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    चीन के मुकाबले अच्‍छी नहीं है भारतीय वायुसेना की हालत, भविष्‍य को लेकर भी चिंता

    By Kamal VermaEdited By:
    Updated: Thu, 24 Jan 2019 01:15 PM (IST)

    भारतीय वायुसेना मौजूदा वक्‍त में सबसे खराब स्थिति से गुजर रही है। इस बात को लेकर वायुसेना प्रमुख भी चिंता जता चुके हैं।

    चीन के मुकाबले अच्‍छी नहीं है भारतीय वायुसेना की हालत, भविष्‍य को लेकर भी चिंता

    नई दिल्ली [जागरण स्‍पेशल]। चीन लगातार अपनी सेना के आधुनिकिकरण पर ध्‍यान दे रहा है। बात चाहे नौसेना की हो या फिर वायुसेना की, सभी को वह समान रूप से विकसित कर रहा है। जहां तक वर्तमान की बात है तो चीन ने अपनी थल सेना में बड़ी कटौती कर वायुसेना और नौसेना में इजाफा करने का बड़ा फैसला लिया है। भारत के मद्देनजर चीन का यह फैसला काफी खतरनाक है। चीन से यदि भारत की तुलना की जाए तो यह काफी हद तक साफ हो जाता है कि हम उनसे काफी पिछड़े हुए हैं। भारतीय वायुसेना की ही यदि बात करें तो आपको बता दें कि हमारे पास वर्तमान में कुल 30 स्‍‍‍‍‍‍‍‍क्‍वाड्रन हैं, जो 202 तक 26 हो जाएंगी। इसकी वजह पुराने मिग विमानों की छह स्‍क्‍वाड्रन का रिटायरमेंट होना है। वर्तमान में वायुसेना की 42 स्‍क्‍वाड्रन की तुरंत दरकार है। यहां पर आपको पिछले वर्ष वायुसेना प्रमुख द्वारा दिया गया बयान भी बता देते हैं जिसमें उन्‍होंने कहा था कि 42 स्‍क्‍वाड्रन होने के बाद भी दोनों तरफ की जंग लड़ना भारत के लिए आसान नहीं होगा। वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ की मानें तो वर्तमान में देश की वायुसेना कई तरह की मुश्किलों का सामना कर रही है।  चिंता की एक बात ये भी है कि यदि यही हाल रहा तो वर्ष 2037 में भारत के पास महज 21 स्‍क्‍वाड्रन और 2042 में इनकी संख्‍या 19 हो जाएगी।

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    चौथे नंबर पर हम 
    आपको यहां पर ये भी बता दें कि भारतीय वायुसेना दुनिया में चौथे नंबर पर आती है। करीब 11 स्‍क्‍वाड्रन की कमी से जूझ रही भारतीय वायुसेना को राफेल विमान की सख्‍त दरकार है। इसकी जरूरत को लेकर खुद वायुसेना प्रमुख धनोआ भी अपना मत स्‍पष्‍ट कर चुके हैं। जहां तक स्‍क्‍वाड्रन की बात है आपको बता दें कि हर स्‍क्‍वाड्रन में करीब 16 से 18 लड़ाकू विमान होते हैं। यदि पाकिस्‍तान की बात करें तो उसके पास 25 स्‍क्‍वाड्रन हैं। इसके अलावा उसके पास में आठ प्रमुख एयरबेस हैं। वहीं यदि भारत की चीन से तुलना की जाए तो उसके पास कुल 42 स्‍क्‍वाड्रन मौजूद हैं। इसके अलावा चीन के पास 14 एयरबेस ऐसे जिसको वह भारत के खिलाफ इस्‍तेमाल कर सकता है। 

    चिंता जता चुके हैं वायुसेना प्रमुख 
    वायुसेना प्रमुख ने वायुसेना की स्थिति पर जो चिंता जताई है वह यूं ही नहीं है। दरअसल, भारत के पड़ोस में चीन और पाकिस्‍तान दोनों ही परमाणु ताकत वाले हैं। दोनों के पास ही भारत से कहीं ज्‍यादा परमाणु हथियारों का जखीरा मौजूद है। वहीं दोनों वर्षों से बड़े और मजबूत रणनीतिक साझेदार हैं। भारत के लिए सभी बातें कहीं न खतरे की तरफ इशारा करती हैं। वह भी तब जबकि पिछले वर्ष ही चीन ने अपने अत्‍याधुनिक स्‍वदेशी फाइटर जेट की स्‍क्‍वाड्रन को अरुणाचल प्रदेश के निकट तैनात किया है। इतना ही नहीं वह अरुणाचल प्रदेश के निकट अपना दूसरा सबसे बड़ा एयरपोर्ट भी यात्रियों के लिए खोल चुका है। वक्‍त पड़ने पर इसका इस्‍तेमाल सेना भी कर सकती है।  

    वर्तमान हालात
    भारत की बात करें तो फिलहाल भारत के पास सुखोई 30 एक ऐसा अत्‍याधुनिक फाइटर जेट है जिसको 2002 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था। इसके बाद से भारतीय वायुसेना में कोई और विमान शामिल नहीं हुआ है। रूस और भारत द्वारा निर्मित यह विमान चीन के पास भी है। भारत के पास फिलहाल इस लड़ाकू विमान की करीब 6-8 स्‍क्‍वाड्रन सेवा में हैं। भारत को कुल 250 सुखोई मिलने हैं। सुखोई के बाद अब भारत फ्रांस के राफेल विमान की तरफ आगे बढ़ चुका है। आपको यहां पर ये भी बताना जरूरी है कि भारतीय वायुसेना के पास आज भी मिग 21 और 27 मौजूद हैं, जिन्‍हें कई देश पूरी तरह से अलविदा कह चुके हैं। मौजूदा वर्ष में इनकी दो और स्‍क्‍वाड्रन को रिटायर कर दिया जाएगा। बचे हुए मिग-21 की स्‍क्‍वाड्रन को 2024 तक रिटायर कर दिया जाएगा। यहां ये भी ध्‍यान रखना बेहद जरूरी है कि मिग-27 को लगातार होते हादसों की वजह से ही जलता ताबूत की संज्ञा दी जा चुकी है। 2001 के बाद से अब तक करीब दो दर्जन मिग हादसे का शिकार हो चुके हैं। इसके अलावा भारत के पास स्‍वदेशी तेजस, जैगुआर और मिराज विमान भी हैं। 

    तैयार नहीं है तेजस
    भारतीय वायु सेना के साथ एक दिक्‍कत ये भी आ रही है कि स्‍वदेशी फाइटर जेट तेजस अभी तक उसके लिहाज से तैयार नहीं हुआ है। अभी तक इसका ट्रायल ही चल रहा है और विशेषज्ञों की मानें तो यह ट्रायल अभी कुछ लंबा चलना है। यही वजह इसको जानकार भी संशय से ही देखते हैं। इस विमान पर सरकार 70 हजार करोड़ रुपये का खर्च कर रही है। तेजस विमान की पहली खेप के 2022 तक भारतीय वायुसेना में शामिल होने की संभावना है। इसके बाद में इसका और हाईटेक वर्जन भारतीय सेना में शामिल किया जाएगा।

    सुखोई की आपूर्ति और राफेल पर इंतजार 
    भारतीय सेना की रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले सुखोई 30 की भी आपूर्ति अभी पूरी नहीं हो पाई है।मौजूदा वर्ष में इसके 36 और विमानों की आपूर्ति होनी है। गौरतलब है कि सरकार ने करीब 56 हजार करोड़ की कीमत से 272 सुखोई 30 विमानों का सौदा रूस से किया था। इसकी आपूर्ति धीरे-धीरे की जा रही है। इसके अलावा 36 राफेल विमानों का सौदा भारत सरकार कर चुकी है जिसकी आपूर्ति 2019 से लेकर 2022 तक होनी है। यह सौदा करीब 60 हजार करोड़ रुपये का है। राफेल डील में भी जहां 36 हमें फ्रांस से मिलेंगे वहीं 90 विमान भारत में ही बनाए जाएंगे। इसके लिए भारत की निजी कंपनियों समेत फाइटर जेट बनाने वाली विदेशी कंपनियों की भी मदद ली जाएगी और इस गठजोड़ से यह विमान बनाए जाएंगे। इसके अलावा 5वीं पीढ़ी के विमान के लिए एडवांस्‍ड मीडियम कोंबेट एयरक्राफ्ट का प्रोडक्‍शन करीब 2035 में शुरू होगा। यहां पर ध्‍यान रखने वाली बात ये है कि भारतीय वायुसेना के पास विमानों की संख्‍या 2125 है। वहीं चीन की यदि बात करें तो इनकी संख्‍या तीन हजार से भी अधिक है। भारतीय वायु सेना की मजबूती के लिए यूं तो प्‍लान तैयार किया गया है। इसके तहत 114 फाइटर जेट मेक इन इंडिया प्रोजेक्‍ट के तहत भारत में तैयार किए जाने हैं, जिस पर करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपये का खर्च आने की संभावना है।