नई दिल्ली (जेएनएन)। पर्यावरण को प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग और कार्बन उत्सर्जन जैसे खतरे से बचाने के लिए भारत ने अपना योगदान बढ़ाया है। फिर चाहे पेरिस जलवायु समझौता हो, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन हो या स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन हो, सभी क्षेत्रों में देश ने अभूतपूर्व तरक्की की है। सरकार के प्रयासों का ही नतीजा है कि देश स्वच्छता की ओर अग्रसर है। इस साल पर्यावरण बचाने के लिए होने वाले कुछ प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी भी भारत करेगा। इस साल किए जाने वाले कुछ ऐसे ही प्रयासों पर नजर डाल रहे हैं हर्षित मिश्रा :

अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण दिवस की मेजबानी

पांच जून को अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण दिवस की मेजबानी इस साल भारत कर सकता है। पिछले साल दिसंबर में नैरोबी में आयोजित हुए संयुक्त राष्ट्र की पर्यावरण सभा में केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन ने यह संकेत दिए थे। 1974 में पहली बार आयोजित इस आयोजन के जरिये लोगों को पर्यावरण बचाने के लिए जागरूक किया जाता है। इस बार अगर भारत इसकी मेजबानी करता है तो दुनिया के लिए भारत मिसाल पेश कर सकता है। इससे पहले 2011 में भारत पहली बार इसकी मेजबानी कर चुका है।

बीएस-6 पेट्रोल, डीजल की बिक्री

राजधानी दिल्ली में बीएस-4 की बजाय बीएस-6 मानक वाले पेट्रोल और डीजल की ब्रिकी इस साल एक अप्रैल से शुरू हो जाएगी। पहले इसे पूरे देश में एक अप्रैल 2020 से लागू करना था लेकिन इसे दो साल पहले ही दिल्ली में अनिवार्य किए जाने की घोषणा की गई है। पेरिस समझौते के तहत प्रधानमंत्री द्वारा कार्बन उत्सर्जन में कमी के लिए जताई गई प्रतिबद्धता के तहत यह कदम उठाया जा रहा है। बीएस- 6 को दिल्ली के बाद अन्य महानगरों में इसे अनिवार्य किया जा सकता है। इस मानक वाले ईंधन में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले तत्व सबसे कम होते हैं।

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन

2015 में भारत ने विश्व में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की स्थापना की। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल है। अब तक इसमें 121 देश जुड़ चुके हैं। 2016 में गुरुग्राम में इसके मुख्यालय की आधारशिला रखी गई। इस साल 17 और 18 जनवरी को अबूधाबी में इसके तहत वर्ल्ड फ्यूचर एनर्जी समिट 2018 का आयोजन होना है।

- द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट द्वारा इस साल फरवरी में दिल्ली में वल्र्ड सस्टेनेबल डेवलपमेंट समिट आयोजित होगी।

- इसमें वैज्ञानिक समेत अन्य क्षेत्रों के लोग सतत विकास और पर्यावरण को बचाने के लिए मंथन करेंगे।

पेरिस जलवायु समझौते में बढ़ सकती है भूमिका

- यह समझौता संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में 12  दिसंबर, 2015 को पेरिस में हुआ। चार नवंबर, 2016 से प्रभावी हुआ। 197 देशों ने इसमें हस्ताक्षर किए और 172 देश इसे अनुमोदित कर चुके हैं। पर्यावरण बचाने के प्रयास वर्ष 2020 से शुरू किए जाने हैं। इसके तहत वैश्विक औसत तापमान में बढ़ोतरी को दो डिग्री सेल्सियस के अंदर रोकने का लक्ष्य है।

- दो अक्टूबर, 2016 को कार्बन उत्सर्जन 30 से 35 फीसद कटौती 2030 तक करने को भारत ने प्रतिबद्धता जताई है। 40 फीसद बिजली गैर जीवाश्म ईंधन से बनेगी। 2030 तक देश में वन क्षेत्र को 50 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाया जाएगा।

- 2017 में अमेरिका के इस समझौते से पीछे हटने के बाद इस दिशा में प्रभावी पहल के लिए यह साल भारत के लिए उपयुक्त रहेगा।

स्वच्छ भारत मिशन

- पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए दो अक्टूबर, 2014 को पीएम मोदी ने इस योजना की शुरुआत की।

- इसके तहत ग्रामीण इलाकों में 2019 तक देश को खुले में शौच से पूर्णरूप से मुक्त किया जाना है।

- इसके तहत देश में 5.85 करोड़ शौचालय बनाए गए, नौ राज्य खुले में शौच से मुक्त हुए। स्वच्छता का दायरा 62.45 फीसद बढ़ा।

- द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट द्वारा इस साल फरवरी में दिल्ली में वल्र्ड सस्टेनेबल डेवलपमेंट समिट आयोजित होगी।

- इसमें वैज्ञानिक समेत अन्य क्षेत्रों के लोग सतत विकास और पर्यावरण को बचाने के लिए मंथन करेंगे।

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Posted By: Sanjay Pokhriyal