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दादा धीरूभाई अंबानी की राह पर ईशा-आकाश, दोहराने जा रहे 50 साल पुराना इतिहास; भरी मीटिंग में शुद्ध गुजराती में दी स्पीच

Published: Tue, 20 Oct 2026 05:07 PM (IST)

Jio IPO News: जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ से पहले आकाश और ईशा अंबानी ने गुजरात के ब्रोकरों से मुलाकात कर ...और पढ़ें

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बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| JIO IPO News: देश के सबसे बड़े इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) यानी जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ के मैदान में उतरने से ठीक पहले रिलायंस समूह ने एक बेहद शानदार और रणनीतिक दांव खेला है। कंपनी के कमान संभाल रहे आकाश अंबानी (Akash Ambani) ने हाल ही में गुजरात और पश्चिमी भारत के चुनिंदा और प्रमुख ब्रोकरों के साथ एक विशेष बैठक की।

इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग का मुख्य मकसद लगभग 50 साल पहले रिलायंस के संस्थापक धीरूभाई अंबानी (Dhirubhai ambani) द्वारा रचे गए उस ऐतिहासिक दौर की याद दिलाना था, जब उन्होंने आम भारतीयों को कंपनी का शेयरधारक बनाकर एक नया इतिहास रचा था।

वैश्विक अभियानों के बीच क्षेत्रीय जड़ों पर जोर

यह खास संवाद भारत के अब तक के सबसे बड़े शेयर सेल को ऐतिहासिक सफलता दिलाने के लिए 34 वर्षीय आकाश अंबानी के नेतृत्व में चलाए जा रहे एक बड़े वैश्विक अभियान का अहम हिस्सा है। इस आईपीओ को सफल बनाने के लिए हांगकांग, सिंगापुर, अबू धाबी, लंदन और न्यूयॉर्क जैसे दुनिया के प्रमुख वित्तीय केंद्रों में 60 से अधिक निवेशक बैठकें आयोजित की जा रही हैं।

हालांकि, इन ग्लोबल दौरों के बीच कंपनी ने अपनी पैतृक जड़ों और उस गुजराती कारोबारी संस्कृति को भी पूरी मजबूती से थामे रखा है, जिसने दशकों पहले रिलायंस को फर्श से अर्श तक पहुंचाया था।

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बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद?

मुंबई में आयोजित इस गुप्त और महत्वपूर्ण बैठक में आकाश अंबानी के साथ उनकी जुड़वां बहन ईशा अंबानी (Isha Ambani) और देश के जाने-माने बैंकर उदय कोटक (Uday Kotak) भी मौजूद रहे। उदय कोटक इस आईपीओ में एक वरिष्ठ वित्तीय सलाहकार के रूप में प्रचार-प्रसार और संवाददाता सम्मेलनों की कमान संभाले हुए हैं। साथ ही, वे रिलायंस की पुरानी बाजार विरासत और आधुनिक बैंकिंग दुनिया के बीच एक मजबूत कड़ी की भूमिका निभा रहे हैं।

बैठक की शुरुआत बेहद अनूठे अंदाज में हुई। सूत्रों के मुताबिक, उदय कोटक ने पूरी तरह से शुद्ध गुजराती भाषा में अपनी बात शुरू की और वहां मौजूद ब्रोकरों को ''मेरे साथी ब्रोकर'' कहकर संबोधित किया। उन्होंने शुरुआती कुछ मिनटों तक सिर्फ गुजराती में बात की और केवल पक्के वित्तीय आंकड़े सामने रखने के लिए ही अंग्रेजी का इस्तेमाल किया।

ईशा ने की भाई आकाश की तारीफ

हाल के वर्षों में मुख्य रूप से रिलायंस के खुदरा यानी रिटेल कारोबार की कमान संभाल रही ईशा अंबानी ने भी इस मंच पर अपनी एक दुर्लभ और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई।

उन्होंने भी बैठक में गुजराती भाषा में ही संवाद किया और जियो की शानदार सफलता का पूरा श्रेय अपने भाई आकाश अंबानी को दिया। हालांकि, सबसे छोटे भाई अनंत अंबानी, जो पिछले हफ्ते एक अलग निवेशक बैठक में दिखे थे, इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए।

क्यों खास है यह रणनीति?

इस पूरी प्रस्तुति का मुख्य उद्देश्य रिलायंस को एक गुजराती कंपनी और उस पारिवारिक व्यवसाय के रूप में पेश करना था, जिसकी गहरी जड़ें राज्य की मिट्टी से जुड़ी हैं। जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपने आईपीओ का 'रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस' (विवरण पुस्तिका) भी गुजरात के अहमदाबाद में ही दाखिल किया है।

यह रणनीति खास तौर पर उस क्षेत्रीय ब्रोकिंग समुदाय को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जिनके खुदरा (रिटेल) ग्राहक 1970 और 1980 के दशकों में रिलायंस के शुरुआती दिनों में चट्टान की तरह साथ खड़े रहे थे।

वर्तमान में कंपनी के सामने शेयर बाजार की सुस्ती, परिवार की महत्वाकांक्षाओं से कम मूल्यांकन और उपग्रह संचार को लेकर एलन मस्क के साथ चल रहे विवाद जैसी कई चुनौतियां हैं। ऐसे में आकाश और ईशा अंबानी का यह घरेलू और भावनात्मक जुड़ाव वाला कदम निवेशकों में नया जोश भरने का काम कर रहा है।

बैठक के अंत में ब्रोकरों ने आकाश अंबानी को घेरकर सेल्फी ली, जो यह साबित करने के लिए काफी है कि रिलायंस का यह पारिवारिक और कारोबारी जादू आज भी उतनी ही गहराई से असर कर रहा है।

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