Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    'एयरो इंजन का निर्माण अभी भी एक चुनौती', राजनाथ सिंह बोले- 'देश की बढ़ती रक्षा क्षमताएं संघर्ष भड़काने के लिए नहीं'

    Updated: Thu, 17 Apr 2025 09:38 PM (IST)

    राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत सिर्फ अपनी सीमाओं की ही रक्षा नहीं कर रहा बल्कि अंतरराष्ट्रीय रक्षा इको-सिस्टम में एक प्रमुख भागीदार बनके खुद को स्थापित कर रहा है। भारत रक्षा आयात पर अपनी निर्भरता कम कर देगा और रक्षा उद्योग का एक इको-सिस्टम बनाएगा जिससे नासिर्फ देश की जरूरतें पूरी होंगी बल्कि रक्षा निर्यात की क्षमता को और मजबूती मिलेगी।

    Hero Image
    राजनाथ सिंह ने डिफेंस कानक्लेव 2025 को किया संबोधित (फोटो: पीटीआई)

    पीटीआई, नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि भारत की बढ़ती रक्षा क्षमताएं किसी संघर्ष को भड़काने के लिए नहीं हैं। बल्कि यह देश की सुरक्षा के लिए विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता बनाती हैं। ताकि शांति और समरसता बनी रहे। शांति तभी स्थापित रह सकती है, जब हम बेहद ताकतवर हों।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    उन्होंने कहा कि अब विकसित देशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ने की दिशा में एयरो इंजन का निर्माण अभी भी एक चुनौती बना हुआ है। घातक युद्धक विमानों में लगने वाले जेट इंजनों के निर्माण के लिए कावेरी इंजन परियोजना में देरी हो रही है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को 'डिफेंस कानक्लेव-2025' को संबोधित करते हुए कहा कि कावेरी इंजन परियोजना के लिए वैश्विक कंपनियों जैसे-साफरान, जीई व रॉल्स रॉयस से इसके घरेलू निर्माण ईकाई के लिए बातचीत चल रही है।

    स्वदेशी जेट इंजन बनाने की योजना पर हो रहा काम

    कावेरी परियोजना के जरिये भारत के युद्धक विमानों के लिए स्वदेशी जेट इंजन बनाने की योजना है। लेकिन सरकार अभी तक इसे मूर्तरूप नहीं दे पाई है। उन्होंने भारत की बढ़ती रक्षा क्षमताओं पर कहा कि मिसाइल तकनीक (अग्नि, ब्राह्मोस मिसाइलें), पनडुब्बी (आइएनएस अरिहंत), विमानवाहक युद्धपोत (आइएनएस विक्रांत), ड्रोन, साइबर डिफेंस और हाइपरसोनिक प्रणालियों के क्षेत्र में भारत विकसित देशों से मुकाबला कर रहा है। वह दिन अब दूर नहीं जब भारत नासिर्फ एक विकसित देश के रूप में उभरेगा बल्कि हमारी सैन्य शक्ति भी दुनिया में नंबर एक पर होगी।

    उन्होंने बताया कि इस वर्ष रक्षा उत्पादन 1.60 लाख करोड़ रुपये के पार हो जाने वाली है जबकि वर्ष 2029 तक तीन लाख करोड़ रुपये के रक्षा उपकरणों के निर्माण का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि भारतीय रक्षा निर्माण क्षमताएं बढ़ाने का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता को बढ़ावा देना है। हमारे रक्षा निर्यात इस साल 30 हजार करोड़ रुपये होने की उम्मीद है जबकि 2029 तक 50 हजार करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात होने का लक्ष्य है।

    विदेशी उपकरणों से निर्भरता से परेशानी

    • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि व्यापारिक रोकटोक और टैरिफ-वार के चलते विदेशी उपकरणों के पुर्जों के लिए विदेश पर निर्भरता की परेशानियां सामने ला दी हैं। रसद के लिए नेटवर्क भी मुश्किलें खड़ी करता है खासकर जब ऐन समय पर सैन्य उपकरणों का पहुंचाने का रवैया नई मुसीबतें लाता है।
    • एक अन्य कार्यक्रम में वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि यह प्रक्रिया तभी तक ठीक थी जब वैश्विक माहौल में स्थिरता थी। लेकिन हाल के वर्षों में वैश्विक परिवेश तेजी से बदला है। इधर, राजनाथ सिंह शुक्रवार को महाराष्ट्र छत्रपति संभाजीनगर में राजपूत योद्धा महाराणा प्रताप की प्रतिमा का अनावरण करेंगे।

    यह भी पढ़ें: कठुआ एनकाउंटर पर बहुत बड़ा खुलासा, हथियारों के साथ लंबे समय तक रहने आए थे आतंकी; सेना ने फेल की प्लानिंग