'गगन जीत' धरती पर लौटे शुभांशु शुक्ला, अपने नाम दर्ज कर लिया ये खास रिकॉर्ड; जानिए कब आएंगे भारत
गगनयात्री शुभांशु शुक्ला आईएसएस पर 18 दिन बिताने के बाद पृथ्वी पर लौटे। एक्सिओम-4 मिशन के साथ वे कैलिफ़ोर्निया तट पर उतरे। उनकी वापसी गगनयान मिशन के लिए महत्वपूर्ण है जिसमें इसरो ने 550 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। 26 जून को आईएसएस पहुंचे शुभांशु ने 18 दिनों में 60 प्रयोग किए। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के अनुसार शुभांशु 17 अगस्त तक भारत पहुंच सकते हैं।

पीटीआई, नई दिल्ली। गगनयात्री शुभांशु शुक्ला आइएसएस पर 18 दिन रहने के बाद मंगलवार को पृथ्वी पर लौट आए। शुभांशु समेत एक्सिओम-4 मिशन के चार सदस्यों को लेकर ड्रैगन यान कैलिफोर्निया तट पर उतरा।
अंतरिक्षयात्रियों ने पृथ्वी पर लौटने के लिए साढ़े 22 घंटे की यात्रा की। 'गगन जीतने' वाले शुभांशु जब प्रशांत महासागर में कैलिफोर्निया तट पर मुस्कुराते हुए और कैमरों की ओर हाथ हिलाते हुए उतरे तो करोड़ों भारतीयों का स्वाभिमान एक बार फिर सातवें आसमान पर था।
17 अगस्त को भारत आएंगे शुभांशु
शुभांशु 17 अगस्त तक भारत पहुंच सकते हैं। शुभांशु और एक्सिओम-4 मिशन के तीन अन्य अंतरिक्षयात्री- मिशन कमांडर अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री पैगी व्हिटसन, पोलैंड के स्लावोस्ज उजनांस्की-विस्नीवस्की, हंगरी के टिबोर कापू भारतीय समयानुसार दोपहर 3:01 बजे प्रशांत महासागर में कैलिफोर्निया के सैन डिएगो तट के निकट उतरे।
अमेरिका से हजारों मील दूर भारत के 140 करोड़ लोग आइएसएस पर पहली बार भारत का परचम लहराने वाले देश के यशस्वी सपूत का स्वागत करने के लिए पलक पांवड़े बिछाए थे। भारतीय वायुसेना में ग्रुप कैप्टन शुभांशु आइएसएस की यात्रा करने वाले पहले भारतीय हैं। वह पृथ्वी की कक्षा में सबसे लंबे समय तक - 20 दिन - रहने वाले पहले भारतीय भी बन गए हैं। वह अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय हैं। इससे पहले राकेश शर्मा 1984 में सोवियत संघ के सोयूज अंतरिक्षयान से अंतरिक्ष स्टेशन सैल्यूट 7 पर गए थे।
मिशन पर इसरो ने खर्च किए 550 करोड़
शुभांशु ने अपनी इस यात्रा से भारत के पहले स्वदेशी मानव अंतरिक्ष मिशन 'गगनयान' की राह आसान बना दी है। इस यात्रा में मिले अनुभव से इसरो को अपने मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम, 'गगनयान' को क्रियान्वित करने में मदद मिलेगी।
यही कारण है कि एक्सिओम-4 मिशन पर इसरो ने 550 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। गगनयान को 2027 में लांच किए जाने की संभावना है। इस अभियान में पृथ्वी की 400 किलोमीटर पर स्थित निचली कक्षा में तीन अंतरिक्षयात्रियों को भेजा जाएगा। इसके बाद पृथ्वी पर सुरक्षित वापसी भी कराई जाएगी।
26 जून को आइएसएस पर पहुंचे थे शुभांशु
शुभांशु और तीन अन्य अंतरिक्षयात्री 26 जून को आइएसएस पर पहुंचे थे। अंतरिक्षयात्रियों ने आइएसएस से जुड़ने के बाद से लगभग 76 लाख मील की दूरी तय करते हुए पृथ्वी के चारों ओर लगभग 433 घंटे या 18 दिन तक 288 परिक्रमाएं कीं। अंतरिक्षयात्रियों ने 18 दिनों तक 60 प्रयोग किए।
इस तरह हुई वापसी
- शुभांशु और तीन अन्य अंतरिक्षयात्री सोमवार को अनडॉकिंग से लगभग दो घंटे पहले अंतरिक्षयान में सवार हुए और अपने स्पेससूट पहने
- भारतीय समयानुसार सोमवार दोपहर 2:37 बजे पर अंतरिक्षयान को आइएसएस से जोड़ने वाले हैच को बंद कर दिया।
- स्पेसएक्स का क्रू ड्रैगन अंतरिक्षयान सोमवार को आइएसएस से अलग हुआ। अनडॉकिंग (आइएसएस से अंतरिक्षयान से अलग होने) की प्रक्रिया भारतीय समयानुसार शाम लगभग 4:45 बजे हुई।
- अनडॉकिंग के बाद कक्षीय प्रयोगशाला से दूर जाने के लिए उसने थ्रस्टर्स फायर किए गए।
- 28 हजार किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति से यात्रा करते हुए ड्रैगन अंतरिक्षयान ने धीरे-धीरे गति कम करने और पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने के लिए कई प्रक्रियाएं पूरी कीं।
- प्रशांत महासागर में उतरने से पहले तीव्र घर्षण के कारण लगभग 1600 डिग्री सेल्सियस के तापमान का सामना किया।
- कुछ ही मिनटों बाद ड्रैगन अंतरिक्षयान को स्पेसएक्स के रिकवरी शिप 'शैनन' के ऊपर ले जाया गया, जहां शुभांशु और अन्य अंतरिक्षयात्री अंतरिक्षयान से बाहर निकले।
- अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर तीन सप्ताह तक भारहीनता की स्थिति में रहने के बाद पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण के साथ तालमेल बिठाने के लिए पैरों के सहारे चलवाने में अंतरिक्ष यात्रियों की 'ग्राउंड स्टाफ' ने मदद की।
- एक्सिओम-4 के चालक दल की जहाज पर ही कई चिकित्सा जांच की गई। इसके बाद उन्हें वापस तट पर जाने के लिए हेलीकाप्टर में बैठाया गया। अब अंतरिक्षयात्रियों को पुनर्वास कार्यक्रम (लगभग सात दिन) से गुजरना होगा ताकि वह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के अनुकूल हो सके।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि शुभांशु शुक्ला 17 अगस्त तक भारत पहुंच सकते हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा, कुछ मानक संचालन प्रक्रियाओं का पालन किया जाना है। हम 17 अगस्त तक उनके दिल्ली पहुंचने की उम्मीद कर सकते हैं। इस मिशन को ''अभूतपूर्व'' बताते हुए, उन्होंने कहा कि आइएसएस में अपने प्रवास के दौरान शुभांशु द्वारा किए गए प्रयोग मानव अस्तित्व से जुड़े थे।
उन्होंने कहा कि ये प्रयोग न केवल भारतीयों के लिए बल्कि पूरी मानवता के लिए उपयोगी होंगे।उन्होंने कहा, यह भारत के लिए अत्यंत प्रसन्नता का क्षण है कि भारत माता का सपूत सफलतापूर्वक लौट आया है।
उन्होंने आगे कहा कि शुभांशु की यात्रा वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है। जैसा कि प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) हमें हमेशा 'वसुधैव कुटुम्बकम' के सिद्धांत के बारे में सिखाते हैं और हमें याद दिलाते हैं कि भारत को वैश्विक मित्र के रूप में अपनी भूमिका निभानी चाहिए, शुभांशु ने सही मायने में वैश्विक मंच पर भारत के प्रतिनिधि के रूप में काम किया है।
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