पुलिस कब दर्ज करती है NCR और कब FIR? दिल्ली मंत्री मामले से समझें कानून का पूरा गणित
दिल्ली पुलिस ने पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर में पीडब्ल्यूडी मंत्री परवेश वर्मा के खिलाफ थप्पड़ मारने के मामले में ...और पढ़ें
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FIR कैसे NCR से अलग होती है?

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर इलाके में सड़क निरीक्षण के दौरान एक व्यक्ति को थप्पड़ मारने के मामले में दिल्ली पुलिस ने पीडब्ल्यूडी मंत्री परवेश वर्मा के खिलाफ सख्त कदम उठाया है।
पुलिस ने इस घटना के संबंध में मंत्री के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) के तहत गैर-संज्ञेय रिपोर्ट (Non-Cognizable Report - NCR) दर्ज कर ली है।
इस पूरी घटन के बाद एक सवाल हर किसी के मन में उठ रहा है कि आखिर गैर-संज्ञेय रिपोर्ट (NCR) होती क्या है और इसका कानूनी प्रक्रिया में क्या महत्व है? आइए इसे आसान शब्दों में समझते हैं।
FIR और NCR का मतलब क्या है?
देश में पुलिस कानून व्यवस्था बनाए रखने का काम करती है। जब किसी व्यक्ति के साथ कोई अपराध होता है, तो वह शिकायत दर्ज कराने पुलिस के पास जाता है। पुलिस मामले की गंभीरता को देखकर दो तरह से केस दर्ज करती है।
FIR (First Information Report) - प्रथम सूचना रिपोर्ट
NCR (Non-Cognizable Report) - गैर-संज्ञेय रिपोर्ट
NCR क्या होती है?
NCR का मतलब Non-Cognizable Report (गैर-संज्ञेय रिपोर्ट) होता है। यह ऐसे छोटे या कम गंभीर मामलों में दर्ज की जाती है, जिनमें हिंसा या बड़ा अपराध शामिल नहीं होता।
NCR किन मामलों में दर्ज होती है?
- फोन, वॉलेट या कोई सामान गुम हो जाना
- छोटी-मोटी कहासुनी या बहस होना
- बिना मारपीट के आपस में गाली-गलौज होना
- धोखाधड़ी के छोटे-मोटे मामले
NCR कैसे अलग है FIR से?
किसी व्यक्ति पर एफआईआर इतनी आसानी से दर्ज नहीं की जा सकती है। एफआईआर केवल संज्ञय यानी गंभीर मामले के आरोप में ही दर्ज की जाती है। एफआईआर में पुलिस के पास बगैर किसी वारंट के आरोपी को आरेस्ट करने का अधिकार होता है, जबकि एनसीआर गैर-संज्ञेय यानी मामूली अपराध के खिलाफ दर्ज की जाती है।
एनसीआर दर्ज करते वक्त पुलिस को किसी व्यक्ति को अरेस्ट करने से पहले कोर्ट की इजाजत लेना अनिवार्य होता है। इसके साथ ही जब किसी व्यक्ति पर FIR दर्ज की जाती है, तो यह मामला कोर्ट तक पहुंचता है, जबकि एनसीआर में ज्यादातर मामले पुलिस द्वारा खुद ही सुलझा लिए जाते हैं।
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