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    Nimisha Priya को मौत के मुंह से किसने निकाला? CAA को लेकर भी चर्चा में आए थे 'ग्रैंड मुफ्ती'

    Updated: Wed, 16 Jul 2025 01:25 PM (IST)

    Nimisha Priya ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबक्कर अहमद ने भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की फांसी रुकवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। केरल के कोझिकोड के 94 वर्षीय आलिम अबूबक्कर मुस्लियार की आवाज दक्षिण एशिया के सुन्नी समुदाय में गूंजती है। उनकी कोशिशों से निमिषा को नई जिंदगी की उम्मीद मिली है। निमिषा पर 2017 में एक यमनी नागरिक की हत्या का आरोप है।

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    ग्रैंड मुफ्ती अबू बकर केरल और राष्ट्रीय स्तर पर उलमा की काउंसिलों में सक्रिय हैं।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत के ग्रैंड मुफ्ती शेख अबू बकर अहमद उर्फ कंथापुरम एपी अबू बकर मुस्लियार ने भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की फांसी रुकवाने में अहम भूमिका निभाई है। 94 साल के बुजुर्ग मुस्लिम आलिम असंभव लगने वाले काम को कर दिखाया है।

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    केरल के कोझिकोड से ताल्लुक रखने वाले इस आलिम की आवाज न सिर्फ भारत बल्कि दक्षिण एशिया के सुन्नी समुदाय में गूंजती है।

    उनकी कोशिशों ने 37 साल की निमिषा को नई जिंदगी की उम्मीद दी है। गौरतलब है कि निमिषा पर 2017 में एक यमनी नागरिक की हत्या का आरोप है। फिलहाल की सजा-ए-मौत को टाल दिया गया है।

    कौन हैं ग्रैंड मुफ्ती शेख अबू बकर अहमद ?

    शेख अबू बकर अहमद उर्फ कंथापुरम एपी अबू बकर मुस्लियार इस्लामी शरिया कानून के बड़े जानकार हैं। भले ही यह खिताब सरकारी तौर पर नहीं मानी जाती है, लेकिन धार्मिक मुद्दे पर उनके ज्ञान का कोई सानी नहीं है। वह भारत में सुन्नी समुदाय के बड़े चेहरों में से एक हैं और 10वें ग्रैंड मुफ्ती के तौर पर जाने जाते हैं।

    खाड़ी देशों में भी मुस्लियार का है दबदबा

    मुस्लियार का जन्म केरल के कोझिकोड में हुआ। वह न सिर्फ भारत में बल्कि खाड़ी देशों और दक्षिण-पूर्व एशिया में भी अपने बयानों और तकरीरों के लिए मशहूर हैं। वह केरल और राष्ट्रीय स्तर पर उलमा की काउंसिलों में सक्रिय हैं।

    इसके अलावा, वह कोझिकोड में ‘मार्कज नॉलेज सिटी’ के चेयरमैन भी हैं। यह एक निजी टाउनशिप है। इस प्रोजेक्ट में मेडिकल और लॉ कॉलेज के साथ-साथ एक सांस्कृतिक केंद्र भी शामिल है।

    वह पहले भी अपने बयानों की वजह से चर्चा में रहे हैं। मिसाल के तौर पर, 2019-20 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ सड़कों पर उतरीं महिलाओं को उन्होंने नसीहत दी थी कि वह इस तरह के विरोध से बचें। हालांकि, उन्होंने खुद CAA का विरोध भी किया था।

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