Positive India: नेविगेशन का नया अस्त्र बनेगा आईआईटी मुंबई का ध्रुव, कई हैं इसके यूज
स्मार्ट डिवाइस और आईओटी के युग में नेविगेशन एक आवश्यक फीचर है जिसका इस्तेमाल हम विभिन्न पर्सनल और कमर्शियल अप्लीकेशंस में करते हैं। यह ट्रैवल में भी मददगार होता है।
नई दिल्ली, अनुराग मिश्र। स्मार्ट डिवाइस और आईओटी के युग में नेविगेशन एक आवश्यक फीचर है, जिसका इस्तेमाल हम विभिन्न पर्सनल और कमर्शियल अप्लीकेशंस में करते हैं। यह हमारे एक जगह से दूसरी जगह ट्रेवल करने के दौरान भी काफी मददगार होता है। ओला/उबेर भी नेविगेशन का प्रयोग कर एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं। इसी नेविगेशन की वजह से स्विगी या अन्य कंपनियां खाना डिलीवर करते हैं। यह टेक्नोलॉजी एरियल और मैरिन नेविगेशन में होती है।
नेविगेशन टेक्नोलॉजी से राष्ट्र अपनी टेरीटरी, अपनी सीमाओं को सुरक्षित रखने और आपदा रिस्पांस को मैनेज करने का काम करता है। इन्हीं जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आईआईटी मुंबई के शोधकर्ताओं ने एक नेविगेशन रिसीवर आरएफ फ्रंट इंड इंट्रीग्रेटेड सर्किट (आईसी चिप) ध्रुव का निर्माण किया है, जिसका इस्तेमाल नेविगेशन में हो सकता है। सीधे तौर पर कहें तो आने वाले समय में यह जीपीएस के साथ नेविगेशन का एक विकल्प हो सकता है। इस चिप को आईआईटी मुंबई के प्रोफेसर राजेश झेले के मार्गदर्शन में छात्रों विजय कंचेतला (लीडर), संतोष, अंजिक्य शुभम जैन, श्वेता, जेफिन जॉय, सैयद हमीद, मुकुल पंचोली, सुमित, अमितेश त्रिपाठी, पवन खन्ना और साक्षी ने तैयार किया है। इस प्रोजेक्ट को इलेक्ट्रॉनिक्स और इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय ने वित्तपोषित किया है। इसकी नोडल एजेंसी समीर है।
प्रोफेसर झेले ने बताया कि सेटेलाइट के सिग्नल को डीकोड करने के लिए चिप की आवश्यकता होती है। हमारे सेलफोन में अभी जीपीएस चिप है। भारत के नेविक को डीकोड करने के लिए भारतीय चिप नहीं है। हमने पहला ऐसा चिप बनाया है कि हम किसी भी सेटेलाइट के नेविगेशन सिग्नल को डीकोड कर सकते हैं। हमारा फोन तीन से चार सेटेलाइट फोन के सिग्नल डीकोड कर बता देता है कि हमारी लोकेशन कहां है।
दुनिया भर में इस तरह होता है नेविगेशन
आईआईटी मुंबई के प्रोफेसर राजेश झेले ने बताया कि विभिन्न देशों के अपने-अपने नेविगेशन सेटेलाइट सिस्टम है, जिसमें अमेरिका का ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस), रशियन फेडरेशन ग्लोबल नेविगेशन सेटेलाइट सिस्टम (ग्लोनास), यूरोप का गैलेलियो, चीन का बाइडू और जापान का क्वासी जेनिथ सेटेलाइट सिस्टम (क्यूजेडएसएस) है। ऐसे में ध्रुव भारत में नेविगेशन का कारगर विकल्प हो सकता है।
कारगिल युद्ध में आई थी परेशानी
भारत ने अपना नेविगेशन सिस्टम, भारतीय क्षेत्रीय नेविगेशन सेटेलाइट सिस्टम (आईआरएनएसएस) या नेविगेशन विद इंडियन कंटेशलेशन (नेविक) बनाया है, जो कि विदेशी टेक्नोलॉजी पर आधारित है। कारगिल युद्ध (1999) के दौरान भारतीय सैनिक विदेशी जीपीएस सेटेलाइट का इस्तेमाल कर जरूरी पॉजिशन नहीं देख पा रहे थे। आईआरएनएसएस या नेविक सेटेलाइट को इसरो ने काफी साल पहले ऑर्बिट में भेजा था।
ध्रुव क्यों होगा फायदेमंद
-इससे भारत के पास जीपीएस की तरह अपना सशक्त नेविगेशन माध्यम होगा
-सभी सेटेलाइट के सिग्नल का डिकोड बेहतर तरीके से संभव हो सकेगा
-यह व्यवधान डालने वाले सिग्नल को क्लीन करने का काम करेगा
-ध्रुव के डिजिटल डाटा को किसी भी मानक डिजिटल सिग्नल प्रोसेसर द्वारा आगे संशोधित किया जा सकता है, ताकि किसी लोकेशन को सही ढंग से निर्धारित किया जा सकें
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।