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    अलविदा अम्‍मा : एमजी रामचंद्रन और जयललिता में थीं कई बातें समान

    By Kamal VermaEdited By:
    Updated: Tue, 06 Dec 2016 12:57 PM (IST)

    जयललिता के निधन के बाद राजाजी हाल में एक बार फिर वही मातम है जो कभी उनके गुरु की मौत पर हुआ था।

    चेन्नई (जेएनएन)। तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता का पार्थिव शरीर मंगलवार को जिस राजाजी हाल में रखा गया है वहीं पर कभी 29 वर्ष पहले उनके राजनीतिक गुरु एमजी रामचंद्रन का भी पार्थिव शरीर रखा गया था। तब भी इसी तरह का जनसैलाब इस जगह इकट्ठा हुआ था। देशभर के दिग्गज राजनेता उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने यहां पहुंचे थे। आज भी यहां का नजारा कुछ ऐसा ही है। फर्क सिर्फ इतना ही है कि जिस जगह रामचंद्रन का शव रखा गया था वहां आज जयललिता हैंं और जहां जयललिता उस वक्त खड़ी दिखाई दी थीं वहां आज कोई और खड़ा है।

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    एमजी रामचंद्रन जयललिता के राजनीतिक गुरु ही नहीं थे, बल्कि रंगमंच पर उन्हें स्टार बनाने वाले भी एमजी ही थे। जिस वक्त उनका निधन हुआ था उस वक्त भी तमिलनाडु की राजनीति में शून्य दिखाई दे रहा था और कुछ समय के लिए अब भी ऐसा ही कुछ हुआ था। दरअसल, एमजी के देहांत के बाद उनकी सत्ता किसको सौंपी जाए इसको लेकर काफी हो-हल्ला हुआ था। लेकिन संघर्ष के बाद इस सत्ता को पाने में उनकी सबसे करीबी कही जाने वाली जयललिता ने बाजी मारी थी। आज जयललिता के निधन के बाद यह जगह पनीरसेल्वम को हासिल हुई है।

    इसको इत्तेफाक ही कहा जाएगा कि एमजी की हालत खराब होने के बाद जिस अपोलाे अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया था, उसी अस्पताल में करीब 75 दिन जयललिता को भी भर्ती किया गया। लेकिन एमजी की तरह उनकी किस्मत अच्छी नहीं निकली। तीन माह के बाद एमजी ने अस्पताल से वापसी की, लेकिन जब जयललिता वहां से लौटींं तो वह हमेशा के लिए विदा ले चुकी थीं।

    पहले रंगमंच और फिर राजनीति में एमजी रामचंद्रन के साथ आईंं जयललिता भारत की शायद ऐसी पहली महिला राजनेता थीं जिन्होंने राज्य की राजनीति में हुोते हुए भी देशभर में इतनी शोहरत हासिल की और केंद्र की राजनीति को भी प्रभावित किया। यह भी महज इत्तेफाक ही है कि इसी माह की 24 तारीख को एमजीआर की भी पुण्यतिथि है। उनकी मौत वर्ष 1987 में हुई थी। इसको भी इत्तेफाक नहीं कहा जा सकता है कि जयललिता के सबसे बड़े प्रतिद्वंदी डीएमके के नेता एम करुणानिधी का संबंध भी एमजीआर के साथ रंगमंच से रहा है।

    इसके बाद में दोनों ने ही रंगमंच से अलग होकर अपने को राजनीति से जोड़ लिया। पहले एमजीआर भी डीएमके का ही हिस्सा थे, लेकिन 1972 में विवाद के बाद एमजीआर ने एआईएडीएमके पार्टी बनाई। बाद में इस पार्टी की कमान जयललिता ने संभाली। एमजीआर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर 30 जुलाई 1977 को विराजमान हुए, जो तीन कार्यकाल, अपनी मृत्यु तक वर्ष 1987 तक मुख्यमंत्री रहे।

    जयललिता 1991 से 1996, 2001 में, 2002-2006 तक और 2011 से 2014 से तक तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रहीं। उन्होंने तमिल के अलावा तेलुगू, कन्नड़ और एक हिंदी तथा एक अंग्रेजी फिल्म में भी काम किया था। स्कूल में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने 'एपिसल' नाम की अंग्रेजी फिल्म में काम किया। वे 15 वर्ष की आयु में कन्नड फिल्मों में मुख्य अभिनेत्री की भूमिकाएं करने लगी थीं। जयललिता दक्षिण भारत की पहली ऐसी अभिनेत्री थीं जिन्होंने फिल्मों में स्कर्ट के चलन को शुरू किया। 1965 से 1972 के दौर में उन्होंने अधिकतर फिल्में एमजी रामचंद्रन के साथ कीं।

    फिल्मी करियर के बाद उन्होंने एमजी रामचंद्रन के साथ 1982 में राजनीतिक करियर की शुरुआत की। उन्होंने 1984 से 1989 के दौरान तमिलनाडु से राज्यसभा के लिए राज्य का प्रतिनिधित्व भी किया। साल 1987 में रामचंद्रन के निधन के बाद उन्होने खुद को रामचंद्रन की विरासत का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। वे 24 जून 1991 से 12 मई 1996 तक राज्य की पहली निर्वाचित मुख्यमंत्री और राज्य की सबसे कम उम्र की मुख्यमंत्री रहीं।

    अप्रैल 2011 में जब 11 दलों के गठबंधन ने 14वीं राज्य विधानसभा में बहुमत हासिल किया तो वे तीसरी बार मुख्यमंत्री बनीं। राजनीति में उनके समर्थक उन्हें अम्मा और कभी कभी पुरातची तलाईवी जिसका मतलब 'क्रांतिकारी नेता' होता है कहकर पुकारते थे।