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गौतम अदाणी के 'इन्फ्रा किंग' बनने की स्टोरी: भारत नहीं, बल्कि इस देश से शुरू हुआ था अरबपति बनने का सफर; दिलचस्प है कहानी

Published: Tue, 20 Oct 2026 03:48 PM (IST)Updated: Tue, 20 Oct 2026 04:26 PM (IST)

Gautam Adani PVC trade story: गौतम अदाणी ने 21 साल की उम्र में दक्षिण कोरिया जाकर अपना पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय ...और पढ़ें

गौतम अदाणी की असाधारण व्यापार यात्रा: कोरिया से 'इन्फ्रा किंग' बनने तक का सफर

गौतम अदाणी की असाधारण व्यापार यात्रा: कोरिया से 'इन्फ्रा किंग' बनने तक का सफर

HighLights

  1. 21 साल की उम्र में कोरिया में पहला सौदा।

  2. क्षमता से 10 गुना अधिक PVC का आयात किया।

  3. जोखिम लेकर बने भारत के 'इन्फ्रा किंग'।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| 21 जून 1983 की सुबह दक्षिण कोरिया की धरती पर एक 21 साल के भारतीय युवा ने कदम रखा। जहाज से उतरते ही वह घुटनों पर बैठा और कोरिया (Gautam Adani Korea Story) की धरती को चूम लिया। वह युवा कोई और नहीं, बल्कि आज के दिग्गज उद्योगपति और देश के सबसे अमीर शख्स गौतम अदाणी थे, जिनकी कुल संपत्ति आज 10.45 लाख करोड़ रुपए (109 बिलियन डॉलर) से ज्यादा है। आइए जानते हैं कि कैसे एक छोटी सी प्लास्टिक पैकेजिंग फैक्ट्री चलाने वाले कारोबारी से लेकर भारत के सबसे बड़े 'इन्फ्रा किंग' बनने की यह कहानी शुरू हुई थी।

जब गौतम अदाणी ने मुंबई के ट्रेडर्स ले मिलाया हाथ

अस्सी के दशक में अदाणी परिवार का प्लास्टिक पैकेजिंग का कारोबार था। लेकिन गौतम अदाणी की सोच बाकी कारोबारियों से बिल्कुल अलग थी। उन्होंने देखा कि पैकेजिंग बेचने की कीमत तो तय होती है, लेकिन उसे बनाने वाले कच्चे माल (PVC) के दाम लगातार ऊपर-नीचे होते रहते हैं।

वे समझ गए कि अगर बड़ा मुनाफा कमाना है, तो कच्चे माल को लोकल सप्लायरों के भरोसे छोड़ने के बजाय सीधे विदेश से आयात करना होगा। उन दिनों छोटे व्यापारियों को विदेशी सप्लायर घास नहीं डालते थे। इसलिए अदाणी ने मुंबई के बड़े प्लास्टिक ट्रेडर्स जय शाह और जतिन कोटेचा से हाथ मिलाया।

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जब ट्रेन की फर्श पर सोकर सफर करते थे अदाणी

मशहूर लेखक आरएन भास्कर की किताब "गौतम अदाणी: रिमैजिनिंग बिजनेस इन इंडिया एंड द वर्ल्ड" (Gautam Adani: Reimagining Business in India and the World) के मुताबिक, अदाणी उन बड़े व्यापारियों से धंधे की बारीकियां सीखने के लिए रात की ट्रेनों में उनके साथ सफर करते थे।

व्यापारियों के पास फर्स्ट क्लास का टिकट होता था और अदाणी के पास सेकंड क्लास का, लेकिन सीखने की लगन ऐसी थी कि वे फर्स्ट क्लास के डिब्बे में जाकर उनसे बातें करते और रात को वहीं फर्श पर सो जाते थे।

जब अदाणी ने क्षमता से 20 गुना ज्यादा खरीदा सामान

साल 1983 की पहली तिमाही में उनकी मेहनत रंग लाई और वे कोरिया के एक बड़े सप्लायर तक पहुंच गए। जून में कोरिया पहुंचकर उन्होंने अपनी जिंदगी का पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय सौदा किया। उन्होंने वहां से 200 टन पीवीसी (Gautam Adani PVC trade story) आयात करने का ऑर्डर दे दिया।

मजे की बात यह थी कि उनकी अपनी फैक्ट्री की कुल जरूरत सिर्फ 20 टन की थी। यानी उन्होंने अपनी क्षमता से 10 गुना ज्यादा माल मंगा लिया था। जब बैंक अधिकारी ने फाइल देखकर पूछा कि इतनी बड़ी मात्रा का क्या करोगे, तो अदाणी ने खुद केबिन में जाकर बैंक को मना लिया और लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) मंजूर करवा ली।"

यह कोई तुक्का नहीं था। अदाणी ने समझ लिया था कि ज्यादा माल मंगाने पर वह काफी सस्ता पड़ेगा। जरूरत का 20 टन रखकर बाकी माल छोटे कारोबारियों को बेचने से मोटा मुनाफा कमाया जा सकता है। बस, यहीं से एक पैकेजिंग निर्माता कमोडिटी ट्रेडर बन गया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

एक बार उनका 5,000 टन पॉलीमर लेकर आ रहा जहाज समंदर में डूब गया, जिससे भारी नुकसान हुआ। लेकिन अदाणी ने डरने के बजाय तुरंत एक और बड़ी LC खुलवा दी। इसी बेखौफ सोच और कोरिया के उस पहले सौदे ने 1988 में अदाणी एंटरप्राइजेज की नींव रखी, जो आज दुनिया भर में फैली है।

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