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'देशभक्ति के नाम पर ग्राहक नहीं होंगे आकर्षित', दीवाली में 'मेड इन चाइना' प्रोडक्ट्स के विरोध पर ग्लोबल टाइम्स की टिप्पणी

Published: Tue, 03 Nov 2026 04:36 PM (IST)

ग्लोबल टाइम्स ने दीपावली में भारतीय बाजार में चीनी उत्पादों की भरमार पर टिप्पणी की है, जिसमें कहा गया है ...और पढ़ें

ग्लोबल टाइम्स: ग्राहक कीमत, विविधता, आपूर्ति से आकर्षित होते हैं

ग्लोबल टाइम्स: ग्राहक कीमत, विविधता, आपूर्ति से आकर्षित होते हैं

HighLights

  1. ग्लोबल टाइम्स: ग्राहक कीमत, विविधता, आपूर्ति से आकर्षित होते हैं

  2. भारत-चीन व्यापार घाटा रिकॉर्ड $112 अरब तक पहुंचा

  3. पीयूष गोयल: 'मेड इन इंडिया' को प्राथमिकता, जबरदस्ती नहीं

जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। भारतीय बाजार में दीपावली पर चीन निर्मित सजावटी वस्तुओं की भरमार दिख रही है। साथ ही चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटा का मुद्दा भी लगातार सुर्खियों में हैं।

ऐसे में चीनी सरकार के मुखपत्र समझे जाने वाले ग्लोबल टाइम्स ने ऐसे उत्पादों को बनाने वाली भारतीय कंपनियों का सलाह दी है कि, सिर्फ देशभक्ति के नाम पर ग्राहक आकर्षित नहीं होते बल्कि कीमत, विविधता व समय पर पर्याप्त आपूर्ति देने से आर्डर मिलते हैं।

ग्राहक कीमत, विविधता और आपूर्ति से आकर्षित होते हैं: ग्लोबल टाइम्स

दीवाली के दौरान चीनी उत्पादों पर भारतीय मीडिया में तो बहुत छपता रहा है लेकिन यह पहला मौका है जब ग्लोबल टाइम्स ने चीनी उत्पादों से जुड़े मुद्दे पर अपनी राय रखी है और साथ ही भारत की नीतियों पर भी टिप्पणी की है।

ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक दीपावली से संबंधित चीन को लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं। चीन के यिवू (झेजियांग प्रांत) के निर्माताओं को भारत से सजावटी लाइटिंग और एलईडी स्ट्रिंग्स के बड़े आर्डर मिल रहे हैं और वे भारतीय मांग के अनुरूप और विविध उत्पाद तैयार कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि भारत और चीन के व्यापार घाटा काफी बढ़ गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत-चीन द्विपक्षीय व्यापार लगभग 151 अरब डॉलर रहा, जबकि भारत का व्यापार घाटा रिकार्ड लगभग 112 अरब डालर तक पहुंच गया था, यह पिछले वर्ष करीब 99 अरब डालर था।

भारत-चीन व्यापार घाटा रिकॉर्ड $112 अरब तक पहुंचा

भारत का चीन को निर्यात करीब 19.47 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 131 अरब डॉलर से अधिक रहा। चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले हफ्ते चीनी आयातों पर कहा कि “चीनी पटाखों से बचने का फैसला दिल से आना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें मेड इन इंडिया उत्पादों को प्राथमिकता देनी चाहिए, लेकिन लोगों पर जबरदस्ती नहीं की जा सकती।

जो टैक्स चुकाकर सामान लाता है, उसे अनुमति देनी ही होगी। भारत लोकतंत्र है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों का पालन करता है।' गोयल ने जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि बदलाव राष्ट्रीय भावना और उपभोक्ताओं की अपनी पसंद से आना चाहिए।

दीवाली के समय भारत कितना चीन से सजावटी समान आयात करता है, इसका कोई आधिकारिक डाटा ना तो सरकार जारी करती है और ना ही कोई एजेंसी। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआइटी) जैसी संस्थाओं ने कुछ रिपोर्टों में स्वदेशी सामान की बढ़ती प्राथमिकता और चीनी उत्पादों की मांग में कमी का दावा किया है, लेकिन बाजार की जमीनी तस्वीर अलग है।

'मेड इन इंडिया' को प्राथमिकता, जबरदस्ती नहीं

सजावटी लाइट्स, एलईडी स्ट्रिंग्स और अन्य सजावट के सामान में चीनी उत्पाद कीमत और उपलब्धता के कारण लोकप्रिय बने हुए हैं।

ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट ही बताती है कि चीनी 10 मीटर एलईडी स्ट्रिंग लाइट्स करीब 100 रुपये या उससे कम में मिलती हैं, जबकि समान भारतीय उत्पाद लगभग दोगुनी कीमत के होते हैं। कीमतों में इस साल 20-25 प्रतिशत वृद्धि के बावजूद चीनी लाइट्स सस्ती हैं, क्योंकि इनमें कापर कंटेंट कम होता है।

ग्लोबल टाइम्स के आलेख में आगे कहा गया है कि त्योहारी सामान द्विपक्षीय व्यापार का छोटा हिस्सा है, लेकिन यह भारतीय विनिर्माण के लिए एक सच्चा परीक्षण है।

आयात अर्थव्यवस्था के दुश्मन नहीं हैं, ये वितरकों की लागत कम करते हैं, उपभोक्ताओं को ज्यादा विकल्प देते हैं और घरेलू उत्पादकों पर प्रतिस्पर्धा का दबाव बनाते हैं, जिससे उन्नयन संभव होता है।

भारतीय कंपनियां सिर्फ देशभक्ति के नाम पर ग्राहकों को आकर्षित नहीं कर सकतीं। उन्हें विविधता समय पर डिलीवरी और ऐसी कीमतों पर जीतना होगा, जिनमें कोई 'देशभक्ति प्रीमियम' न हो।

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