नीलू रंजन, नई दिल्ली। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को नए मुकाम तक पहुंचाते हुए मोदी सरकार दो बड़े दलालों को भारत लाने में सफल रही है। इन दोनों को दुबई से विशेष विमान से भारत लाया गया और ईडी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इनमें एक राजीव शमशेर बहादुर सक्सेना ने अगस्तावेस्टलैंड घोटाले की रकम को इसके अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी, तो दूसरा दीपक तलवार ने संप्रग सरकार के दौरान विमानन क्षेत्र में हजारों करोड़ रुपये की दलाली थी। अदालत ने राजीव सक्सेना को चार दिनों और दीपक तलवार को सात दिनों के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया है, जहां उनसे पूछताछ की जा रही है।

गौरतलब है कि इसके पहले दिसंबर में ही अगस्तावेस्टलैंड घोटाले के मुख्य बिचौलिये क्रिश्चियन मिशेल को भारत लाया गया था। ब्रिटिश नागरिक मिशेल को भी दुबई से ही प्रत्यर्पित कराया गया था, जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में है। मिशेल ने ही संप्रग सरकार में अपनी ऊंची पहुंच का इस्तेमाल कर वीवीआइपी हेलीकाप्टर सौदे को अगस्तावेस्टलैंड हेलीकाप्टर के पक्ष में करा दिया था। इसके एवज ने हेलीकाप्टर बनाने वाली कंपनी 5.8 करोड़ यूरो (तत्कालीन विनिमय दर के हिसाब से लगभग 360 करोड़ रुपये) की दलाली दी थी।

सक्सेना के माध्यम से बंटी थी दलाली की रकम

ईडी के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार अगस्तावेस्टलैंड हेलीकाप्टर खरीद घोटाले में दलाली की रकम का बंदरबांट में राजीव सक्सेना की कंपनियों का इस्तेमाल हुआ था। दरअसल 360 करोड़ रुपये की दलाली की रकम सबसे पहले ट्यूनिशिया की दो कंपनियों गोर्डियन सर्विसेज सर्ल और आइडीएस सर्ल में भेजी गई। वहां से यह रकम कंसल्टेंसी के नाम पर मारिशस स्थित कंपनी इंटरस्टेलर टेक्नोलॉजी में भेजी गई, जो परोक्ष रूप से राजीव सक्सेना की कंपनी है। यहां से यही रकम दुबई की दो कंपनियों यूएचवाई सक्सेना और मैट्रिक्स होल्डिंग्स को भेजी गई। ये दोनों कंपनियां भी राजीव सक्सेना की ही है।

ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि दुबई में दलाली की रकम आने के बाद उसे शेल कंपनियों और हवाला के मार्फत अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचाया गया। मिशेल ने पूछताछ में ईडी के सामने घोटाले में शामिल कई बड़े लोगों का नाम लिया था, लेकिन उन तक दलाली की रकम पहुंचने का सबूत देने में वह नाकाम रहा। उसका कहना था कि यह राजीव सक्सेना को मालूम है कि किस तरह से सभी लोगों तक दलाली की रकम पहुंचाई गी थी। यदि पूछताछ में ईडी राजीव सक्सेना पूरा सच उगलवा लेता है, तो दलाली खाने वालों के खिलाफ शिकंजा कसना आसान हो जाएगा।

तलवार: 6500 करोड़ का दलाल

वैसे ईडी ने दीपक तलवार को 90 करोड़ रुपये विदेश अनुदान नियमन कानून के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया है। लेकिन उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार संप्रग के दौरान दुनिया भर की विमानन कंपनियों के लिए वह सिंगल विंडो की तरह काम करता था। जांच के दौरान इस दौरान तलवार की विभिन्न कंपनियों में विभिन्न विमानन कंपनियों से 6500 करोड़ रुपये से अधिक की रकम आने के सबूत मिले हैं। इनमें अधिकांश कंपनियां सिंगापुर में दीपक तलवार और उसके बेटे आदित्य तलवार के नाम पर पंजीकृत हैं। बड़ी बात यह है कि एयर अरबिया, कतर एयरवेज, एयरबस से लेकर एयर एशिया तक दुनिया की लगभग सभी बड़ी विमानन कंपनियों से तलवार की कंपनियों में मोटी रकम आई है। माना जा रहा है कि इन कंपनियों ने एयर इंडिया के लाभकारी रूटों को उन्हें देने के लिए दलाली की रकम दी थी। अमेरिकी सरकार की रिपोर्ट में दीपक तलवार को एयरबस की दलाली में अहम किरदार निभाने का आरोपी बताया गया था।

ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि दलाली और धोखाधड़ी के आरोप में दीपक तलवार के खिलाफ कुल चार एफआइआर दर्ज है। इनमें एयर इंडिया के लिए 111 विमानों खरीद, कमाई वाले रूटों को निजी कंपनियों को देने, एयर एशिया घोटाला और एफसीआरए घोटाला शामिल हैं। तलवार को फिलहाल एफसीआरए घोटाले में गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि दीपक तलवार के एनजीओ एडवांटेज इंडिया को एयरबस और मिसाइल बनाने वाली यूरोपीय कंपनी एमबीडीए ने लगभग 92 करोड़ रुपये कारपोरेट सामाजिक दायित्व फंड (सीएसआर)के तहत दिये थे। लेकिन दीपक तलवार ने फर्जी बिल दिखाकर सारा पैसा निकाल लिया था। इस आरोप में गृहमंत्रालय पहले ही एडवांटेज इंडिया का एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर चुका है।

Edited By: Tanisk