दीपिका के JNU जाने पर ट्विटर पर भिड़े समर्थक और विरोधी, फिल्म में नहीं बदला गया विलेन का धर्म
फिल्म का प्रचार करने दिल्ली आई दीपिका मंगलवार की शाम जेएनयू पहुंच गई थी और रविवार को वहां हुई हिंसा के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन किया था।
नई दिल्ली, प्रेट्र। जेएनयू में प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच 10 मिनट की खामोश मौजूदगी ने अभिनेत्री दीपिका पादुकोण को बुधवार को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया। सोशल मीडिया पर समर्थक और विरोधी भिड़ गए। कुछ लोगों ने दीपिका की फिल्म का बहिष्कार करने का नारा दिया तो कइयों ने उनकी फिल्म देखने का संकल्प दोहराया।
ट्विटर पर देखते ही देखते '#DeepikaBoycottchhapaak', '#ISupportDeepika' और #ChhapakDekhoTapakSe' ट्रेंड करने लगे। फिल्म का प्रचार करने दिल्ली आई दीपिका मंगलवार की शाम जेएनयू पहुंच गई थी और रविवार को वहां हुई हिंसा के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन किया था। हमले में घायल जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष आइशी घोष से उनका हाथ जोड़कर मिलना लोगों को पसंद आया, लोग उनकी तारीफ करने लगे।
कई बॉलीवुड कलाकरों ने दीपिका की सराहना
बॉलीवुड के कलाकारों ने दीपिका की जमकर सराहना की। गुजरे जमाने की अभिनेत्री शबाना आजमी, हर मुद्दे पर सरकार की आलोचना करने वाली स्वरा भास्कर, फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप, विक्रमादित्य मोटवाने, महेश भट्ट, सोनाक्षी सिन्हा, सयानी गुप्ता, अपर्णा सेन इत्यादि ने दीपिका की जमकर प्रशंसा की। किसी ने उन्हें असली हीरो बताया तो किसी ने उनके इस साहस को सलाम किया।
लेकिन, सोशल मीडिया पर दीपिका यूजरों के निशाने पर रहीं। बड़ी संख्या में ट्विटर यूजरों ने लोगों से दीपिका की फिल्म छपाक का बहिष्कार कर अजय देवगन की फिल्म 'तानाजी' देखने की अपील की। एक यूजर ने दीपिका के जेएनयू जाने को फिल्म प्रचार का हथकंडा बताया। यूजर ने लिखा कि फिल्म के प्रचार के लिए टुकड़े टुकड़े गैंग के साथ खड़े होने पर शर्म आनी चाहिए। एक अन्य यूजर ने दीपिका का समर्थन करने वाले लोगों को देशद्रोही बताया।
'छपाक' बायोपिक नहीं, विलेन का धर्म नहीं बदला
दीपिका पादुकोण की फिल्म 'छपाक' के विलेन यानी एसिड फेंकने वाले को हिंदू बताने को लेकर भी सोशल मीडिया पर दिन भर विवाद होता रहा। लेकिन जागरण प्रतिनिधि ने फिल्म की स्क्रीनिंग देखी और स्पष्ट किया कि एसिड फेंकने वाले का नाम जरूर बदला है, लेकिन उसका धर्म नहीं।
हमारी प्रतिनिधि के मुताबिक यह फिल्म बायोपिक नहीं है यानी सिर्फ दिल्ली की एसिड पीडि़ता लक्ष्मी अग्रवाल की कहानी ही इसमें नहीं दिखाई गई है, बल्कि दूसरे शहरों में एसिड हमले में शिकार युवतियों की दर्द भरी जिंदगी को भी इसमें शामिल किया गया है। फिल्म का आधार जरूर लक्ष्मी पर तेजाब फेंकने की घटना को बनाया गया है। इसलिए फिल्म में नाम भी काल्पनिक रखे गए हैं। फिल्म में लक्ष्मी अग्रवाल का नाम बदलकर मालती अग्रवाल कर दिया गया है। उसी तरह मालती पर एसिड फेंकने वाले का नाम नदीम खान से बदलकर बब्बू उर्फ बशीर खान किया गया है। सोशल मीडिया पर कहा जा रहा था कि नदीम खान का नाम राजेश कर दिया गया है।
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