नई दिल्ली, एएनआइ। भारत और चीन में सीमा पर जारी तनाव के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने रविवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ बातचीत की। बताया जा रहा है कि डोभाल के साथ बातचीत का ही नतीजा है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC)के पास गलवन घाटी में आज चीनी सेना पीछे हटी है। सूत्रों का कहना है कि बातचीत सौहार्दपूर्ण और दूरदर्शी तरीके से हुई। एनएसए डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी की बातचीत पूरी तरह से और स्थायी तौर पर शांति वापस लाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए एक साथ काम करने पर केंद्रित रही।   

गौरतलब है कि लद्दाख संकट पर डोभाल पहले से ही सक्रिय हैं और चीन की हर हरकत पर उनकी नजर भी है। बताया जाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जो लद्दाख जाने का अचानक प्लान बना वह डोभाल की रणनीति का हिस्सा था। डोभाल के प्लान की वजह से ही किसी को भी इसकी भनक नहीं लगी थी। दूसरी तरफ चीनी घुसपैठ की कोशिश के बाद जिस तरह भारत ने आक्रमक तरीके से उसका जवाब दिया उसे भी डोभाल की रणनीति बताया जाता है। समाचार एजेंसी एएनआइ के अनुसार, भारतीय सेना के सूत्रों ने कहा कि पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में पीछे हटने को लेकर दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति बनी है। इसमें पैट्रोलिंग प्वाइंट 14 (गलवन घाटी), पीपी -15, हॉट स्प्रिंग्स और फिंगर एरिया शामिल है।

हाल के घटनाक्रमों पर गंभीरता से बातचीत- विदेश मंत्रालय

विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा कि एनएसए अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच कल टेलीफोन पर भारत-चीन सीमा क्षेत्रों के पश्चिमी क्षेत्र में हाल के घटनाक्रमों पर गंभीरता से बातचीत हुई। इस संबंध में, वे आगे इस बात पर सहमत हुए कि दोनों पक्षों को एलएसी पर पीछे हटने की प्रक्रिया को शीघ्रता से पूरा करना चाहिए। दोनों पक्षों को सीमा पर चरणबद्ध तरीके से पीछे हटना सुनिश्चित करना चाहिए। इस बात पर भी सहमति व्यक्त की गई कि एनएसए अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी द्विपक्षीय समझौते और प्रोटोकॉल के अनुसार भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति की स्थायी बहाली सुनिश्चित करने के लिए अपनी बातचीत जारी रखेंगे।

दोनों पक्षों को एलएसी का सख्ती से सम्मान करना चाहिए 

विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों ने इस बात की पुष्टि की कि दोनों पक्षों को एलएसी का सख्ती से सम्मान करना चाहिए और यथास्थिति को बदलने के लिए एकतरफा कोशिश नहीं करनी चाहिए। भविष्य में किसी भी घटना से बचने के लिए एक साथ काम करना चाहिए, जो सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति के लिए आवश्यक है।

चीनी विदेश मंत्रालय का बयान

समाचार एजेंसी एएनआइ ने चीनी सरकार के मुखपत्र ग्‍लोबल टाइम्‍स के हवाले से जानकारी दी कि चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता झाओ लिजियान ने कहा कि भारत और चीन के बीच 30 जून को हुई तीसरी कमांडर स्‍तर पर वार्ता के बाद दोनों देश सीमावर्ती इलाकों में सैनिकों को पीछे करने और उनकी संख्‍या कम करने के लिए प्रभावी कदम उठा रहे हैं। 

Posted By: Tanisk

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