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    H3N2 Influenza In Assam: असम में H3N2 का पहला मामला आया सामने, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर

    By Jagran NewsEdited By: Versha Singh
    Updated: Thu, 16 Mar 2023 09:48 AM (IST)

    H3N2 Influenza In Assam असम में एच3एन2 इन्फ्लुएंजा (H3N2 influenza) का पहला मामला सामने आया है और स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा है। एक आधिकारिक बुलेटिन में यह जानकारी दी गई है। एच3एन2 इन्फ्लुएंजा के एक मामले की पुष्टि हुई है।

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    असम में H3N2 का पहला मामला आया सामने

    गुवाहाटी, एजेंसी। H3N2 Influenza In Assam: असम में एच3एन2 इन्फ्लुएंजा (H3N2 influenza) का पहला मामला सामने आया है और स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा है। एक आधिकारिक बुलेटिन में यह जानकारी दी गई है।

    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, असम द्वारा बुधवार रात जारी बुलेटिन के अनुसार, एच3एन2 इन्फ्लुएंजा (H3N2 influenza) के एक मामले की पुष्टि हुई है।

    इसमें कहा गया है कि स्वास्थ्य विभाग वास्तविक समय के आधार पर एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) नेटवर्क के माध्यम से असम में मौसमी इन्फ्लूएंजा की उभरती स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा है।

    आईडीएसपी नेटवर्क के तहत जिला निगरानी अधिकारी केंद्र और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (Indian Council of Medical Research, ICMR) द्वारा तैयार दिशा-निर्देशों के अनुरूप असम में इस सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

    एनएचएम ने कहा, विश्व स्तर पर, इन्फ्लूएंजा के मामलों में आमतौर पर वर्ष के कुछ महीनों के दौरान वृद्धि देखी जाती है। भारत में आमतौर पर मौसमी इन्फ्लूएंजा के दो शिखर देखे जाते हैं: एक जनवरी से मार्च तक और दूसरा मानसून के बाद के मौसम में।

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    बुलेटिन में कहा गया है कि मौसमी इन्फ्लूएंजा (seasonal influenza) से उत्पन्न होने वाले मामलों में मार्च के अंत से कमी आने की उम्मीद है।

    एनएचएम ने कहा कि बीमारी का संचरण ज्यादातर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में खांसी और छींक से उत्पन्न बड़ी बूंदों के माध्यम से होता है। संचरण के अन्य तरीके दूषित वस्तु या सतह को छूकर अप्रत्यक्ष संपर्क और हैंडशेकिंग सहित निकट संपर्क हैं।

    बुलेटिन में कहा गया है कि ज्यादातर मामलों में, खांसी और सर्दी, शरीर में दर्द और बुखार आदि के लक्षणों के साथ रोग स्वयं सीमित होता है और आमतौर पर एक सप्ताह के भीतर ठीक हो जाता है।

    हालांकि, संभावित उच्च जोखिम वाले समूहों जैसे शिशुओं, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों और सह-रुग्णता वाले लोगों को अधिक रोगसूचक बीमारी का अनुभव हो सकता है, जिसमें अस्पताल में भर्ती होने की भी आवश्यकता होती है।

    स्वास्थ्य विभाग लोगों द्वारा हाथ की स्वच्छता और श्वसन शिष्टाचार का अभ्यास करने के लिए जागरूकता पैदा करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

    एनएचएम ने कहा, "मेडिकल कॉलेजों सहित सभी स्वास्थ्य सुविधाओं में परीक्षण किट, दवाओं, निदान और मामले के प्रबंधन के लिए उपभोग्य सामग्रियों का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखा गया है।"