राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। अफगानिस्तान में पहले रूसी और उसके बाद नाटो सेनाओं के खिलाफ लड़ चुके जैश-ए- मोहम्मद के चीफ ट्रेनर अब्दुल रशीद गाजी व उसके दो साथियों मोहम्मद उमर व मोहम्मद इस्माइल ने ही गुंडीपोरा पुलवामा के आदिल अहमद डार को आत्मघाती हमले के लिए तैयार किया था। फिलहाल, सुरक्षाबलों ने तीनों पाकिस्तानी आतंकियों को पकड़ने के लिए दक्षिण कश्मीर के त्राल व उत्तरी कश्मीर के सोपोर स्थित ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी है।

जैश सरगना अजहर मसूद के करीबियों मे गिने जाने वाला गाजी बीते साल अक्टूबर के अंत में कश्मीर पहुंचा था। मोहम्मद उमर व मोहम्मद इस्माईल पहले से ही कश्मीर में मौजूद थे। इन्हें जैश सरगना ने कश्मीर में स्थानीय आतंकियों को ट्रेनिंग देने और सनसनीखेज आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए तैयार करने का जिम्मा सौंपा था।

बताया जाता है कि रशीद ने ही उमर व इस्माईल की मदद से आदिल अहमद डार को गत दिसंबर के दौरान अफजल गुरु स्क्वायड के लिए चुना था। उन्होंने उसे हमेशा अपने साथ रखते हुए उसके भीतर जिहादी मानसिकता को धर्मांधता में बदलने के साथ ही उसे आत्मघाती बनने की ट्रेनिंग दी। सुरक्षाबलों ने जब दक्षिण कश्मीर में जैश कमांडरों के संभावित ठिकानों पर दबिश दी तो तीनों पाकिस्तानी कमांडर उत्तरी कश्मीर की तरफ चले गए थे। सूत्रों की मानें तो गत सप्ताह बड़े पाक आतंकी के अवंतीपोर के आसपास होने की सूचना पर तलाशी अभियान भी चलाया गया था।

समझा जाता है कि यह आतंकी गाजी रशीद या उसके अन्य दो साथियों में कोई एक था। कश्मीर में आतंकरोधी अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा रहे अधिकारी ने बताया कि हमले को अंजाम दिए जाने की आशंका के चलते अलर्ट जारी था। गत पांच फरवरी को पाक में कश्मीर सालिडेरिटी डे पर कराची में जैश सरगना अजहर मसूद के छोटे भाई मौलाना अब्दुल रऊफ असगर ने भारत के विभिन्न हिस्सों को दहलाने का एलान किया था। उसने कहा था कि हर्म हिंदोस्तान में जिहादी व असकरी कार्रवाईयां अब कश्मीर के पहाड़ों से आगे भी ले जाएंगे। आतंकियों की साजिश का संज्ञान लेते हुए कश्मीर में ही नहीं जम्मू संभाग में भी सुरक्षा को बढ़ाया गया था।

आज आतंकी किसी तरह अपने मंसूबे में कामयाब रहे हैं। आदिल डार और गाजी के कनेक्शन के बारे में अधिकारी ने कहा कि किसी भी संभावना को नहीं नकारा जा सकता। गाजी रशीद, मोहम्मद उमर व मोहम्मद इस्माईल के बारे में जो जानकारी उपलब्ध है,उसके मुताबिक वह बहुत धूर्त मॉटिवेटर हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि आदिल को आत्मघाती बनाने में इनका हाथ होगा।

वारदात स्थल से 10 किमी दूर ही रहता था आदिल विस्फोटकों से लदी गाड़ी लेकर सीआरपीएफ के काफिले में विस्फोट करने वाला आतंकी आदिल अहमद डार उर्फ वकास उर्फ कमांडो विस्फोटस्थल से करीब 10 किलोमीटर दूर गंडीबाग काकपोरा (पुलवामा) में ही रहता था। तीन बार फेल होने के बाद दसवीं पास करने वाले आदिल अहमद के आत्मघाती बनने से सब हैरान हैं। वह 19 मार्च 2018 को आतंकी बना था। शुरु में वह जाकिर मूसा के साथ रहा और अप्रैल 2018 में वह जैश का हिस्सा बना था।

आतंकी बनने से पहले वह काकपोरा हायर सेकेंडरी स्कूल में 12वीं कक्षा का छात्र था। वह स्कूल में पढ़ाई के अलावा एक स्थानीय आरा मशीन पर भी काम करता था। वहां वह लकड़ी की पेटियां बनाता था। वह अपना काम शुरु करना चाहता था। उसके बारे में कहा जाता है कि वह अपने मां-बाप को बहुत प्यार करता था। उसकी कोई बहन नहीं थी। और अकसर वह अपने मां-बाप के कपड़े व बर्तन तक खुद साफ करता था।

बीते साल वह एक दिन स्कूल के लिए निकला और फिर आतंकी बन गया। वह वर्ष 1999 में पैदा हुआ था। कश्मीर घाटी में आत्मघाती आतंकियों की कतार में आदिल अहमद डार कोई पहला स्थानीय युवक नहीं है। लेकिन विस्फोटकों से लदे वाहन को लेकर सुरक्षाबलों पर हमला करने वाला वह अब तक का दूसरा स्थानीय आत्मघाती आतंकी है।

कौन है अफजल गुरु स्क्वॉड

अफजल गुरुस्क्वॉड का गठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना अजहर मसूद ने जनवरी 2014 में किया था। उसने यह संगठन संसद हमले के साजिशकर्ता अफजल गुरु को 9 फरवरी 2013 को हुई फांसी का बदला लेने के लिए बनाया है। इसी दस्ते ने उत्तरी कश्मीर के टंगडार, उड़ी, मोहरा, के अलावा श्रीनगर एयरपोर्ट के पास बीएसएफ शिविर, दक्षिण कश्मीर के लितपोरा पुलवामा में पुलिस लाइन और सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर के अलावा पठानकोट एयरबेस और जम्मू में सुंजवां व नगरोटा में सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले किए हैं।

Posted By: Sanjay Pokhriyal