नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। जनरल बिपिन रावत को सरकार ने देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्‍टाफ नियुक्‍त किया है। उनका काम तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाना होगा। कारगिल युद्ध के बाद इस पद की जरूरत महसूस की जाने लगी थी। 15 अगस्त को सरकार ने इस पद को सृजित करने का एलान किया था और 24 दिसंबर को इसे कैबिनेट की मंजूरी मिल गई थी। रक्षा से जुड़े मामलों में वे पीएम और रक्षा मंत्री के सलाहकार भी होंगे। जनरल बिपिन रावत रक्षा मंत्रालय में गठित नए विभाग ‘डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स’ के सचिव होंगे।सीडीएस के रूप में सरकार ने रावत के नाम पर यूं ही मुहर नहीं लगाई है। बल्कि इसके पीछे उनके द्वारा प्राप्‍त की गई वो खास उपलब्धियां हैं जिन्‍हें किसी के लिए भी नजरदांज करना नामुमकिन था। उनकी जगह पर अब नए सेना प्रमुख के तौर पर जनरल मनोज मुकुंद नरवाने कमान संभाल चुके हैं। 

म्‍यांमार में सर्जिकल स्‍ट्राइक 

भारत ने उनके नेतृत्‍व में ही मणिपुर में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए हमले के बाद सीमा पार म्‍यांमार में सर्जिकल स्‍ट्राइक कर एनएससीएन के कई उग्रवादियों और उनके कैंप को नष्‍ट कर दिया था। भारतीय सेना द्वारा की गई इस जवाबी कार्रवाई में 21 पैरा के कमांडो शामिल थे। ये बटालियन थर्ड कॉर्प्‍स के अधीन थी जिसके कमांडर उस वक्‍त बिपिन रावत ही थे। जून 2015 में उग्रवादियों द्वारा किए गए हमले में 18 जवान शहीद हो गए थे। म्‍यांमार में किए गए इस सफल ऑपरेशन के बाद ही सरकार ने जनरल रावत पर भरोसा जताते हुए उन्‍हें 31 दिसंबर 2016 में सेना प्रमुख बनाया था। इसके लिए सरकार ने उनके दो वरिष्‍ठ अधिकारों से ज्‍यादा तरजीह उनके नाम को दी थी। ऐसे में सरकार को उनके पूर्वोत्‍तर के अशांत इलाकों, पूर्वी सेक्‍टर में एलओसी और कश्‍मीर में काम करने का लंबा अनुभव भी काम आया। 

पीओके में सर्जिकल स्‍ट्राइक 

उरी में सेना के कैंप पर हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने जनरल बिपिन रावत के ही नेतृत्‍व में 29 सितंबर 2016 को पाकिस्‍तान में स्थित आतंकी शिविरों को ध्‍वस्‍त करने के लिए सर्जिकल स्‍ट्राइक की थी। भारत द्वार पाकिस्‍तान की सीमा में की गई इस तरह ये पहली स्‍ट्राइक थी। इस सर्जिकल स्‍ट्राइक को हर तरह से ट्रेंड पैरा कमांडो ने अंजाम दिया था। इसके ऑपरेशन के लिए जहां जमीन पर कमांडोज ने अपनी सटीक भूमिका निभाई थी वहीं अं‍तरिक्ष में मौजूद भारतीय सेटेलाइट की भी मदद ली गई थी। रातों-रात हुई इस स्‍ट्राइक के बाद पाकिस्‍तान बुरी तरह से बौखला गया था। इस स्‍ट्राइक ने जहां पाकिस्‍तान की काली करतूतों को दुनिया के सामने लाने में मदद की वहीं देश के जवानों का भी हौसला बढ़ाया था।  

जनरल रावत का ये है ट्रैक रिकॉर्ड

वर्तमान में सीडीएस जनरल रावत को 1978 में सेना की 11वीं गोरखा राइफल्‍स की पांचवी बटालियन में कमीशन मिला था। वह आईएमए के सोर्ड ऑफ ऑनर होल्‍डर रहे हैं। इसके अलावा 1986 में चीन से लगी एलएसी पर वो इंफेंट्री बटालियन के चीफ रह चुके हैं। जनरल रावत आरआर राइफल्‍स के एक सेक्‍टर और कश्‍मीर में 19 इंफेंट्री डिविजन की भी अगुआइ्र कर चुके हैं। देश ही नहीं यूएन मिशन में भी उन्‍होंने भारत का नेतृत्‍व किया है। 2सितंबर 2016 को उन्‍हें उप सेना प्रमुख बनाया गया था। 

पिता भी थे उप सेना प्रमुख 

सेना में उनकी सेवा को देखते हुए उन्‍हें उत्‍तर युद्ध सेवा मेडल, एवीएसएम, युद्ध सेवा मेडल, सेना मेडल, विदेश सेवा मेडल मिल चुका है। शिक्षा की बात करें तो आपको बता दें कि जनरल रावत पीएचडी होल्‍डर हैं। आपको बता दें कि जनरल रावत के पिता भी सेना में लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर थे और 1988 में उप सेना प्रमुख के पद से रिटायर हुए थे। उनका नाम लक्ष्‍मण सिंह रावत था।

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Edited By: Kamal Verma

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