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Exclusive Interview: 'कर्ज घटाएंगे, इंडिया-फर्स्ट ही रहेगा जियो का विजन', बोले आकाश अंबानी

By Jaiprakash RanjanEdited By: Garima Singh
Published: Tue, 20 Oct 2026 10:54 PM (IST)

आकाश अंबानी ने दैनिक जागरण को दिए साक्षात्कार में जियो प्लेटफॉर्म्स के भारत-फर्स्ट दृष्टिकोण पर जोर दिया, जिसमें घरेलू व्यापार ...और पढ़ें

जियो प्लेटफार्म्स के प्रबंध निदेशक आकाश अंबानी

जियो प्लेटफार्म्स के प्रबंध निदेशक आकाश अंबानी

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जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। देश के इतिहास का सबसे बड़ा आईइपीओ लाने से पहले जियो प्लेटफार्म्स के प्रबंध निदेशक आकाश अंबानी ने दैनिक जागरण के सहायक संपादक जयप्रकाश रंजन को दिए गए साक्षात्कार में भारत-फर्स्ट दृष्टिकोण पर जोर देते हुए कहा कि घरेलू बिजनेस ही केंद्र में रहेगा और मेड-इन-इंडिया 5जी स्टैक को वैश्विक स्तर पर मैनेज्ड सर्विस के रूप में पेश किया जाएगा।

जियो प्लेटफॉर्म्स का करीब 30,213 करोड़ रुपये का आईपीओ 21 अक्टूबर 2026 को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा, जबकि लिस्टिंग 28 अक्टूबर को होने की उम्मीद है। 

प्रश्न: जियो प्लेटफार्म्स ने फ्रेश इश्यू का रास्ता क्यों चुना, जिसमें आफर-फार-सेल नहीं है? आइपीओ का ज्यादातर पैसा कर्ज घटाने और बैलेंस शीट मजबूत करने में लगाने से आपकी निवेश प्राथमिकताएं कैसे बदलेंगी?

उत्तर: पूरी तरह फ्रेश इश्यू का मतलब है कि पैसा जियो प्लेटफार्म्स को मिलेगा, बेचने वाले शेयरधारकों को नहीं। आइपीओ प्रक्रिया से हासिल राशि में से 27,500 करोड़ रुपये तक का इस्तेमाल हमारी मुख्य सब्सिडियरी आरजेआईएल के कुछ कर्ज को पूरी तरह से या आंशिक रूप से चुकाने में होगा। बाकी पैसा सामान्य कारपोरेट कार्यों के लिए रहेगा।

इससे हमारी कंपनी पर कुल कर्ज का बोझ (नेट डेट) काफी कम घटेगा। जहां तक ग्रोथ के लिए निवेश की बात है तो वह हम आंतरिक कैश फ्लो से करेंगे। मजबूत बैलेंस शीट होने का मतलब यह होगा कि भविष्य में फंड जुटाने के लिए हमारे पास ज्यादा विकल्प होगा।

प्रश्न: रिलायंस जियो अपना मुख्य फोकस घरेलू टेलीकाम नेटवर्क से वैश्विक इंफ्रास्ट्रक्चर पावरहाउस की ओर शिफ्ट कर रहा है। क्या आपको यह अपने लिए बड़ी चुनौती लगती है?

उत्तर: मैं इसे घरेलू बिजनेस से दूर जाने वाला बदलाव नहीं कहूंगा। भारत हमारी रणनीति के केंद्र में बना रहेगा। जियो, रिलायंस की तरह ही ‘भारत-फर्स्ट’ दृष्टिकोण अपनाता है। हम विदेश में वही ले जाते हैं जो घर पर पहले से साबित हो चुका है।

हम दुनिया में एकमात्र कनेक्टिविटी प्रोवाइडर हैं जो अपना एंड-टू-एंड 5जी एसए स्टैक राष्ट्रीय स्तर पर चला रहा है। विदेश में माडल यह है कि इसे स्थानीय आपरेटर्स के लिए मैनेज्ड सर्विस के रूप में चलाया जाए।

प्रश्न- कई भारतीय टेक कंपनियां मुख्य रूप से लागत और टैलेंट स्केल पर प्रतिस्पर्धा करती रही हैं। जियो भारत में एंड-टू-एंड स्टैक बना रहा है और इसे वैश्विक स्तर पर मैनेज्ड सर्विसेज पार्टनर के रूप में पेश कर रहा है। यह माडल भारतीय टेक कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्च मूल्य वाली स्थिति में कैसे मदद करता है?

उत्तर: यह माडल हमें मेड-इन-इंडिया तकनीक को वैश्विक मंच पर ले जाने देता है। हमारी महत्वाकांक्षा है कि भारत तकनीक का निर्यातक बने, न कि आयातक। भारत को वह तकनीक निर्यात करनी चाहिए जिसे वह पहले आयात करता था। हमारे मेड-इन-इंडिया 5जी स्टैक ने भारत को स्वदेशी 5जी क्षमता वाला सिर्फ पांचवां देश बनाने में मदद की।

इसलिए हम सिर्फ लागत और टैलेंट पर नहीं, बल्कि अपने आईपी पर प्रतिस्पर्धा करते हैं। हम बाजार के अवसर और रणनीतिक फिट के आधार पर अपने साझेदारों को सावधानी से चुनेंगे।

प्रश्न: आपने मोबिलिटी, होम ब्राडबैंड, एंटरप्राइज सर्विसेज और टेक्नोलॉजी स्टैक के अंतरराष्ट्रीय मोनेटाइजेशन को ग्रोथ इंजन बताया है। रेवेन्यू मिक्स कैसे बदलेगा? शुद्ध वाल्यूम ग्रोथ के मुकाबले उच्च मूल्य वाली सर्विसेज की क्या भूमिका होगी?

उत्तर: हम दो आधारों पर आगे बढ़ते हैं — अधिक ग्राहक और प्रति ग्राहक अधिक मूल्य। विकास कई ऐसे कारकों से आएगा जो एक-दूसरे को मजबूत करते हैं।

मोबिलिटी में ग्राहकों की संख्या में वृद्धि, उपयोग (कंजम्पशन) में वृद्धि, डिजिटल सेवाओं में वृद्धि और प्रति यूनिट आय (रियलाइजेशन) में वृद्धि शामिल है।

होम ब्राडबैंड में फिक्स्ड ब्राडबैंड पेनेट्रेशन के जरिए विस्तार की अपार संभावनाएं हैं। अपने यूबीआर स्टैक और डिजिटल सर्विसेज की वजह से हम अद्वितीय क्षमता रखते हैं। एंटरप्राइज सर्विसेज में बड़े उद्यमों के लिए क्लाउड, आईओटी, मैनेज्ड वाईफाई जैसी डिजिटल सर्विसेज से ग्रोथ आएगी।

उपयुक्त डिजिटल प्रोडक्ट्स व किफायती व विश्वसनीय कनेक्टिविटी दे कर छोटे व मझोले उद्योगों में भी बड़ी संभावना है। मूल्य और वाल्यूम एक-दूसरे को मजबूत करते हैं।

प्रश्न: इन-हाउस एंड-टू-एंड टेक्नोलॉजी स्टैक और 6जी तक ज्यादातर साफ्टवेयर अपग्रेड से जाने की योजना के साथ, जियो अपना आरएंडडी, पेटेंट्स और इंजीनियरिंग टैलेंट कैसे व्यवस्थित कर रहा है ताकि कनेक्टिविटी, एआई और संबंधित तकनीकों में आगे बना रहे?

उत्तर: हम अपने इंजीनियरों को संसाधन, फ्रीडम और जिम्मेदारी देते हैं ताकि वे राष्ट्रीय स्तर की समस्याओं को हल कर सकें। हमारी टीमें मूल तकनीक बनाती हैं, उसे पेटेंट कराती हैं और डिप्लायमेंट के जरिए परिष्कृत करती हैं।

इसी से जियो डब्ल्यूआईपीओ की पेटेंट रैंकिंग में वैश्विक टाप 20 में पहुंच गया है। एआई और 6जी में भी यही दृष्टिकोण अपनाया जाता है।

जियोब्रेन, हमारा अपना एआई इंजन, नेटवर्क आपरेशंस में चलता है क्योंकि हम एआई-नेटिव कंपनी बन रहे हैं। चूंकि हमारा स्टैक साफ्टवेयर-डिफाइंड है, हम 6जी तक ज्यादातर साफ्टवेयर अपग्रेड से जाना चाहते हैं।

प्रश्न: लिस्टिंग से पहले मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में, आप अंबानी परिवार की रणनीतिक दृष्टि की निरंतरता को पब्लिक मार्केट निवेशकों की गवर्नेंस और पारदर्शिता अपेक्षाओं के साथ कैसे संतुलित करते हैं?

उत्तर: जियो रिलायंस ग्रुप का हिस्सा है, जो उच्च स्तर की गवर्नेंस और वित्तीय ईमानदारी के लिए जाना जाता है। पारदर्शिता और जवाबदेही पहले से ही हमारे डीएनए का हिस्सा हैं। हमारा प्रदर्शन हर तिमाही रिलायंस के नतीजों में रिपोर्ट होता है।

निरंतरता दृष्टि में रहती है। गवर्नेंस संरचना में।लिस्टिंग से पब्लिक शेयरधारकों के प्रति जिम्मेदारियां बढ़ती हैं और जियो इन्हें पूरा करने के लिए अच्छी तरह तैयार है।

प्रश्न: अगले पांच से दस सालों में, जियो प्लेटफार्म्स भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए मास प्लेटफार्म की भूमिका और प्रतिस्पर्धी वैश्विक परिदृश्य में भारतीय-विकसित तकनीक निर्यात करने की महत्वाकांक्षा के बीच कैसे संतुलन बनाएगा?

उत्तर: ये महत्वाकांक्षाएं एक-दूसरे की पूरक हैं। भारत में हम कनेक्टिविटी की पहुंच बढ़ाते रहेंगे और डिजिटल सर्विसेज को और उपयोगी बनाएंगे।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हम सावधानी से चुने गए स्थानीय आपरेटर्स के साथ अपने साबित तकनीक स्टैक को मैनेज्ड-सर्विसेज पार्टनर के रूप में डिप्लाय करने की योजना बना रहे हैं। क्रम यही रहेगा-भारत में बनाओ, यहां साबित करो, फिर दुनिया को पेश करो।

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