चंडीगढ़, जागरण ब्यूरो। हरियाणा के हिसार जिले के राखीगढ़ी गांव में दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यता के साक्ष्य मिले हैं। हरियाणा सरकार ने राखीगढ़ी को सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे बड़ा शहर होने का दावा किया है। उल्लेखनीय है कि यह सभ्यता ईसा पूर्व 7500 वर्ष तक पुरानी है।

हरियाणा के पुरातत्व मंत्री रामबिलास शर्मा और विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजय वर्धन के मुताबिक अब तक हुए शोध के आधार पर राखीगढ़ी की बसावट का कुल क्षेत्र सात किलोमीटर में फैले होने की संभावना है।

पुरातन शहर राखीगढ़ी की आबादी दस से पचास लाख के बीच हो सकती है। इस सभ्यता पर शोध जारी है, कार्य पूरा होने के बाद और महत्वपूर्ण और एतिहासिक जानकारियां सामने आ सकती हैं। इस सभ्यता के पाकिस्तान, ब्लूचिस्तान, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान व अफगानिस्तान में होने के भी संकेत हैं।

हड़प्पा और मोहनजोदड़ो में पुरातन सभ्यता के मिले साक्ष्यों से यह इलाका बड़ा हो सकता है। राखीगढ़ी में खुदाई से प्राप्त अवशेषों से माना जा रहा है कि यह सिंधु घाटी सभ्यता का दुनिया का सबसे बड़ा चौथा शहर रहा होगा। राखीगढ़ में सड़कें, जल निकासी व्यवस्था और उम्दा किस्म के बर्तन मिले हैं।

इससे उस काल के लोगों के जीवन स्तर के बारे में जानकारी मिलती है। रामबिलास शर्मा के अनुसार वर्ष 1922 से 2015 के बीच सिंधु घाटी सभ्यता के जितने भी साक्ष्य सामने आई, उनमें ज्यादातर सरस्वती नदी के इर्द-गिर्द बसे होने के सबूत मिले हैं। इसलिए सिंधु घाटी सभ्यता को सरस्वती नदी सभ्यता का नाम भी दिया जा सकता है।

राखीगढ़ी में मिले सात स्तूप

राखीगढ़ी में खोदाई के दौरान कुल सात स्तूप मिले हैं। इनमें चार और पांच नंबर स्तूप के नीचे सबसे बड़ी आबादी होने के प्रमाण मिले हैं। सात नंबर स्तूप में अंतिम संस्कार ग्राउंड में मिले सभी नरकंकाल के सिर उत्तर की तरफ हैं। इन कंकाल से यह जानने की कोशिश की जा रही है कि राखीगढ़ी में कितने साल पहले आबादी की बसावट थी।

सरस्वती के लुप्त होने से गायब हुई सभ्यता

पुरातत्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजय वर्धन ने बताया कि सरस्वती नदी के लुप्त होने के साथ ही सिंधु घाटी सभ्यता भी गायब हो गई। पानी की कमी, बारिश न होना व कृषि क्षेत्र चौपट होना भी माने जा रहे हैं।

राखीगढ़ी में बनेगा संग्रहालय

राज्य पुरातत्व विभाग राखीगढ़ी गांव में पांच करोड़ रुपये की लागत से राज्य स्तरीय संग्रहालय बनाएगा। राखीगढ़ी में पंचायत ने पांच एकड़ जमीन विभाग को दान कर दी है। राखीगढ़ी में एक माह में कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

दृष्टावती नदी के किनारे बसा था राखीगढ़ी

सुरेंद्र सोढी, हिसार। माना जा रहा है कि मोहनजोदड़ो और हड़प्पा से भी ज्यादा सभ्यता राखीगढ़ी में मिली है। सरस्वती नदी की सहायक दृष्टावती नदी के किनारे इसका विकास हुआ था। नदी के किनारे बसे राखीगढ़ी सभ्यता की निरंतर खोदाई में मिले सामान और कंकाल आदि से अनुमान लगाया जा रहा है कि यह सभ्यता हड़प्पाकाल से भी प्राचीन रही है। अवशेषों से पता चल रहा है कि उस काल में रहन-सहन, जीवन का स्तर और सामाजिक विकास के स्रोत कैसे थे। पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार सरस्वती नदी के प्रभाव के कारण ही हिसार जिले में तीन स्थानों पर सभ्यताओं का पता चला है। इनमें सबसे बढ़ी सभ्यता राखीगढ़ी, बनावाली (अब फतेहाबाद में) तथा भूना से बिरडाना रोड पर कुनाल गांव शामिल हैं।

सरस्वती नदी के किनारे बसा था हिसार

फिरोजशाह तुगलक ने हिसार फिरोजा शहर के नाम से बसाया था। माना जाता है कि यहां से सरस्वती नदी बहने के कारण ही उसके किनारे शहर बसाया गया। आज भी पुराने शहर में नदी के प्रवाह का इतिहास दोहराया जाता है।

Posted By: Gunateet Ojha