हिसार [वैभव शर्मा]। शुगर के मरीजों को अक्सर मीठे पकवानों से तौबा करनी पड़ती है, क्योंकि यही उनके शरीर में शुगर की मात्रा को पल में बढ़ाते व पल में घटा देते हैं। हांलाकि, अब ऐसे मरीज भी दिल खोल के पकवानों का जायका ले सकेंगे। भारतीय कदन्न अनुसंधान संस्थान (आइआइएमआर) ने ऐसी 150 से अधिक डिश तैयार की हैं जो ज्वार, बाजरा सहित आठ प्रकार के कदन्न से बनी हैं। ये विशेष व्यंजन डायबिटीज मरीजों के लिए किसी वरदान के कम नहीं हैं।

करीब 20 वर्ष पहले ज्वार, बाजरा को लोग रोजाना खाने में प्रयोग करते थे, लेकिन बाजार में विकल्प आने के बाद से इनका प्रयोग कम हो गया। अब जिस प्रकार से बीमारियां बढ़ रही हैं, उसमें मौजूदा समय में आ रहे गेहूं आदि का बड़ा रोल है। कदन्न आपके शरीर में धीमी गति से कार्बोहाइड्रेट बनाता है। इस कारण से यह शुगर के मरीजों के लिए बेहतर है।

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नई पीढ़ी का रखा खास ख्याल

नई पीढ़ी को ज्वार, बाजरा में स्वाद नहीं आता। इसलिए वे इसे नहीं खाते, लेकिन अब जिस तरीके ज्वार व बाजरे से व्यंजन तैयार किए गए हैं, वह हर किसी को पसंद आएंगे। हाल ही में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) में कदन्न पर कांफ्रेंस हुई। इसमें आइआइएमआर से जुड़े विशेषज्ञों ने भी भाग लिया। उन्होंने वहां छात्रों व आगंतुकों को दिखाया कि किस प्रकार से ज्वार, बाजरा से खीर, हलवा, बच्चों को पसंद आने वाली मफिन्स, केक जैसे 150 से अधिक खाद्य उत्पाद बनाए जा सकते हैं।

स्वाद ऐसा कि सब भूल जाएंगे

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इनको चखने पर आपको ऐसा बिल्कुल नहीं लगेगा कि आप ज्वार, बाजरा जैसा कुछ खा रहे हैं। इंस्टीट्यूट ने इन खाद्य पदार्थों को तैयार करने में हर बारीकी का ध्यान रखा है। मौजूदा समय में एचएयू में बाजरे के बिस्किट, नूडल्स जैसे उत्पाद बनाए जा रहे हैं।

भेलपुरी, पानीपुरी और कुकीज जैसे प्रोडक्ट भी

खाने के शौकीनों में अक्सर 40 से कम उम्र के लोगों की संख्या अधिक होती है। इसलिए ज्वार, बाजरा और रागी पर इतने प्रयोग किए गए कि मौजूदा समय में युवाओं को पसंद आने वाले व्यंजन भी इससे तैयार हो सकें। इंस्टीट्यूट में ज्वार से पानीपुरी, ज्वार नारियल चॉकलेट लड्डू, ज्वार आटे के गुलाब जामुन, ज्वार चॉकलेट ब्राउनी, ज्वार आटे का मैसूर पाक, कोदो से भेलपुरी, ज्वार अंडारहित रवा केक, ज्वार कुकीज, छोटे कदन्न से काजू नमकीन, बाजरा सेव आदि तैयार किए गए हैं। इंस्टीट्यूटी का लक्ष्य है कि वह देश में ज्यादा से ज्यादा लोगों को इन विशेष प्रकार के व्यंजनों का प्रशिक्षण दे, ताकि वे कदन्न खाद्य पदार्थों का रेस्तरां संचालित कर सकें। इससे लोगों की सेहत में तो सुधार होगा ही और साथ ही कदन्न फसलों को भी बढ़ावा मिलेगा।

कदन्न में आने वाली फसलें

ज्वार, बाजरा, रागी, कुटकी, कोदो, कंगनी, सावां, चना

फसलों की विशेषताएं

-इसमें विटामिन बी कॉम्पलेक्स व विटामिन ई अधिक मात्र में पाया जाता है।

-इसमें विशेषकर खनिज, आयरन, मैग्नीशियम, फासफोरस व पोटेशियम ज्यादा मात्र में पाए जाते हैं।

-लंबे समय में मुक्त ग्लूकोज का प्रतिशत कम होता है। इस कारण मधुमेह का खतरा कम हो जाता है।

-कदन्न में प्रोटीन की मात्र छह से 11 व वसा की मात्र 1.5 से लेकर पांच तक भिन्न होती है।

-ज्वार, बाजरा सहित आठ प्रकार के कदन्न के जरिये स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक डिश बनाना सिखा रहा है आइआइएमआर।

Posted By: Amit Singh

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