अंतरिक्ष में सैटेलाइट्स में अब ऐसे पैदा की जाएगी बिजली, जानें क्या है कोल्ड फ्यूजन तकनीक
हैदराबाद स्थित स्टार्टअप ‘हाइलेनर टेक्नोलॉजीज’ कोल्ड फ्यूजन तकनीक से अंतरिक्ष में बिजली उत्पादन का परीक्षण करेगा। यह तकनीक सैटेलाइट्स का भार कम करने उनकी उम्र बढ़ाने और स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करने में मदद करेगी। कंपनी ने इसरो और स्काईरूट के साथ लॉन्चिंग के लिए करार किया है। यह तकनीक ऑफ-ग्रिड ऊर्जा समाधान और अंतरिक्ष में डेटा सेंटर को भी सक्षम बनाएगी।

पीटीआई, नई दिल्ली। अंतरिक्ष में सेटेलाइट्स की उम्र बढ़ाने, उन्हें निर्बाध ऊर्जा प्रदान करने, उनके भार में कमी लाने और स्वच्छ ऊर्जा स्त्रोत प्रदान करने के उद्देश्य से विज्ञानी अब कोल्ड फ्यूजन तकनीक पर काम कर रहे हैं। हैदराबाद स्थित स्टार्ट-अप 'हाइलेनर टेक्नोलाजीज' जल्द ही अंतरिक्ष में बिजली उत्पन्न करने के लिए इस तकनीक का प्रदर्शन करने की योजना बना रहा है। इसका उद्देश्य पृथ्वी की कक्षा में सेटेलाइट्स के जीवन को बढ़ाना और उनका वजन कम करना है। साथ ही अंतरिक्ष में लंबी अवधि के मिशन को सक्षम बनाने और सौर ऊर्जा या अन्य ऊर्जा स्त्रोतों पर निर्भरता कम करने का भी इसका महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
हाइड्रोजन फ्यूजन से पैदा होती है बिजली
हाइलेनर टेक्नोलाजीज ने कम ऊर्जा वाले परमाणु रिएक्टर (एलईएनआर) का परीक्षण करने के लिए एक अन्य नवोदित फर्म टेकमी2स्पेस सेटेलाइट्स के साथ समझौता किया है। एलईएनआर बिजली उत्पन्न करने के लिए हाइड्रोजन फ्यूजन का उपयोग करता है। कोल्ड फ्यूजन की अनूठी विशेषता यह है कि यह फ्यूजन रिएक्शन के लिए खपत की गई बिजली के मुकाबले अधिक बिजली उत्पन्न करता है।
हाइलेनर टेक्नोलाजीज के संस्थापक और सीईओ सिद्धार्थ दुराइराजन ने बताया, ''प्रत्येक 100 वाट की इनपुट ऊर्जा के लिए एलईएनआर 178 वाट की आउटपुट थर्मल ऊर्जा उत्पन्न करता है।''
दुराइराजन ने कहा कि परीक्षण एवं प्रक्षेपण के लिए कंपनी ने स्काईरूट और इसरो के छोटे उपग्रह प्रक्षेपण यान और ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) बुक किया है। उन्होंने कहा, ''हमारा उत्पाद तैयार है। हम प्रक्षेपण मंच की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसलिए उनकी प्रक्षेपण तिथियों के आधार पर ही हमारे उत्पाद वहां होंगे।''
गौरतलब है कि टेकमी2स्पेस अंतरिक्ष में कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रहा है। इसका उपयोग अंतरिक्ष में डाटा केंद्रों को संचालित करने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने कहा, ''क्यूबसैट पर ग्राफिक्स प्रोसे¨सग यूनिट (जीपीयू) बहुत अधिक गर्मी उत्पन्न करते हैं। हम उस गर्मी का दोहन करने और इसे सेटेलाइट में उपयोग करने योग्य ऊर्जा के रूप में परिवर्तित करने का प्रयास कर रहे हैं। इससे अंतरिक्ष में लंबी अवधि के मिशन और आफ-ग्रिड बिजली समाधानों के लिए नई संभावनाएं खुल सकती हैं।''
टेकमी2स्पेस के फाउंडर ने क्या कहा?
टेकमी2स्पेस के संस्थापक रौनक कुमार सामंत्रे ने कहा कि उनकी कंपनी एलईएनआर सहित कई ऊर्जा प्रौद्योगिकियों की तलाश कर रही है ताकि कंप्यूट-केंद्रित सेटेलाइट्स में गर्मी निष्कर्षण और संभावित पुन: उपयोग के लिए प्रभावी तरीकों का आकलन किया जा सके। हाइलेनर के पास अपनी कम ऊर्जा परमाणु रिएक्टर तकनीक के लिए सरकार से प्राप्त पेटेंट है। यह तकनीक अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के लिए गर्मी पैदा करने, कई अनुप्रयोगों के लिए भाप उत्पादन, वैश्विक स्तर पर ठंडे क्षेत्रों में कमरे को गर्म करने, और घरेलू एवं औद्योगिक आवश्यकताओं के लिए प्रेरण (इंडक्शन) हीटिंग के लिए इनपुट इलेक्टि्रसिटी में वृद्धि करती है।
दुराइराजन ने कहा कि सौर पैनल, बैटरी और अन्य उपकरणों की मदद से बिजली के उपभोग की वजह से किसी भी सेटेलाइट का भार 40-60 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। हाइलेनर का कोल्ड फ्यूजन डिवाइस और टेकमी2स्पेस का आफ-ग्रिड बिजली समाधान अंतरिक्ष में सेटेलाइट्स को बिजली समाधान प्रदान करने तथा अंतरिक्ष में लंबी अवधि के मिशन का प्रयास कर रहा है। अंतरिक्ष में डाटा सेंटर बहुत जल्द एक वास्तविकता बन जाएंगे।
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