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    बीच में पढ़ाई छोड़ने और शुरू करने का छात्रों को मिलेगा मौका, UGC शुरू करेगी क्रेडिट फ्रेमवर्क; ऐसे मिलेगा फायदा

    Updated: Fri, 11 Jul 2025 11:00 PM (IST)

    उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों को अब पढ़ाई बीच में छोड़ने और फिर शुरू करने की सुविधा मिलेगी। इसके लिए उन्हें कम से कम एक वर्ष की पढ़ाई पूरी करनी होगी। यूजीसी ने नई शिक्षा नीति के तहत दिशा-निर्देशों का मसौदा जारी किया है जिसके अनुसार छात्रों को स्नातक पाठ्यक्रमों में वर्ष के अनुसार सर्टिफिकेट डिप्लोमा डिग्री और ऑनर्स की डिग्री मिलेगी।

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    छोड़ी गई पढ़ाई को आजीवन कभी भी पूरा कर सकेंगे छात्र (प्रतीकात्मक तस्वीर)

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र अब अपनी पढ़ाई को बीच में कभी भी छोड़ और शुरू कर सकेंगे। हालांकि इसके लिए उन्हें कम-कम एक वर्ष की पढ़ाई पूरी करनी होगी।

    इस दौरान उन्हें स्नातक पाठ्यक्रमों में एक वर्ष की पढ़ाई पर सर्टिफिकेट दिया जाएगा जबकि दो वर्ष की पढ़ाई पर डिप्लोमा, तीन वर्ष की पढ़ाई पूरा करने पर डिग्री और चार वर्ष की पढ़ाई पूरा करने पर आनर्स की डिग्री मिलेगी।

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    दिशा-निर्देशों का मसौदा जारी

    इतना ही नहीं, छात्र अपनी बीच में छोड़ी गई पढ़ाई को आजीवन कभी भी पूरा कर सकेंगे। पूर्व में की गई उनकी पढ़ाई के क्रेडिट अंक उनके एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (एबीसी) में जमा रहेंगे। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) में उच्च शिक्षा को लचीला बनाने को लेकर की गई इस अहम सिफारिश के अमल को लेकर तैयार किए गए दिशा-निर्देशों का मसौदा जारी किया है।

    साथ ही उच्च शिक्षण संस्थानों से 30 जुलाई तक सुझाव देने को कहा है। यूजीसी ने इस दौरान सभी उच्च शिक्षण संस्थानों से स्नातक और परास्नातक पाठ्यक्रमों को एक समान क्रेडिट फ्रेमवर्क तैयार करने कहा है, ताकि किसी संस्थान से पढ़ाई करके निकले छात्र को दूसरे संस्थान में दाखिला लेने में किसी तरह की दिक्कत न पैदा हो।

    ऑनलाइन डिग्री कोर्सों में सुविधा नहीं

    • यही नहीं, आयोग ने एक समान क्रेडिट फ्रेमवर्क और लर्निंग आउटकम के आधार पर उच्च शिक्षण संस्थानों का एक कलस्टर भी तैयार करने का सुझाव दिया है ताकि बीच में पढ़ाई छोड़ने के बाद छात्रों को उन संस्थानों में आसानी से दाखिला मिल सके।
    • यह व्यवस्था ऑनलाइन डिग्री कोर्सों पर लागू नहीं होगी। गौरतलब है कि एनईपी में उच्च शिक्षा को लचीला बनाने में जुड़ी इस अहम सिफारिश के अमल को यूजीसी ने यह तेजी ऐसे समय दिखाई है, जब एनईपी के अमल को पांच साल पूरा होने जा रहा है। देश में एनईपी को 29 जुलाई 2020 को लागू किया गया है।

    आजीवन कभी भी शुरू कर सकते है पढ़ाई

    यूसीजी ने पढ़ाई को कभी भी छोड़ने और शुरू करने के अमल को लेकर जारी मसौदे में साफ कहा है कि छोड़ी गई पढ़ाई को छात्र आजीवन कभी भी शुरू कर सकते है। बशर्ते उनके क्रेडिट का वैधता बरकरार हो। यहां बता दें कि सभी विश्वविद्यालयों ने क्रेडिट की वैधता की अलग- अलग समयसीमा तय कर रखी।

    वैसे औसतन यह पांच से दस वर्ष की है। बावजूद इसके यूजीसी ने कहा है कि कोई छात्र अपनी छूटी पढ़ाई को पूरा करना चाहता है तो वह क्रेडिट वैधता खत्म होने के बाद भी अपनी पूर्व पढ़ाई की मान्यता के लिए आवेदन कर सकते है। इस दौरान उनके खत्म हो चुके क्रेडिट का फिर से मूल्यांकन किया जाएगा।

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