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    '1971 के बाद भारत ने किसी मध्यस्थता को स्वीकार नहीं किया', पूर्व सेना प्रमुख जनरल ने ट्रंप के दावों को किया खारिज

    By Jagran News NetworkEdited By: Jeet Kumar
    Updated: Sun, 22 Jun 2025 03:33 AM (IST)

    1999 के कारगिल युद्ध में भारत की जीत का नेतृत्व करने वाले पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीपी मलिक ने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम कराने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि 1971 के बाद से भारत ने किसी मध्यस्थता को स्वीकार नहीं किया है।

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    1971 के बाद भारत ने किसी मध्यस्थता को स्वीकार नहीं किया- पूर्व सेना प्रमुख जनरल (फोटो- एक्स)

    आइएएनएस, नई दिल्ली। 1999 के कारगिल युद्ध में भारत की जीत का नेतृत्व करने वाले पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीपी मलिक ने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम कराने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों को खारिज कर दिया।

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    भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध अमेरिका के राष्ट्रीय हित में नहीं

    उन्होंने कहा कि 1971 के बाद से भारत ने किसी मध्यस्थता को स्वीकार नहीं किया है। एक विशेष भेंट में जनरल मलिक ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध अमेरिका के राष्ट्रीय हित में नहीं है।

    अमेरिका इसे रोकने के लिए पुरजोर कोशिश करता है। कारगिल युद्ध और मुंबई हमले (26/11) के दौरान अमेरिका ने युद्ध रोकने के लिए दोनों देशों के साथ करीबी कूटनीतिक संवाद बनाए रखा।

    कारगिल युद्ध के दौरान जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री वाशिंगटन गए थे

    कारगिल युद्ध के दौरान जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री वाशिंगटन गए थे, तब तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने उन पर नियंत्रण रेखा के भारतीय हिस्से से पाकिस्तानी सैनिकों को वापस बुलाने का दबाव बनाया था।

    पाकिस्तान ऐसा करने के लिए सहमत हो गया था, जैसा कि उसने अभी 10 मई को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किया है। हालांकि, भारत ने दोनों मौकों पर अपने राजनीतिक उद्देश्य को आगे बढ़ाया। जब राजनीतिक उद्देश्य पूरा हो गया, तो भारत ने संघर्ष विराम के लिए पाकिस्तान के अनुरोध को स्वीकार कर लिया।

    1971 के बाद से भारत ने कभी भी किसी बाहरी मध्यस्थता को स्वीकार नहीं किया

    पूर्व सेनाध्यक्ष ने कहा कि किसी भी संघर्ष के दौरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से अमेरिका जैसी बड़ी शक्तियों द्वारा स्थिति को प्रभावित करने का हमेशा प्रयास किया जाता है। हालांकि, 1971 के बाद से भारत ने कभी भी किसी बाहरी मध्यस्थता को स्वीकार नहीं किया है।