नई दिल्‍ली (एएनआई)। भारत के संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद का अध्‍यक्ष बनने पर कई देशों ने अपनी शुकामनाएं दी हैं। इसमें फ्रांस और रूस सबसे आगे रहे हैं। इन देशों ने सुरक्षा परिषद में भारत के नेतृत्‍व में उठाए जाने वाले मुद्दों पर भी अपनी सहमति दी है। संयुक्‍त राष्‍ट्र में भारत के पूर्व राजदूत सैयद अकबरुद्दीन ने भी इसको लेकर भारत के शीर्ष नेतृत्‍व की जमकर तारीफ की है। उन्‍होंने कहा है कि प्रधानमंत्री देश के ऐसे पहले पीएम होंगे जिन्‍होंने सुरक्षा परिषद की बैठक का अध्‍यक्षता करने का फैसला लिया है। संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में भारत का ये आठवां कार्यकाल है।

पूर्व राजदूत ने कहा कि ये एक वर्चुअल बैठक है। उन्‍होंने इसको एक ऐतिहासिक पल भी बताया है। उनके मुताबिक इससे पहले वर्ष 1992 में तत्‍कालीन प्रधानमंत्री नरसिंह राव ने संयुक्‍त राष्‍ट्र की सुरक्षा परिषद की बैठक में हिस्‍सा लिया था। राव ने इस मुकाम को हासिल करने की कोशिश की थी। लिहाजा ये देश के लिए एक खास पल है। उन्‍होंने ये भी कहा कि 75 वर्षों में ऐसा पहली बार हो रहा है। ये बताता है कि अब भारत फ्रंट पर आकर विश्‍व का नेतृत्‍व करना चाहता है। 

अकबरुद्दीन ने कहा कि भारत के शीर्ष नेतृत्‍व ने अपनी प्रतिभा को पूरी दुनिया में मनवाने में सफलता हासिल की है। भारत सुरक्षा परिषद के नेतृत्‍व से ये बताना चाहता है कि वो ऐसा कर सकता है। पूर्व राजदूत ने भारत की इस सफल कोशिश के लिए पीएम मोदी के नेतृत्‍व को सराहा है। उन्‍होंने कहा है कि अब देश सबसे आगे बढ़कर अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर रहा है और अपनी बात को पूरजोर तरीके से रख रहा है। आपको बता दें कि सैयद अकबरुद्दीन कौटिल्‍य स्‍कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी के डीन हैं। वो इससे पहले यूएन में भारत के राजदूत रह चुके हैं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्‍होंने भारत का पक्ष इस वैश्विक मंच पर पुरजोर तरीके से रखा है। वे 2012-2015 तक विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता भी रह चुके हैं।

Edited By: Kamal Verma