Gaganyaan Mission के 2027 में पूरा होने की उम्मीद, इस साल के अंत में लॉंच हो सकता है गगनयान परियोजना का पहला मानवरहित मिशन
भारत के पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान - गगनयान - का प्रक्षेपण 2027 की पहली तिमाही तक टाल दिया गया है। गगनयान अभियान में पृथ्वी की 400 किलोमीटर पर स्थित निचली कक्षा में अंतरिक्षयात्रियों को भेजा जाएगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष वी. नारायणन ने कहा कि गगनयान परियोजना का पहला मानवरहित मिशन इस साल के अंत में प्रक्षेपित होने की उम्मीद है।

पीटीआई, नई दिल्ली। भारत के पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान, गगनयान का प्रक्षेपण 2027 की पहली तिमाही तक टाल दिया गया है। गगनयान अभियान में पृथ्वी की 400 किलोमीटर पर स्थित निचली कक्षा में अंतरिक्षयात्रियों को भेजा जाएगा। उनकी पृथ्वी पर सुरक्षित वापसी भी कराई जाएगी। अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत अंतरिक्ष में मानव भेजने वाला चौथा देश बन जाएगा।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष वी. नारायणन ने कहा कि गगनयान परियोजना का पहला मानवरहित मिशन इस साल के अंत में प्रक्षेपित होने की उम्मीद है। इसके बाद 2026 में इसी तरह के दो और मिशन प्रक्षेपित किए जाएंगे। पहला मानवयुक्त मिशन 2027 की पहली तिमाही में लांच किया जाएगा। अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजने से पहले इसरो मानवरहित मिशन के तहत रोबोट 'व्योममित्र' को भेजेगा।
परियोजना में कई बार हुई देरी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2018 में अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन के दौरान गगनयान परियोजना की घोषणा की थी और भारत की पहली मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान के लिए 2022 का लक्ष्य निर्धारित किया था। इस परियोजना में कई बार देरी हुई है, जिसका एक कारण कोविड महामारी भी रही। देरी का दूसरा कारण मिशन के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में महारत हासिल करने संबंधी जटिलताएं हैं।
गगनयान मिशन के लिए मानव-योग्य प्रक्षेपण यान विकसित करने के साथ ही इसरो विज्ञानियों ने मिशन के लिए पर्यावरण नियंत्रण एवं जीवन सहायता प्रणाली (ईसीएलएसएस) का भी निर्माण किया है। ईसीएलएसएस मिशन की अवधि के दौरान अंतरिक्ष यान में केबिन दबाव, आर्द्रता, तापमान, वायु गुणवत्ता और व्यक्तिगत स्वच्छता प्रबंधन प्रणाली को बनाए रखने में मदद करेगी।
नारायणन ने कहा, यह जटिल प्रक्रिया है। 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और हम अंतिम चरण में हैं। नारायणन ने कहा कि दिसंबर में पीएसएलवी राकेट द्वारा प्रक्षेपित दो उपग्रहों के अंतरिक्ष 'डा¨कग' प्रयोग सफल रहे और इसरो 'स्पैडेक्स-2' की योजना बना रहा है।
उन्होंने कहा कि इस संबंध में एक प्रस्ताव जल्द ही सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। नारायणन ने कहा कि 'स्पैडेक्स' मिशन के दौरान ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग से इसरो को कक्षा में और अधिक प्रयोग करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि इसरो सात से नौ मई तक वैश्विक अंतरिक्ष अन्वेषण सम्मेलन (ग्लेक्स 2025) की मेजबानी कर रहा है, जो भारत को अंतरिक्ष अन्वेषण में भागीदार के रूप में स्थापित करेगा।
आइएसएस में शुभांशु शुक्ला को उपलब्ध कराया जाएगा 'घर का खाना'
भारतीय अंतरिक्षयात्री शुभांशु शुक्ला को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आइएसएस) की यात्रा के दौरान भारतीय भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। शुभांशु शुक्ला इस महीने के अंत में एक्सिओम मिशन 4 के तहत आइएसएस की यात्रा करेंगे। इस दौरान वह विभिन्न प्रकार के चावल, मूंग दाल के हलवे और आम के रस का स्वाद ले सकेंगे। शुभांशु आइएसएस में 14 दिन रहेंगे। वह नासा द्वारा मिशन के लिए स्वीकृत विभिन्न अंतरराष्ट्रीय व्यंजनों का भी आनंद ले सकेंगे।
इसरो के विज्ञानियों ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के साथ मिलकर अंतरिक्ष मिशन के दौरान अंतरिक्षयात्रियों के लिए चावल के व्यंजन, मूंग दाल का हलवा और आम का रस सहित अन्य व्यंजन विकसित किए हैं।
इसरो के मानव अंतरिक्ष उड़ान केंद्र के निदेशक डीके. सिंह ने कहा, शुक्ला जी को 'घर का खाना' मिलेगा और उनके पास नासा द्वारा अनुमोदित अंतरराष्ट्रीय व्यंजनों में से चुनने का विकल्प भी होगा। इसरो और डीआरडीओ ने गगनयान मिशन के अंतरिक्षयात्रियों के लिए खाद्य पदार्थ विकसित किए हैं और नासा की मंजूरी से इन्हें शुक्ला को उपलब्ध कराया जा रहा है।
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