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    'तेज बुखार पर पिया गोमूत्र, हो गया ठीक', IIT मद्रास के डायरेक्टर का दावा, छिड़ गई बहस; वीडियो वायरल

    मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। एक कार्यक्रम में उन्होंने गोमूत्र के एंटी-बैक्टीरियल एंटी-फंगल और पाचन सुधार गुणों के बारे में बात की। वीडियो में कामकोटि गोमूत्र के कवकरोधी जीवाणुरोधी पाचन संबंधी गुणों एंटी-फंगल और डाइजेस्टिव प्रॉपर्टीज) का समर्थन करते हुए दिख रहे हैं।कामकोटि ने यह दावा किया कि इसका इस्तेमाल इरिटेबल बाउल सिंड्रोम जैसी बीमारियों के लिए किया जाता है।

    By Jagran News Edited By: Shubhrangi Goyal Updated: Mon, 20 Jan 2025 02:54 PM (IST)
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    IIT मद्रास के डायरेक्टर से बढ़ी बहस (फाइल फोटो)

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। एक कार्यक्रम में उन्होंने गोमूत्र के 'एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और पाचन सुधार' गुणों के बारे में बात की। वीडियो में कामकोटि गोमूत्र के 'कवकरोधी, जीवाणुरोधी, पाचन संबंधी गुणों' (एंटि-बैक्टीरियल, एंटि-फंगल और डाइजेस्टिव प्रॉपर्टीज) का समर्थन करते हुए दिख रहे हैं।

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    कामकोटि ने यह भी दावा किया कि इसका इस्तेमाल इरिटेबल बाउल सिंड्रोम जैसी बीमारियों के लिए किया जाता है। उन्होंने इसमें कहा कि यह बड़ी आंत से संबंधित बीमारी ‘इरिटेबल बाउल सिंड्रोम’ जैसी स्थितियों के लिए लाभदायक है। इसके औषधीय गुण पर विचार किया जाना चाहिए। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बवाल मच गया। लोग उनकी जमकर आलोचना कर रहे हैं।

    आईआईटी मद्रास ने अपने बचाव में क्या कहा?

    अपनी टिप्पणी पर आक्रोश के बीच, प्रोफेसर कामकोटि ने आज सुबह अपना बचाव करते हुए कहा, 'गोमूत्र के एंटी-फंगल, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों को वैज्ञानिक रूप से प्रदर्शित किया गया है... संयुक्त राज्य अमेरिका की शीर्ष पत्रिकाओं ने वैज्ञानिक रूप से  रिजल्ट प्रकाशित किया है।'

    गो संरक्षण शाला के कार्यक्रम में कही बात

    कामकोटि पोंगल के फसल उत्सव का जश्न मनाने वाले एक कार्यक्रम में गाय के पोस्टर के सामने खड़े होकर कामकोटि एक 'संन्यासी' की कहानी सुनाते हैं, जिसने 'गौमूत्र' या गोमूत्र पीकर खुद को ठीक किया, और एलान किया। बिखरी तालियों के साथ...'हमें इसके औषधीय महत्व को स्वीकार करना होगा।'

    उन्होंने बताया, एक सन्यासी था... उसे तेज बुखार था और लोग डॉक्टर को बुलाना चाहते थे। लेकिन वह संन्यासी, जिसका नाम मैं भूल गया हूं, उसने (संस्कृत में) कहा, 'गौमूत्र पिबामि' और तुरंत गौशाला में गया और थोड़ा गोमूत्र ले आया। उसने यह सब पी लिया और 15 मिनट में उसका बुखार गायब हो गया।'