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Opposition March: विपक्षी सांसदों के निलंबन के खिलाफ आक्रामक हुआ I.N.D.I.A, संसद से विजय चौक तक निकाला विरोध मार्च

विपक्ष के 146 सांसदों के निलंबन के खिलाफ मोदी सरकार की घेराबंदी करते हुए विपक्षी गठबंधन आइएनडीआइए में शामिल दलों के दोनों सदनों के सदस्यों ने सदन में आवाज उठाने के बाद गुरुवार को संसद भवन से विजय चौक तक विरोध मार्च निकाला। नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अगुआई में विपक्षी सांसदों ने सरकार पर संसद में विपक्ष की आवाज कुचलने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया और नारेबाजी की।

By Jagran News Edited By: Devshanker Chovdhary Thu, 21 Dec 2023 11:30 PM (IST)
Opposition March: विपक्षी सांसदों के निलंबन के खिलाफ आक्रामक हुआ I.N.D.I.A, संसद से विजय चौक तक निकाला विरोध मार्च
विपक्षी सांसदों ने निकाला विरोध मार्च। (फोटो- एपी)

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। विपक्ष के 146 सांसदों के निलंबन के खिलाफ मोदी सरकार की घेराबंदी करते हुए विपक्षी गठबंधन आईएनडीआईए में शामिल दलों के दोनों सदनों के सदस्यों ने सदन में आवाज उठाने के बाद गुरुवार को संसद भवन से विजय चौक तक विरोध मार्च निकाला।

मल्लिकार्जुन खरगे की अगुआई में विरोध मार्च

इस दौरान राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अगुआई में विपक्षी सांसदों ने सरकार पर संसद में विपक्ष की आवाज कुचलने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। वे अपने हाथों में विपक्षी सांसद निलंबित, लोकतंत्र निष्कासित, संसद बंदी और लोकतंत्र बचाओ जैसे संदेश लिखे पोस्टर व बैनर हाथों में थामे हुए थे।

खरगे ने कहा कि लोकतंत्र में बोलना और सवाल उठाना विपक्ष का अधिकार ही नहीं, जिम्मेदारी भी है। सत्ता के दम पर सरकार चाहे जितना भी कुचलने की कोशिश करे, विपक्षी दल लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई हर कीमत पर लड़ेंगे। लोकतंत्र पर प्रहार का विरोध करेंगे।

खरगे ने पीएम और गृह मंत्री पर साधा निशाना

उन्होंने संसद की सुरक्षा में हुई सेंधमारी को लेकर पीएम नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह द्वारा सत्र के दौरान बाहर बयान देने को संसदीय विशेषाधिकार का उल्लंघन करार दिया और कहा कि दोनों बाहर बोलते रहे मगर सदन में नहीं आए। यह संसद का भी अपमान है।

संसद के दोनों सदनों में विपक्षी सांसदों के निलंबन के खिलाफ विरोध जाहिर करने के बाद मल्लिकार्जुन खरगे, अधीर रंजन चौधरी, शरद पवार, टीआर बालू समेत तमाम विपक्षी दिग्गज नेताओं की अगुआई में संसद परिसर से विजय चौक तक आईएनडीआईए के सांसदों ने विरोध मार्च निकालते हुए प्रदर्शन किया।

विजय चौक पर विपक्षी नेताओं के साथ पत्रकारों से चर्चा करते हुए खरगे ने कहा कि हम संसद में सुरक्षा उल्लंघन का मुद्दा उठाना चाहते थे कि ऐसा क्यों हुआ और कौन जिम्मेदार है? संसद सबसे बड़ी पंचायत है, अगर कोई संसद में नहीं बोलेगा तो कहां बोलेगा? सरकार का संसद में किया जा रहा व्यवहार लोकतंत्र की परंपराओं के खिलाफ है।

शुक्रवार को जंतर मंतर पर प्रदर्शन

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि आईएनडीआईए के नेता सांसदों के निलंबन के खिलाफ शुक्रवार को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे और सरकार के अनैतिक और अवैध व्यवहार के खिलाफ देश के सभी जिला मुख्यालयों में भी राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ की नकल करने के मुद्दे को लेकर पैदा हुए विवाद पर खरगे ने कहा कि यह दुखद है कि सभापति ने एक मुद्दा उठाकर संसद में एक तरह से जातिवाद ला दिया है।

कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के अध्यक्षीय संबोधन में भी खरगे ने सभापति और स्पीकर पर निशाना साधते हुए कहा कि सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जिन पर विपक्षी सांसदों को संरक्षण देने का जिम्मा है, वैसे संवैधानिक पदों पर बैठे लोग खुद ही दलगत राजनीति का हिस्सा बन जाति, क्षेत्र और व्यवसाय को ढाल बना राजनीति कर रहे हैं। वह संविधान के तहत मिले दायित्वों को पूरा करने में विफल रहे हैं। पूरा देश इसे देख रहा है।

खरगे ने कहा कि मोदी सरकार विपक्ष की गैरमौजूदगी में तमाम अहम विधेयकों को पारित कराकर संसद की मर्यादा के खिलाफ काम कर रही है। चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं को अपने कब्जे में करने की कोशिश के साथ सरकार ने संविधान, संसद और लोकतंत्र को भी खतरे में डाल दिया है।

विरोध मार्च को लेकर एक्स पर पोस्ट में भी खरगे ने कहा कि हम भारत के लोगों को लोकतंत्र को बचाने की जरूरत है। विपक्षी सांसदों को निलंबित करके महत्वपूर्ण कानून पारित करना लोकतंत्र नहीं है। यह सबसे खराब प्रकार का अधिनायकवाद है। अगर हमने अभी इस तानाशाही के खिलाफ आवाज नहीं उठाई तो हमारी आने वाली पीढि़यां हमें माफ नहीं करेंगी।

कांग्रेस के तीन और सांसद लोकसभा से निलंबित

तीन और कांग्रेस सांसदों को उनके अमर्यादित व्यवहार के लिए गुरुवार को शीतकालीन सत्र के लिए लोकसभा से निलंबित कर दिया गया। इनमें डीके सुरेश, दीपक बैज और नकुल नाथ शामिल हैं। संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इनके निलंबन का प्रस्ताव रखा।

उन्होंने कहा कि इन सांसदों ने तख्तियां दिखाकर सदन और सभापति के अधिकारों की घोर अवहेलना की है और सदन के वेल में प्रवेश किया है। इसके साथ ही लोकसभा से निलंबित सांसदों का कुल आंकड़ा 100 पर पहुंच गया है। वैसे संसद के दोनों सदनों से निलंबित सदस्यों की कुल संख्या बग 146 हो गई है।