J&K व पुडुचेरी को पूर्ण राज्य बनाएगी पर दिल्ली पर कांग्रेस की चुप्पी, लद्दाख को लेकर कही यह बात
कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में राज्यों के वित्तीय एवं सांविधानिक अधिकारों के लिए कुछ बड़े बदलावों का वादा किया है। कांग्रेस ने कहा कि सत्ता में आने पर वह जम्मू-कश्मीर एवं पुडुचेरी को पूर्ण राज्य का दर्जा देगी। कांग्रेस का वादा है कि केंद्र की सत्ता में आने पर दिल्ली के उपराज्यपाल के अधिकारों में कटौती कर दी जाएगी।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में राज्यों के वित्तीय एवं सांविधानिक अधिकारों के लिए कुछ बड़े बदलावों का वादा किया है। कांग्रेस ने कहा कि सत्ता में आने पर वह जम्मू-कश्मीर एवं पुडुचेरी को पूर्ण राज्य का दर्जा देगी। आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने का वादा किया है, किंतु इसी तरह की मांग बिहार भी वर्षों से कर रहा है, जिसके बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है।
पुडुचेरी को पूर्ण राज्य बनाने की बात कही गई है, लेकिन दिल्ली को लेकर ऐसा इरादा नहीं जताया गया, जबकि कुछ दिन पहले ही रामलीला मैदान में संयुक्त रैली के दौरान आम आदमी पार्टी की ओर से इसकी घोषणा की गई थी। सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व भी वहा मौजूद था।
कांग्रेस का वादा है कि केंद्र की सत्ता में आने पर दिल्ली के उपराज्यपाल के अधिकारों में कटौती कर दी जाएगी। संविधान में संशोधन कर प्रविधान किया जाएगा कि तीन आरक्षित विषय (पुलिस, जमीन और लोक व्यवस्था) को छोड़कर अन्य सभी मामलों में उपराज्यपाल एनसीटी, दिल्ली के मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह पर काम करेंगे।
लद्दाख को लेकर कांग्रेस ने किया यह वादा
कांग्रेस ने केंद्र की सत्ता में आने पर लद्दाख के जनजातीय क्षेत्रों को शामिल करने के लिए भी संविधान की छठी अनुसूची में संशोधन करने का वादा किया है। घोषणा पत्र में कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाया कि उसने संघवाद के ताने-बाने को नष्ट कर दिया है। कांग्रेस राज्यों और स्थानीय सरकार को उनका वास्तविक अधिकार दिलाएगी।
कांग्रेस घोषणापत्र
कांग्रेस का मानना है कि भारत की एकता तभी मजबूत होती है, जब इसकी विविधताओं को समेकित किया जाता है। घोषणा पत्र में राज्यों को कर राजस्व में उचित हिस्सेदारी से वंचित करने का आरोप केंद्र सरकार पर लगाया गया है और कहा गया है कि सत्ता में आने पर राजग सरकार के दोहरे उपकर राज को खत्म कर दिया जाएगा। कानून बनाकर केंद्रीय उपकर और अधिभार को सकल कर राजस्व को पांच प्रतिशत तक सीमित कर दिया जाएगा।
- सरकार वित्त आयोग को केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी निर्धारित करने में आबादी और कर प्रयासों को ध्यान में रखने का निर्देश देगी।
- पंचायतों और नगर पालिकाओं को धन ट्रांसफर करने के लिए राज्यों के साथ मिलकर एक फार्मूला बनाया जाएगा।
- शहरी निकायों के प्रभावी शासन के लिए निर्वाचित मेयरों अथवा अध्यक्षों को ज्यादा अधिकार देने के लिए कानून में संशोधन होगा।
- प्रशासन को निर्वाचित अध्यक्षों के प्रति अधिक जवाबदेह बनाया जाएगा।
- ग्राम सभाओं को ज्यादा अधिकार दिए जाएंगे। भूमिका बढ़ेगी।
- उत्तर-पूर्वी राज्यों में जिला परिषदों को वित्तीय मदद बढ़ाई जाएगी।
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