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हावड़ा [ विशाल श्रेष्ठ ]। कहते हैं जो व्यक्ति अपने इतिहास से वाकिफ नहीं है, वह बिना जड़ वाले पेड़ की तरह है। इतिहास को जानना जितना जरूरी है, उसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेज कर रखना भी उतना ही आवश्यक है, खासकर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के स्वतंत्रता संग्राम की गौरवशाली गाथा को। पिछले 40 वर्षो से एक शख्स जी-जान से इस मुहिम में जुटा हुआ है। ये हैं डॉ. देवजीत बंद्योपाध्याय।

पश्चिम बंगाल में मध्य हावड़ा के हालदारपाड़ा स्थित अपनी छोटी सी गैलरी में उन्होंने एक छत के नीचे मानो आजादी के इतिहास को जीवंत कर रखा है। डॉ. बंद्योपाध्याय के पास स्वतंत्रता संग्राम के दौर की ऐसी ढेर सारी दुर्लभ वस्तुएं, पुस्तक-पुस्तिकाएं, आलेख, ऑडियो रिकार्डस, तस्वीरें व दस्तावेज हैं, जिनका अध्ययन करने से आंखों के सामने उस समय का माहौल तैरने लगता है। उन्होंने इंग्लैंड, जर्मनी, रूस व फ्रांस जैसे देशों में जाकर ऐसी कई वस्तुओं का संग्रह किया है, जो आजादी के बाद वहां चली गई थीं।

क्या-क्या हैं गैलरी में 

एकेडमी थिएटर आर्काइव के तहत स्थित इंदिरा गैलरी में महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस व जवाहरलाल नेहरू के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान दिए गए भाषणों के रिकार्डस भी मौजूद हैं। इनमें गांधीजी का बिड़ला हाउस में दिया गया भाषण भी है। एक रिकार्ड में गांधीजी के हस्ताक्षर भी किए हुए हैं। यहां एक ऐसा माउथपीस भी है, जिसके जरिये महात्मा गांधी और नेताजी ने विभिन्न जनसभाओं को संबोधित किया था।

 

गैलरी में स्वंतत्रता संग्राम के दिनों का एक बाइस्कोप है, जिसमें देशभक्ति की फिल्में दिखाकर व गाने बजाकर राष्ट्रप्रेम का अलख जगाया जाता था। दिलचस्प बात यह है कि यह बाइस्कोप डॉ. बंद्योपाध्याय को शहीद मीनार मैदान के पास इसका खेल दिखाने वाले 80 साल के एक वृद्ध के पास से मिला था।

गैलरी में आजादी के समय का बेलो कैमरा है, जिससे स्वतंत्रता संग्राम के कई महानायकों की तस्वीरें खींची गई थीं। अपनी रचनाओं से देशभक्ति का अलख जागने वाले गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की लिखी कई चिट्ठियां यहां संरक्षित हैं।

डॉ. बंद्योपाध्याय ने अपनी मां के नाम पर आधारित इस गैलरी में सन् 1911 के एक ग्रामोफोन को भी सहेजकर रखा है, जब ब्रिटिशकालीन भारत की राजधानी को कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित किया गया था। यहां स्वतंत्रता संग्राम के समय की बहुत सारी फिल्मों के पोस्टरों भी हैं। आजादी के बाद जारी किए गए प्रथम तीन डाक टिकटों का भी यहां अवलोकन किया जा सकता है। स्वतंत्रता संग्राम के महानायकों एवं उस दौर की महत्वपूर्ण घटनाओं पर जारी किए गए 2,000 से ज्यादा डाक टिकट जमा किए गए हैं। स्वंतत्रता प्राप्ति के बाद ऑल इंडिया रेडियो में जब पहली बार राष्ट्रगान बजा था, उस रिकार्ड को भी देवजीत बाबू ने यहां बड़े जतन से रखा है।

दक्षिण कोलकाता के ट्रायंगुलर पार्क इलाके के रहने वाले डॉ. बंद्योपाध्याय ने कहा, मैंने अपनी सारी जिंदगी इन का संग्रह करने और उन्हें सहेजकर रखने में लगा दी। मैं चाहता हूं कि मौजूदा व भावी पीढ़ियां इस बात को समझे कि हमें आजादी कितनी मुश्किलों से मिली है। वे इसकी अहमियत समझें।

Posted By: Ramesh Mishra

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