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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 19, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

राज्यपाल सी वी आनंद बोस की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, अनुच्छेद 361 की समीक्षा को तैयार हुआ सुप्रीम कोर्ट; बंगाल सरकार को नोटिस जारी

By Agency Edited By: Mahen Khanna
Published: Fri, 19 Jul 2024 03:46 PM (IST)

SC on Article 361 Notice सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 361 की रूपरेखा की जांच पर सुनवाई करने पर ...और पढ़ें

SC on Article 361 Notice सीवी बोस केस में एक्शन में एससी।
SC on Article 361 Notice सीवी बोस केस में एक्शन में एससी।

पीटीआई, नई दिल्ली। SC on Article 361 Notice आपराधिक अभियोजन झेल रहे राज्यपालों को अब झटका लग सकता है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को संविधान के अनुच्छेद 361 की रूपरेखा की जांच पर सुनवाई करने पर सहमति जताई है। इस अनुच्छेद के तहत राज्यपालों को किसी भी तरह के आपराधिक मुकदमे से पूर्ण छूट मिलती है।

मामले में बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

बंगाल सरकार को नोटिस जारी

मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार को एक संविदा महिला कर्मचारी की याचिका पर नोटिस भी जारी किया। महिला ने राज्य के राज्यपाल सी वी आनंद बोस पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया है।

महिला ने राज्यपाल को "प्रतिरक्षा" प्रदान करने वाले संविधान के अनुच्छेद 361 की न्यायिक जांच की मांग की थी, जिससे निटपने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी की सहायता मांगी। कोर्ट ने पश्चिम बंगाल 'राजभवन' की महिला कर्मचारी से कहा कि वह अपनी याचिका में केंद्र को भी पक्षकार बनाए। 

राज्यपालों को मिल रखी है छूट

बता दें कि यह अनुच्छेद संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का अपवाद है और यह प्रावधान करता है कि राष्ट्रपति या राज्यपाल अपने पद की शक्तियों और कर्तव्यों के प्रयोग के लिए किसी भी अदालत के प्रति जवाबदेह नहीं हैं। 

इसी के खिलाफ महिला याचिकाकर्ता ने विशिष्ट दिशा-निर्देश तैयार करने के निर्देश मांगे हैं, जिसके तहत राज्यपालों को आपराधिक अभियोजन से छूट प्राप्त