी आएगी। जून के पहले हफ्ते से बेहिसाब मानसूनी बारिश में थोड़ी कमी आएगी।
फिर भी देश के अधिकांश हिस्सों में जून में सामान्य से अधिक वर्षा होने का अनुमान है। इससे गर्मी से राहत मिलती रहेगी। भारतीय अर्थव्यवस्था एवं खेती के लिए इस वर्षा को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि देश की करीब 42 प्रतिशत आबादी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है।
आईएमडी ने मानसून का दूसरा पूर्वानुमान किया जारी
भारत मौसम विभाग (आइएमडी) ने मंगलवार को मानसून का दूसरा पूर्वानुमान जारी किया, जिसमें कहा गया कि उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य, पूर्वोत्तर हिस्से में सामान्य से कम और मध्य भारत के साथ दक्षिणी प्रायद्वीप में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम. रविचंद्रन ने बताया कि जून से सितंबर के बीच 106 प्रतिशत वर्षा होने का अनुमान है, जो पिछले पांच दशक की औसत वर्षा से 87 सेंटीमीटर ज्यादा है। इस बार जून महीने में औसत से 108 प्रतिशत वर्षा हो सकती है।
भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम हो सकती है बारिश
हालांकि, उत्तर-पश्चिम एवं पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। लद्दाख, हिमाचल के सीमावर्ती क्षेत्र, बिहार, झारखंड, बंगाल के साथ पंजाब एवं हरियाणा के कुछ क्षेत्रों को अल्प वर्षा का सामना करना पड़ सकता है।
आइएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि मानसून के कोर जोन में सामान्य से अधिक बारिश होगी। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा एवं आसपास के कुछ क्षेत्रों को मानसून कोर जोन में रखा जाता है। यह क्षेत्र खेती के लिए विशेष रूप से मानसून पर निर्भर रहता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केरल में मानसून की तय तिथि से पहले या देर से आने का सीजन की कुल वर्षा पर सीधा असर नहीं पड़ता है, क्योंकि इसमें वैश्विक और स्थानीय कई कारकों की भूमिका रहती है। अच्छी मानसूनी वर्षा के चलते देश के अधिकतर हिस्सों का अधिकतम तापमान सामान्य से कम या आसपास रह सकता है।
पूर्वोत्तर भारत में सामान्य से थोड़ा ज्यादा तापमान रहने की आशंका
हालांकि राजस्थान-गुजरात और पूर्वोत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से थोड़ा ज्यादा तापमान रह सकता है। जून में अधिकतर हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य या उससे थोड़ा कम रह सकता है। अब हीटवेव का खतरा कम है। गर्मी भी सामान्य रहने का अनुमान है।
इस बार मई महीने में ज्यादा गर्मी नहीं पड़ने के सवाल को स्पष्ट करते हुए मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के चलते तापमान नियंत्रण में रहा। मई महीने में ही सात पश्चिमी विक्षोभ आए, जिससे तापमान में तीन से चार डिग्री तक गिरावट आती रही। पश्चिमी विक्षोभ का रेंज भी व्यापक था। उन्होंने यह भी कहा कि इसका पूर्वानुमान भी हफ्ते भर पहले नहीं किया जा सकता है।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।