ऊना [वीरेन पराशर]। बेटियों की कमी के मामले में देश के 100 जिलों में शुमार हिमाचल के ऊना जिले में अब तस्वीर बदलने लगी है। ग्राम पंचायत मावा कोहलां ने आदर्श प्रस्तुत किया है, जहां अब हर परिवार की मुखिया महिला है। इस बात का प्रमाण मकान के प्रवेशद्वार पर लगी नामपट्टिका से मिल जाता है। परिवार की महिलाओं को, बेटियों को प्रोत्साहन देने के लिए, उन्हें पारिवारिक, सामाजिक, शैक्षिक व आर्थिक स्तर पर बराबरी का दर्जा देने के लिए यह पहल जिले में शुरू की गई है।

इस पंचायत के साढ़े पांच सौ घरों में महिलाओं के नाम की पट्टिका लगाई गई है। खास बात यह है घरों में ही नहीं बल्कि बाजार में दुकानों पर भी परिवार की महिला व बेटियां के नाम पर बोर्ड लगाए गए हैं। कम लिंगानुपात वाले देश के चिन्हित 100 जिलों में शामिल ऊना में इस तरह की कवायद बेटियों के प्रति सोच बदलने में बड़ा कदम मानी जा रही है।

जिले में लिंगानपुात की बात की जाए तो एक हजार पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की संख्या 976 है। ऊना उत्कर्ष योजना के तहत ग्राम पंचायत ने खुद को इस अभियान से जोड़ा है। प्रधान संगीता देवी कहती हैं कि अब हर घर महिला प्रधान हो गया है और दुकानों में भी बेटियों को सम्मान दिया गया है। उम्मीद है इस प्रयास के माध्यम से बेटियों को लेकर लोगों की सोच में बदलाव आएगा और लिंगानुपात में सुधार होगा।

उपायुक्त ऊना राकेश कुमार प्रजापति कहते हैं, जिले में बेटियों के प्रति रूढ़िवादी सोच को बदलने के लिए प्रयास जारी है। जिले की अन्य 233 पंचायतों में भी ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं। पंचायत में हर बेटी के विवाह पर 51 हजार रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही विकास कार्यों के लिए ग्राम पंचायत के अनुमोदन पर बजट उपब्लब्ध करवाया जाएगा। बेटियों को शिक्षा के लिए भी आर्थिक मदद मिलेगी। जबकि केवल बेटियों वाले परिवारों को डीसी कार्ड दिया गया है, जिसके आधार पर सरकारी कार्यालयों में प्राथमिकता के तौर पर कार्य होंगे।  

Posted By: Sanjay Pokhriyal